भारत में आज पहली बार पैराशूट से उतरने वाले व्यक्ति बने थे रामचंद्र चटर्जी

राम चंद्र चटर्जी (Ram Chandra Chatterjee )भारतीय कलाबाज जिमनास्ट, बैलूनिस्ट, पैराशूटिस्ट और एक देशभक्त भी थे. (फाइल फोटो)

राम चंद्र चटर्जी (Ram Chandra Chatterjee )भारतीय कलाबाज जिमनास्ट, बैलूनिस्ट, पैराशूटिस्ट और एक देशभक्त भी थे. (फाइल फोटो)

22 मार्च 1890 को राम चंद्र चटर्जी (Ram Chandra Chatterjee) पैराशूट (Parachute) से उतरने वाले पहले भारतीय (First Indian) व्यक्ति बने थे. उन्होंने एक जिम्नास्ट और बलूनिस्ट के तौर पर भी भारत का नाम रोशन किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 22, 2021, 6:54 AM IST
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वैसे तो 22 मार्च के इतिहास (History) में बहुत सारी घटनाएं दर्ज हैं, लेकिन 22 मार्च को ही भारत में पहली बार एक  भारतीय ने पैराशूट (Parachute) से उतरने का गौरव हासिल किया था. यह कारनामा रामचंद्र चटर्जी (Ram Chandra Chatterjee) ने किया था. चटर्जी भारतीय कलाबाज जिमनास्ट, बैलूनिस्ट और पैराशूटिस्ट होने के साथ ही एक देशभक्त के तौर पर भी पहचाने जाते थे. 1890 में उन्होंने यह इतिहास रचा था.

कहां हासिल की थी यह उपलब्धि

चटर्जी  ने अपना पैराशूट ‘द एम्प्रैस ऑफ इंडिया’ नाम के गुब्बारे में अपना पैराशूट फिट किया और कलकत्ता के मिंटो पार्क के पास तिवोली गार्डन से उड़ान भरी. इसके बाद 3500 फीट की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद वे पैराशूट से नीचे उतरे और ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय बने.

बन गए थे राष्ट्रीय नायक
इस घटना के गवाहों में एम्बान के राजा, चीनी राजदूत, ब्रिटिश बलूनिस्ट पर्सीवल स्पेसर, अबींद्रनाथ टैगोर और योगेंद्रनाथ सरकार शामिल थे. धरती पर सफल लैंडिंग करने के बाद जनता ने उनका भरपूर स्वागत किया. वे गुब्बारे की उड़ान भरने वाले पहले भारतीय भी थे. उनके साहस ने उन्हें राष्ट्रीय नायक बना दिया था.

सर्कस में बने कलाबाज

रामचंद्र चटर्जी  उत्तरी कलकत्ता के शिमौली इलाके के कंसारीपुरा के रहने वाले थे. उन्होंने अपना करियर हिंदू मेला के संस्थापक नाबागोपाल मित्रा की नेशनल सर्कस कंपनी ने एक कालबाज के तौर से शुरू किया था.  वे उड़ने वाले ट्रपीज खिलाड़ी थे और बाद में वे ग्रेट यूनाइटेड इंडियन सर्कस कंपनी के निदेशक बन गए थे.



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भारत की पहली पैराशूट (Parachute) लैंडिंग 3500 फीट की ऊंचाई से हुई थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


पहले लपका बलूनिस्ट बनने का मौका

चटर्ची ने गवर्नमेंट नॉर्मल स्कूल में जिमनास्ट के शिक्षक के तौर पर भी काम किया था. जब ब्रिटिश बलूनिस्ट पेर्सिवल जी स्पेंसर अपने शो के लिए कलकत्ता आए तो चटर्जी ने उनसे बलूनिंग की कला सिखाने का निवेदन किया. स्पेंसर ने उनसे 500 रुपये की फीस की मांग कर दी. इसके बाद स्पेंसर ने उन्हें बलूनिंग सिखाई.

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पहले गुब्बारे की उड़ान

चटर्जी ने अपनी पहली गुब्बारे की उड़ान स्पेंसर के साथ 10 अप्रैल 1889 में ली. दोनों ने द वायसराय नाम के गुब्बारे में कार्केलडांगा में ओरिएंटर गैस कंपनी के मैदान में यह उड़ान भरी. इस तरह चटर्जी गुब्बारे से उड़ान भरने वाले पहले भारतीय भी बन गए.  इस गुब्बारे में गैस कंपनी के निदेश  कोट्स नेविन की निगरानी में 20 हजार क्यूबिक फीट कोल गैस भरी गई. इस गुब्बारे ने तीन मील का सफर तय किया.

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उस जमाने में पैराशूट (Parachute) गुब्बारे पर ऊपर ले जाया जाता था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


खुद की पहली उड़ान

गुब्बारे की इस उड़ान के उस समयके अखबारों में खूब चर्चा हुई और इस तरह से चटर्जी पहले भारतीय एरोनॉट कहलाए गए.  इस सफलता के बाद चटर्ची ने ऐलान किया कि वे खुद अपना एक गुब्बारा बनाकर देशभर का दौरा करना चाहते हैं. इसके बाद चटर्जी ने द वायसराय को ही खरीद लिया और उसे द सिटी ऑफ कैलकटा नाम दिया.  और 11 मई 1889 को उन्होंने अकेले ही गुब्बारे की उड़ान भरी.

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चटर्जी हमेशा ही अपने साहस के लिए जानेजाते थे. 27 जून 1889 को उन्होंने अपनी दूसरी गुब्बारे की उड़ान में दिक्कतें आने के बाद भी जारी रखा और जोखिम लेकर सफल लैंडिंग भी की. इसके बाद 22 मार्च 1890 को उन्होंने पैराशूट से सफल लैंडिंग की और देश के पहले पैराशूट लैंडिंग करने वाले व्यक्ति बनने का गौरव हासिल किया.
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