जानें रमजान में भूखे रहने पर क्या होता है शरीर पर असर

रमनाज का पाक महीना एक महीना एक महीने का होता है. आमतौर पर इसमें कभी 29 तो कभी 30 दिन हुआ करते हैं.

News18Hindi
Updated: May 15, 2019, 2:59 PM IST
जानें रमजान में भूखे रहने पर क्या होता है शरीर पर असर
रोजा से मन की शुद्ध‌ि का सीधा संपर्क होता है
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Updated: May 15, 2019, 2:59 PM IST
इन दिनों रमजान चल रहे हैं. इस्लाम में इस महीने को आत्मशुद्ध‌ि का पाक महीना माना जाता है. इसमें उपवास रखकर खुद के मन और चित्त को शुद्ध करते हैं. लेकिन अगर रमजान महीने के धार्मिक मायनों इतर भी रोजे रखने से‌ जिस्म में माकूल फर्क पड़ता है. जब हम इसके वैज्ञानिक पहलुओं को देखते हैं तो भी इसके बेइंतहा फायदे नजर आते हैं. कई बड़े शोध संस्‍थानाओं और बड़े डॉक्टरों ने सालों से चली आ रही इस पंरपरा पर शोध के बाद कुछ खास बातों की ओर ध्यानाकर्षण किया है.

इस फर्क को दिनों के हिसाब से बांटकर जाना-समझा जा सकता है. आमतौर पर शोधों में इन्हें तीन से चार भागों में बांटा जाता है.



शुरुआत के दो से तीन दिन, डायबिटीज का खतरा होता है कम
रमजान में सबसे कठिन शुरुआती दो-तीन दिन होते हैं. ऐसा माना जाता है कि पहले ही दिन ब्लड शुगर लेवल तेजी से गिरता है. इसकी वजह शुरुआती सुस्ती आती है. लेकिन ठीक इसी समय हमारे शरीर के लीवर में जमा ग्लूकोज और मांसपेशियों से पूरे शरीर को ऊर्जा मिलने लगती है. लेकिन बाद में यहां से ग्‍लूकोज मिलना बंद हो जाता है. फिर अगला स्रोत वसा बनती है. शरीर में वसा कम होने से वजन घटता है और शरीर से कोलेस्ट्रोल की मात्रा घटती है. इससे सीधे तौर पर डायबिटीज का जोखिम कम होता है.



तीसरे-चौथे दिन से पहले सप्ताह तक, इम्यूनिटी हो जाती है मजबूत
सातवें दिन पहुंचते-पहुंचते उपवास रखने से खून में व्हाइट ब्लड सेल्स के साथ-साथ शरीर की इम्युनिटी भी बढ़ने लगती है. इससे पूरे शरीर में नई तरह की ऊर्जा का संचार शुरू हो जाता है. डॉक्टर्स के अनुसार इस काल में आंतों पर जमा वसा भी कमजोर पड़ती है. इससे वजन कम करने में काफी सहायता मिलती है.
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एक सप्ताह से एक पखवाड़े तक, पुरानी चोटें उभर सकती हैं
मैक्स हॉस्पिटल की डाइटिशन अंजू अग्रवाल बताती हैं कि आठ दिन के बाद उपवास रखने से शरीर के पुराने घाव उभरने लगते हैं. यह समयांतराल एक पखवाड़े तक पहूंचने तक और भी तेज हो सकता है. इसलिए दौर में लोगों को गरम पानी और नमक में हाथ-मुंह धोने और नमक के गरारे करते रहने को कहा जाता है. लेकिन इसी काल में लोग दिमागी तौर पर पहले से कहीं ज्यादा चुस्त महसूस करना शुरू करते हैं.



पहले पखवाड़े से एक माह तक, पूरी तरह पाचन और कोशिकाओं का बदलाव
पंद्रह दिन के बाद उपवास शुरू होते ही शरीर अपनी ही मरी कोशिकाओं को खाने लगता है. इस दौरान शरीर से स्वतः हटने वाली कमोबेश सारी अतिरिक्त चीजें हट चुकी होती हैं. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति कसरत करने की बांट जोह रहा हो तो संतुलित आहार के साथ इस वक्त में शुरू किया गया कसरत बहुत जल्दी नजीते देने लगता है. क्योंकि इस वक्त शरीर पूरी तरह से नये शेप में ठलने के लिए तैयार हो चुका होता है.



एक महीने के बाद है घातक, बिगड़ने लगता है आकार
एक महीने के बाद शरीर भूखा रहने का आदी हो चुका होता है. साथ ही वह शरीर में वसा व मांसपेशियों को इतना पहले ही गिरा चुका होता है कि आगे वह तब मौजूद मांसपेश‌ियों को कभी ना टूटने वाला शरीर का अंग बना देता है. ऐसे में शरीर के बेडौल होने के काफी आसार हो जाते है. इसलिए एक महीने से आगे शरीर को ढालने के लिए पुराने ढर्रे पर लौटने के बजाए एक बार डॉक्टरी सलाह रुख कर सकते हैं.

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