होम /न्यूज /नॉलेज /Ramakrishna Parmahansa Birthday: महान संत क्यों माने जाते हैं रामकृष्ण परमहंस

Ramakrishna Parmahansa Birthday: महान संत क्यों माने जाते हैं रामकृष्ण परमहंस

रामकृष्ण परमहंस (Ramakrishna Paramahamsa) ने पूरी दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाया था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

रामकृष्ण परमहंस (Ramakrishna Paramahamsa) ने पूरी दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाया था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) के गुरू रामकृष्ण परमहंस (Ramakrishna Paramhamsa) सच्चे संत की सटीक परिभाषा थे. वे ...अधिक पढ़ें

    Religion, Spiritualism, Hindu Religion, Ramakrishna Paramhansa, Saint, Swami Vivekananda, Ramakrishna Paramahamsa

    19वीं सदी में बंगाल में एक महान संत (Great Saint) ने दुनिया को धर्म और आध्यात्म की नई राह दिखाई थी. रामकृष्ण परमहंस (Ramakrishna Paramahamsa) ने काली मां की भक्ति और मानव सेवा करते हुए अपने शिष्यों को धर्म और भक्ति का सच्चा पाठ पढ़ाया था. मानव सेवा को जाति धर्म सभी से उच्च स्तर का दर्जा देने वाले रामकृष्ण ने स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) जैसे नास्तिक को ईश्वर का ज्ञान दिया जिन्होंने आगे चल कर पूरी दुनिया से हिंदू धर्म और वेद वेदांत का परिचय करवाया. (तस्वीर: Wikimedia Commons)
    Spiritualism, Hindu Religion, Ramakrishna Paramhansa, Saint, Swami Vivekananda, Ramakrishna Paramahamsa, Lord Vishnu,

    रामकृष्ण परमहंस (Ramakrishna Paramahamsa) का जन्म 18 फरवरी 1836 में कोलकाता (Kolkata) के पास कामारपुकुर गांव में गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम खुदीराम और माता का नाम चंद्रा देवी थी. उनका बचपन का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था. बचपन से ही वे सभी के चहेते थे. बताया जाता है कि उनके माता पिता को स्वप्न स्वयं भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने अपने गदाधर रूप में दर्शन दिए थे और कहा था कि वे उनके घर जन्म लेंगे. (तस्वीर: Wikimedia Commons)
    Religion, Spiritualism, Hindu Religion, Ramakrishna Paramhansa, Saint, Swami Vivekananda, Ramakrishna Paramahamsa, Kolkata, Dakshineshwar

    बालक गदाधर (Ramakrishna Paramahamsa) को छह वर्ष की छोटी आयु से ही ईश्वर के दर्शन होने लगे थे. सात साल की उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया और परिवार के लिए आर्थिक संघर्ष की स्थिति आ गई. उन्हें बड़े भाई रामकुमार चट्टोपाध्याय ने उन्हें पाला जो पाठशाला संचालक थे. रामकुमार उन्हें अपने साथ कोलकाता (Kolkata) ले गए. गणित और संस्कृत में रुचि के होने के बाद भी उनका पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगा. दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में प्रमुख पुजारी नियुक्त हुए थे. और रामकृष्ण उनकी सहायता करते थे. उनका मुख्य काम काली देवी (Kali Devi) की प्रतिमा को सजाने का था. बड़े भाई की मृत्यु के बाद गदाधर ने उनका स्थान ले लिया. (तस्वीर: Wikimedia Commons)
    Religion, Spiritualism, Hindu Religion, Ramakrishna Paramhansa, Saint, Swami Vivekananda, Ramakrishna Paramahamsa, Dakshineshwar

    भाई के जाने के बाद रामकृष्ण (Ramakrishna Paramahamsa)का ध्यान में ज्यादा समय बीतने लगा. वे धीरे धीरे पूरी तरह से मां काली (Kali Devi) की भक्ति में रमने लगे. बताया जाता है कि दक्षिणेश्वर में (Dakshineshwar) उन्हें काली माता के दर्शन ब्रह्माण्ड की माता के रूप में हुए थे. खुद उन्होंने इसका वर्णन करते हुए बताया था, “घर द्वार मंदिर सब अदृश्य हो गया. जैसे कहीं कुछ भी नहीं था. मैने एक अनंत तीर विहीन आलोक का सागर देखा यह चेतना का सागर था. हर तरफ केवल उज्ज्वल लहरें ही दिखाई देती थी जो मेरी ओर आ रही थी. (तस्वीर: Wikimedia Commons)
    Religion, Spiritualism, Hindu Religion, Ramakrishna Paramhansa, Saint, Swami Vivekananda, Ramakrishna Paramahamsa, Dakshineshwar

    काली मां की भक्ति में डूबे रहने के कारण यह माना जाने लगा कि रामकृष्ण (Ramakrishna Paramahamsa)का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है. उनकी मान और बड़े भाई रामेश्वर ने उनका विवाह करवाने का फैसला किया. उन्हें लगता था कि विवाह (Marriage) के बाद उनका मानसिक संतुलन ठीक हो जाएगा. रोचक बात यह है कि खुद रामकृष्ण ने अपनी माता और भाई को बताया था कि उनके विवाह के कन्या उन्हें कहां मिलेगी. 23 साल की उम्र में उनका विवाह 5 साल की शारदामणि मुखोपाध्याय से हुआ जो 18 साल की होने के बाद रामकृष्ण के पास दक्षिणेश्वर में रहने लगी थीं और जीवनभर पतिव्रता रहकर एक आध्यात्मिक महिला बनी रहीं. (तस्वीर: belurmath website)
    Religion, Spiritualism, Hindu Religion, Ramakrishna Paramhansa, Saint, Swami Vivekananda, Ramakrishna Paramahamsa, Dakshineshwar

    विवाह के बाद भी रामकृष्ण (Ramakrishna Paramahamsa)का ध्यान और साधना का सिलसिला जारी रहा. भैरवी ब्राह्मणी ने दक्षिणेश्वर (Dakshineshwar) में आकर उन्हें तंत्र की शिक्षा दी औरतोतापुरी महाराज से उन्हें अद्वैत वेदांत की ज्ञान मिला. इसके बाद उन्होंने संन्यास लिया और उनका नया नाम श्रीरामकृष्ण परमहंस हुआ. ज्ञान और संन्यास के बाद उन्होंने इस्लाम और ईसाई धर्म की भी साधना की. (तस्वीर: Wikimedia Commons)
    Religion, Spiritualism, Hindu Religion, Ramakrishna Paramhansa, Saint, Swami Vivekananda, Ramakrishna Paramahamsa, Kali Devi, Human Service,

    रामकृष्ण परमहंस (Ramakrishna Paramahamsa)ने हमेशा इस बात की शिक्षा दी कि धर्म (Religion) एक दूसरे के विपरीत नहीं हैं, बल्कि एक ही लक्ष्य के अलग अलग मार्ग हैं. उन्होंने मानव सेवा (Human Service) को ईश्वर की सबसे बड़ी सेवा बताया. उनका विश्वास था कि हर पुरुष और स्त्री पवित्र है और उन्होंने कभी भी खुद को बड़ा, ईश्वर का अवतार यहां तक कि ज्ञानी संत तक नहीं बताया. वे एक समान्य व्यक्ति थे जो मां काली (Kali Devi) को सामान्य महिला की तरह देखते थे. उनका कहना था कि ईश्वर मोक्ष से नहीं बल्कि कार्य से प्राप्त किया जाना चाहिए. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    Tags: History, India, Ramakrishna Paramahamsa, Religion, Research, Spirituality

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें