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जब छड़ी से पीटने वाले मौलवी साहब ने राजनाथ सिंह को माला पहनाई और रो पड़े

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Updated: July 10, 2019, 10:36 AM IST
जब छड़ी से पीटने वाले मौलवी साहब ने राजनाथ सिंह को माला पहनाई और रो पड़े
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह सिर्फ 13 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़ गए थे. उसके बाद वो राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते गए और यूपी के सीएम बने, देश के गृहमंत्री और रक्षामंत्री का पद संभाला

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केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बीजेपी के ताकतवर नेताओं में से रहे हैं. हमेशा से सफेद धोती और पूरी बांह का कुर्ता पहनने वाले राजनाथ सिंह की छवि साफसुथरे राजनेता की रही है. राजनाथ सिंह का जन्म यूपी के चंदौली के भभौरा गांव में 10 जुलाई 1951 को हुआ था. सिर्फ 13 साल की उम्र में 1964 में वो आरएसएस के साथ जुड़ गए. उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से फिजिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और कुछ वक्त तक लेक्चरर भी रहे. 1974 में वो मिर्जापुर यूनिट के भारतीय जनसंघ के सेक्रेटरी बने. आपातकाल के दौरान वो जेल में भी रहे. उस दौरान के एक वाकये की अक्सर चर्चा होती है.

जब रामप्रकाश गुप्ता ने कहा था- बेटा एक दिन तुम सीएम बनोगे
यूपी के सीएम रह चुके रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह इमरजेंसी के दौरान एक ही जेल में बंद थे. रामप्रकाश गुप्ता ने यूं ही राजनाथ सिंह का हाथ देखना शुरू किया. राजनाथ सिंह उस वक्त जनसंघ से जुड़े हुए थे. रामप्रकाश गुप्ता भी जनसंघ में ही थे. राजनाथ सिंह की हथेलियों को गौर से देखते हुए रामप्रकाश गुप्ता ने कहा था कि बेटा एक दिन तुम बहुत बड़े नेता बनोगे. राजनाथ सिंह बोले- कितने बड़े गुप्ता जी. रामप्रकाश गुप्ता बोले- यूपी के सीएम जितने बड़े. राजनाथ सिंह हंसने लगे. उस वक्त उनकी उम्र महज 25 साल थी. बाद में ये बात सच निकली. राजनाथ सिंह यूपी के सीएम ही नहीं बने बल्कि उन्होंने देश के गृहमंत्री और रक्षामंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद भी संभाला.

 नकल अध्यादेश 1992 के नाम से कानून बनाया

1977 में वो पहली बार विधायक बने. 1991 में वो कल्याण सिंह की सरकार में शिक्षा मंत्री रहे. उस वक्त उत्तर प्रदेश में परीक्षाओं में जमकर नकल होती थी. शिक्षा मंत्री रहते हुए राजनाथ सिंह नकल रोकने के लिए नकल अध्यादेश 1992 के नाम से कानून लेकर आए. इस कानून की वजह से वो काफी चर्चित हुए. पूरी यूपी की परीक्षाओं में सख्ती बरती जाने लगी.

दो साल रहे यूपी के सीएम
इसके बाद वो 2000 से लेकर 2002 तक यूपी के सीएम भी बने. अटल-आडवाणी के दौर में राजनाथ सिंह बीजेपी के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक रहे. राजनाथ सिंह 2005 से 2009 और 2013 से 2014 के बीच दो बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे. 2014 की मोदी सरकार में उन्होंने गृहमंत्री का पद संभाला. इसके बाद प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा चुनकर आई मोदी सरकार में रक्षा मंत्री हैं.
Rajnath singh birthday special when union defence minister get emotional after remembering his school days
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह


जब पिटाई करने वाले मौलवी साहब ने फूलों की माला पहनाई
राजनाथ सिंह ने एक बार अपने बचपन के बारे में मजेदार किस्सा बताया था. लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में अपने बचपन के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब वो प्राइमरी स्कूल में थे उनके स्कूल में एक मौलवी साहब पीटी ( शारीरिक शिक्षा ) टीचर हुआ करते थे. कोई भी स्टूडेंट्स जब पीटी के दौरान शरारत करता तो मौलवी साहब जोरदार थप्पड़ लगाते थे. कभी वो छड़ी से भी बच्चों को पीट दिया करते थे. मौलवी साहब की छड़ी का सबमें खौफ हुआ करता था.

राजनाथ सिंह ने बताया था कि यूपी का शिक्षा मंत्री बनने के बाद एक बार वो काफिले के साथ अपने घर जा रहे थे. उन्होंने देखा चंदौली के पास सड़क किनारे एक 90 साल का बुजुर्ग हाथों में फूल लिए खड़ा है. राजनाथ सिंह उन्हें तुरंत पहचान गए. ये वही मौलवी साहब थे. राजनाथ सिंह ने अपनी गाड़ी रुकवाई. मौलवी साहब ने बड़े प्यार से उनके गले में माला पहनाई और राजनाथ सिंह ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया. इस भावुक पल में मौलवी साहब की आंखों से आंसुओं की धारा फूट पड़ी. राजनाथ सिंह खुद काफी इमोशनल हो गए.

चपरासी से भी कम मिली पेंशन
राजनाथ सिंह के बारे में एक और दिलचस्प बात कम ही लोग जानते हैं. राजनाथ सिंह ने पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद मिर्जापुर डिग्री कॉलेज में लेक्चरर की नौकरी पकड़ ली थी. साल 2000 में उन्होंने नौकरी से रिटायरमेंट ले लिया. रिटायरमेंट के बाद उन्हें बहुत कम पेंशन मिला करती थी. कम ही लोग जानते हैं कि उन्हें चपरासी से भी कम पेंशन मिलती थी. रिटायर होने के बाद उन्हें 1350 रुपये पेंशन के तौर पर मिलते थे. उनके पेंशन की रकम 9500 बनी थी. लेकिन उन्होंने ये रकम लेने से इनकार कर दिया. उनसे जब कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन ने इसकी वजह जाननी चाही तो उन्होंने कहा कि 1992 के बाद से उन्होंने छात्रों को नहीं पढ़ाया है. इसलिए जब तक उन्होंने छात्रों को पढ़ाया है उसी साल के हिसाब से उन्हें पेंशन की रकम मिलनी चाहिए. इसके बाद पेंशन की जो रकम कॉलेज ने तय की वो चपरासी से भी कम थी.

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First published: July 10, 2019, 10:15 AM IST
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