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राममंदिर निर्माण के लिए पहले से जमा है दान में मिली इतनी रकम

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Updated: February 6, 2020, 1:11 PM IST
राममंदिर निर्माण के लिए पहले से जमा है दान में मिली इतनी रकम
रामजन्मभूमि न्यास ने मंदिर निर्माण के लिए चंदा इकट्ठा कर रखा था

अयोध्या (Ayodhya) में राममंदिर (Ram Mandir) निर्माण के लिए 80 के दशक से चंदा इकट्ठा करना शुरू हुआ था. विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए 1985 में श्रीराम जन्मभूमि न्यास की स्थापना की थी.

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अयोध्या (Ayodhya) में भव्य राममंदिर (Ram Mandir) निर्माण के लिए मोदी सरकार (Modi Government) ने श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नाम से ट्रस्ट (Trust) बना दिया है. इस ट्रस्ट में 15 सदस्य होंगे. मंदिर निर्माण के लिए सरकार पैसा खर्च नहीं करेगी बल्कि ट्रस्ट ये रकम जनता से दान के जरिए इकट्ठा करेगा. केंद्र सरकार ने मंदिर निर्माण के लिए एक रुपए का दान भी दे दिया है.

अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए 80 के दशक से चंदा इकट्ठा करना शुरू हुआ था. विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए 1985 में श्रीराम जन्मभूमि न्यास की स्थापना की थी. अब तक राममंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि न्यास ही चंदे की रकम का हिसाब किताब रखती है. सवाल है कि इस वक्त राममंदिर निर्माण के लिए न्यास के पास कितने पैसे हैं और अब, जब केंद्र सरकार ने नया ट्रस्ट बना दिया है तो इन पैसों का क्या होगा?

राममंदिर निर्माण के लिए दान में मिली है इतनी रकम
मंदिर निर्माण के लिए दान में मिली रकम को लेकर कई तरह की जानकारी सामने आ रही है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक राममंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि न्यास के पास कॉपर्स फंड में करीब साढ़े 8 करोड़ रुपए हैं, जबकि नॉन कॉपर्स फंड में करीब साढ़े चार करोड़ रुपए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 2018-19 में रामजन्मभूमि न्यास को करीब 45 लाख रुपए का चंदा मिला था, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष में संस्था को डेढ़ करोड़ की रकम चंदे से मिली थी.

द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक रामजन्मभूमि न्यास के पास इस वक्त सिर्फ 2 करोड़ रुपए की रकम बची है. रिपोर्ट के मुताबिक विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा कि संस्था के पास करीब 2 करोड़ रुपए की रकम जमा है. उन्होंने बताया है कि अयोध्या के कारसेवकपुरम में संस्था के कार्यकर्ता पिछले 30 वर्षों से मंदिर निर्माण के काम में लगे हैं. मंदिर निर्माण में पत्थर खरीदने से लेकर उसे तराशने में लगे मजदूरों पर पैसे खर्च किए गए हैं. मंदिर निर्माण का नक्शा बनाने वाले आर्किटेक्ट को भी न्यास ने भुगतान किया है. इसके बाद करीब 2 करोड़ की रकम बैंक में जमा है.

ram mandir construction plan there is so much money already donated for the construction of ram temple
अयोध्या में अब भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा


80 के दशक से जमा हो रहा है मंदिर निर्माण के लिए पैसाअयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण के लिए 80 के दशक से ही जनता के दान से रकम इकट्ठा की जा रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक उस दौरान विश्व हिंदू परिषद की संस्था रामजन्मभूमि न्यास ने कुल 8.25 करोड़ रुपए जमा किए थे. ये रकम देश की 6 करोड़ जनता ने दिए थे. वीएचपी के उपाध्यक्ष ने बताया है कि बैंक में रखने की वजह से ब्याज सहित ये रकम 30 करोड़ तक पहुंच गई. लेकिन पिछले दिनों हुए निर्माण कार्य में 28 करोड़ रुपए खर्च हो गए. अब संस्था के पास करीब 2 करोड़ रुपए ही बच रहे हैं.

पहले मंदिर निर्माण के लिए कितने पैसे के इंतजाम का था लक्ष्य
1989 में जब मंदिर निर्माण के लिए आम जनता से चंदा वसूला गया, उस वक्त मोटे तौर पर अनुमान लगाया गया था कि मंदिर के निर्माण में 30 करोड़ रुपए का खर्च आएगा. लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीतता गया मंदिर निर्माण की लागत भी बढ़ती गई.

1989 में रामजन्मभूमि न्यास ने लोगों से सवा रुपए से लेकर दस रुपए तक दान करने की अपील की थी. अस्सी के दशक में राममंदिर निर्माण में चंदा इकट्ठा करने के लिए एक नारा बड़ा प्रचलित हुआ था. वो नारा था- सवा रुपैया दे दे रे भैया राम शिला के नाम का, राम के घर में लग जाएगा पत्थर तेरे नाम का. इस नारे के साथ वीएचपी के सदस्य घर-घर पहुंच कर चंदा इकट्ठा किया करते थे.

हालांकि वीएचपी का कहना है कि ये उस वक्त की बात है. 1989-90 के बाद वीएचपीस ने जनता से राममंदिर निर्माण के लिए चंदा नहीं मांगा. तब से लेकर अब तक राममंदिर परिसर में मंदिर निर्माण का कार्य उसी रकम से किया जा रहा है.

1989 में राममंदिर निर्माण के लिए पूरे देश से चंदा मांगा गया था. अब अयोध्या में रामलला विराजमान के पास चंदे की पेटी से ही हर महीने कुछ रकम इकट्ठा हो जाती है. बीबीसी की रिपोर्ट में वीएचपी के उपाध्यक्ष चंपत राय कहते हैं कि हमारे पास इस वक्त 11 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है. इसमें मंदिर निर्माण से जुड़ी चीजें भी शामिल हैं. मसलन- पत्थर और पत्थर काटने की मशीनें. वीएचपी चाहती है कि उसके बनाए मॉडल के आधार पर ही भव्य राममंदिर का निर्माण हो.

ram mandir construction plan there is so much money already donated for the construction of ram temple
अयोध्या में राम मंदिर बाबरी मस्जिद विवाद वर्षों से चला आ रहा था


चंदे की रकम का अब क्या होगा
अब सवाल ये उठता है कि राममंदिर निर्माण के लिए रामजन्मभूमि न्यास ने जो पैसा इकट्ठा किया था, उसका क्या होगा? द प्रिंट के मुताबिक वीएचपी के अध्यक्ष वी एस कोकजे का कहना है कि संस्था दान में मिले पैसे का इस्तेमाल मंदिर निर्माण में ही करना चाहती है. न्यास चाहता है कि उसे भी ट्रस्ट में शामिल किया जाए.

कोकजे का कहना है कि वो नए ट्रस्ट को दान में मिले पैसे को देने को तैयार हैं. उनका कहना है कि ट्रस्ट अगर उनसे संपर्क नहीं करता है तो वो दान में मिली रकम को रामजन्मभूमि न्यास को सौंप देंगे.

राममंदिर निर्माण को मिले दान पर उठते रहे हैं विवाद
राममंदिर निर्माण को मिले चंदे की रकम को लेकर विवाद भी उठते रहे हैं. 2017 में निर्मोही अखाड़े ने विश्व हिंदू परिषद पर आरोप लगाया था कि मंदिर निर्माण के नाम पर उन्होंने 1400 करोड़ रुपए की रकम जमा कर ली है. निर्मोही अखाड़े के सदस्य सीताराम ने आरोप लगाया था कि वीएचपी के नेता मंदिर निर्माण के बजाए दान में मिली रकम से अपने लिए बिल्डिंगे बनवा रहे हैं.

इसी तरह साल 2015 में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने राममंदिर निर्माण के दान में हेराफेरी का बड़ा आरोप लगाया. मनीष तिवारी का कहना था कि चंदे में मिली रकम का कोई हिसाब किताब नहीं रखा गया है. उनका कहना था कि 80 के दशक में दान के नाम पर 600 करोड़ रुपए जमा किए गए और उसे स्विस बैंक में जमा कर दिया गया. हालांकि उनके पास इसका कोई प्रमाण नहीं था.

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First published: February 6, 2020, 1:11 PM IST
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