राजीव गांधी हत्या मामले में 27 सालों से जेल में बंद ये लोग कौन हैं?

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की सजा काट रहे ये लोग करीब 27 सालों से तमिलनाडु की जेलों में बंद हैं. उन्हें रिहा करने करने पर विचार किया जा रहा है.

News18Hindi
Updated: September 10, 2018, 6:02 PM IST
राजीव गांधी हत्या मामले में 27 सालों से जेल में बंद ये लोग कौन हैं?
1991 में मानव बम धनु ने राजीव गांधी की हत्या कर दी थी.
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Updated: September 10, 2018, 6:02 PM IST
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई, 1991 को मानव बम धनु ने हत्या कर दी थी. राजीव गांधी की हत्या के दौरान हुए धमाके में कुल 18 लोगों की जान गई थी. पिछले साल इस मामले में तमिलनाडु की जेलों में बंद साजिशकर्ताओं को जीवनभर जेल में रखने की बात उठी थी. लेकिन अब आ रही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु की सरकार राजीव गांधी की हत्या के आरोपियों को फिर एक बार रिहा करने पर विचार कर रही है.

इसका अधिकार वहां के गवर्नर बनवारीलाल पुरोहित को संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत मिला हुआ है. अभी तक तमिलनाडु की जेलों में बंद आरोपी करीब 27 साल जेलों में काट चुके हैं. हालांकि, इन आरोपियों को गांधी-नेहरू परिवार पहले ही माफ कर चुका है.

इस मामले में लगभग एक हजार गवाहों के लिखित बयान, 288 गवाहों से जिरह, 1477 दस्तावेजों जिनके कुल पन्नों की संख्या 10000 से ज्यादा थी, 1,180 नमूनों, सबूतों और वकीलों के हजारों तर्कों के बाद विशेष न्यायालय ने सभी 26 दोषियों को हत्या और षड्यंत्र का दोषी पाया. उसने वर्ष 1998 में सबको मौत की सजा सुना दी. सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि विशेष अदालत का फैसला न्याय नहीं बल्कि ‘न्यायिक नरसंहार’ है और 1999 में इन 26 में से 19 लोगों को रिहा कर दिया था.

ये हैं तमिलनाडु की जेल में बंद राजीव गांधी की हत्या के आरोपी -

एजी पेरारिवलन
30 जुलाई, 1971 को तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में जन्मे एजी पेरारिवलन 1991 में अपनी गिरफ्तारी के वक्त तक इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में अपना डिप्लोमा पूरा कर चुका था.

सिवारासन ही वह इंजीनियर था जिसने राजीव गांधी को जिस बम से उड़ाया गया, उसके लिए 9 वोल्ट की बैटरी का इंतजाम किया था.

मुरुगन
मुरुगन, श्रीलंका के जाफना से आया था. और लिट्टे का मुख्य प्रशिक्षक और बम एक्सपर्ट था. जिसकी शादी नलिनी श्रीहरन से हुई थी. दोनों ही पति-पत्नी को सुप्रीम कोर्ट ने 1999 में फांसी की सजा सुनाई थी. एक साथ अपनी सजा काटते हुए नलिनी ने एक बच्ची को जन्म दिया था. जिसके बाद उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था. उसके ऊपर इस विस्फोट में शामिल लोगों के ब्रेनवॉश करने का आरोप था.

संथन
12 सितंबर, 1990 को इस बम धमाके को अंजाम देने के लिए भारत पहुंचे पहले दल में शामिल था. संथन, राजीव गांधी को बम से उड़ाने वाली मानव बम धनु का दोस्त था. संथन की गतिविधियों पर लिट्टे इंटेलिजेंस चीफ पोट्टु अम्मान की नज़र थी. एक बार नलिनी ने अपने जांच के दौरान अपने बयान में कहा था, संथन और सिवरासन ने ऐसे किसी भी इंसान को नहीं बख्शा, जिसने उनका साथ नहीं दिया.

संथन के ऊपर हत्यारों की मदद का आरोप था.

एस नलिनी
नलिनी ने अपना ग्रेजुएशन चेन्नई कॉलेज से पूरा किया था. और चेन्नई में ही एक प्राइवेट कंपनी में स्टेनोग्राफर की नौकरी कर रही थी. साथ ही साथ वह डिस्टेंस से मास्टर्स का कोर्स भी कर रही थी. सुनवाई के दौरान उसने कबूला कि वह पहले एक लिट्टे समर्थक एक्टिविस्ट के संपर्क में आई और बाद में एक एक्टिव कैडर बन गई. उसका भाई पीएस भाग्यनाथन भी एक एक्टिव लिट्टे समर्थक था और उसके प्रेस से तमिल ईलम समर्थक साहित्य का प्रकाशन होता था.

गिरफ्तार होने के कुछ महीनों बाद ही नलिनी की एक बेटी हुई थी. जस्टिस थॉमस द्वारा नलिनी की फांसी माफ करने का एक कारण यह भी था कि उसकी एक छोटी बेटी थी और यदि मुरुगन और नलिनी दोनों को फांसी होती तो यह बच्ची अनाथ हो जाती. कुछ समय बाद सोनिया गांधी व्यक्तिगत तौर पर राष्ट्रपति से मिलीं और उनसे नलिनी की फांसी माफ करने की अपील की. साल 2000 में दया याचिका को मंजूर करते हुए नलिनी की फांसी माफ कर दी गई.

जयकुमारन
जयकुमारन की बहन की शादी इसी केस में दोषी पाए गये पयास से हुई थी. कथित तौर पर दोनों को भारत में लिट्टे ने भेजा था, ताकि वे इस बम धमाके को करने वाले आतंकियों के लिए सेफ जगह का इंतजाम कर सकें.

पयास
पयास और जयकुमारन दोनों ही पर हमले के बाद बचे हुए आतंकियों की रहने और हथियारों के जरिए मदद करने का था. ट्रायल कोर्ट ने इसे मौत की सजा दी थी. जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि वे साजिश में सीधे शामिल थे, इसका सुबूत नहीं मिलता.

पी. रविचंद्रन
रवि पर लिट्टे का एक एक्टिव सदस्य होने का आरोप था. यह हथियारों की ट्रेनिंग के लिए श्रीलंका भी गया था. यहीं पर वह कई बार विद्रोही लीडर से मिला था. पोट्टु अम्मान ने उसे एक मुलाकात के दौरान सिवरासन से मिलवाया था और उसे सिवरासन के लिए जरूरी इंतजाम करने को कहा गया था.

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