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प्रियंका गांधी बर्थडे : 16 साल की उम्र में पहला भाषण देने वाली '21वीं सदी की इंदिरा'

जानिए प्रियंका गांधी की तुलना इंदिरा के साथ कैसे और क्यों की जाती है.
जानिए प्रियंका गांधी की तुलना इंदिरा के साथ कैसे और क्यों की जाती है.

Happy Birthday Priyanka Gandhi : 12 जनवरी 1972 को जन्मीं प्रियंका गांधी को उनके भाषणों और बयानों के ज़रिये जानना चाहिए. दादी इंदिरा गांधी के साथ उनकी तुलना क्यों की जाती है और पिता राजीव गांधी का उन पर कितना असर रहा है, उनके शब्दों से ही सम​झना चाहिए...

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 12, 2021, 9:43 AM IST
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प्रियंका गांधी ने अपना पहला भाषण (First Speech) 16 साल की उम्र में दिया था, लेकिन चूंकि वो सक्रिय राजनीति से दूर ही रहीं, इसलिए उनके भाषण अगले कई सालों तक किसी को सुनाई ​नहीं दिए. यह भी एक फैक्ट है कि 16-17 साल की ही उम्र में इंदिरा गांधी राजनीति में आने के बारे में तय कर रही थीं. इंदिरा गांधी के साथ प्रियंका गांधी की तुलना (Priyanka Compared with Indira Gandhi) नई बात नहीं है. कभी उनके हेयर स्टाइल और लुक के चलते तो कभी कांग्रेस के अतीत (Congress History) और भविष्य के विश्लेषण के तौर पर दादी-पोती की तुलना की जाती रही है.

प्रियंका गांधी के जन्मदिन के मौके पर उनके कुछ यादगार भाषणों से गुज़रते हुए एक तो आपको खुद ब खुद पता चलेगा कि कैसे इंदिरा गांधी का प्रभाव प्रियंका पर झलकता है. दूसरे, इन भाषणों के ज़रिये आपको प्रियंका की यात्रा के बारे में भी पता चलेगा. और जो नहीं पता चलेगा, वो अनसुने और दिलचस्प फैक्ट्स भी आपको बताएंगे.

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'मैं राजनीति में नहीं आना चाहती'
साल 2009 में एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में प्रियंका ने साफ तौर पर कहा था कि उस समय वो राजनीति में नहीं आना चाहती थीं. 'मैं जिस तरह का जीवन जी रही हूं, उसमें खुश हूं. राजनीति के कुछ पहलू ऐसे हैं, जहां मैं खुद को फिट नहीं मानती... फिर भी मैं हमेशा कहती हूं कि किसी को भी ज़िंदगी में 'कभी नहीं' कभी नहीं कहना चाहिए.

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न्यूज़18 क्रिएटिव


इस बयान के कुछ ही साल बाद प्रियंका राजनीति में दिखी थीं और 2019 में उत्तर प्रदेश में बाकायदा कांग्रेस पार्टी की महासचिव के तौर पर उन्होंने कमान भी संभाली. यह तकरीबन वैसा ही था, जब जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद इंदिरा गांधी ने कांग्रेस और राजनीति में उभरने की कवायद की थी. हालांकि अभी प्रियंका के राजनीतिक उभार को लेकर स्थितियां स्पष्ट नहीं हैं, फिर भी उन पर दादी का प्रभाव तो स्पष्ट है ही.

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'भारत की इस बेटी पर सबसे ज़्यादा गर्व'
'21वीं सदी की इंदिरा' कही जाने वाली प्रियंका का स्टाइल ही नहीं, बल्कि लोगों के साथ घनिष्ठता बनाने का गुण भी जानकारों को इंदिरा गांधी की झलक देता रहा है. 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान अमेठी में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने अपनी दादी के बारे में खुलकर काफी बातें कही थीं. इसके लिए भी प्रियंका को काफी तारीफ मिली थी कि उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी अरुण नेहरू के खिलाफ कोई कड़वी बात नहीं कही थी.

यह इंदिरा जी की कर्मभूमि है. वो केवल मेरी दादी ही नहीं थीं बल्कि लाखों करोड़ों देशवासियों की मां भी थीं. वो उस परिवार का हिस्सा थीं, जिसने लोगों के लिए सेवा की और अपने देश से हमेशा प्यार किया.


दादी या पिता : किसका प्रभाव ज़्यादा?
दादी इंदिरा गांधी के साथ अक्सर होने वाली तुलना के बीच प्रियंका गांधी अपने पिता राजीव गांधी को लेकर भी कई बार पज़ेसिव दिखीं. अपनी दादी से प्रभावित होने की बात स्वीकार चुकीं प्रियंका ने न्यूज़18 को दिए एक इंटरव्यू में कहा था 'हालांकि लोग मेरी दादी जैसा मुझे समझते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि राहुल में इंदिरा गांधी जैसे गुण ज़्यादा हैं और मैं अपने पिता जैसी ज़्यादा हूं.'

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कांग्रेस के एक कार्यकर्ता ने प्रियंका के लिए बधाई का पोस्टर इस तरह छपवाया था.


यही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम चुनावों के दौरान जब प्रियंका गांधी के खिलाफ बयान दिए थे, तब भी प्रियंका ने अपने पिता पर गर्व जताते हुए मज़बूती के साथ कहा था 'मैं राजीव गांधी की बेटी हूं'. अपने पिता को कई बार देश के लिए शहीद बताने वाली प्रियंका ने अपने पिता की शान में गुस्ताखी बर्दाश्त न करते हुए कहा था:

अमेठी की मिट्टी पर उन्होंने मेरे शहीद पिता का अपमान किया है. अमेठी की जनता उन्हें इसके लिए कभी माफ नहीं करेगी. इस घटिया दर्जे की राजनीति के लिए अमेठी उन्हें जवाब देगी. हर बूथ से इस अपमान का जवाब दिया जाएगा.


प्रियंका बनाम मोदी की जंग रही चर्चित
पीएम मोदी के साथ चुनावी जंग में प्रियंका ने बड़ी भूमिका निभाई थी. मोदी के खिलाफ उनके कई बयान चर्चाओं में रहे थे. आरोप वाले बयानों से परहेज़ करते हुए कुछ चर्चित भाषणों के अंश यहां आपको बताते हैं, जो प्रियंका के तेवरों की गवाही देते रहे.

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‘56-इंच के सीने’ वाले मुद्दे पर प्रियंका ने जवाब देते हुए कहा था : यह भारत है. यहां देश को चलाने के लिए हमें ‘56-इंच के सीने’ की ज़रूरत नहीं है बल्कि इस देश के लिए एक नर्म दिल की ज़रूरत है.

‘यूपी के गोद लिये बेटे’ वाले मोदी के बयान पर प्रियंका ने इस तरह पलटवार किया था : उत्तर प्रदेश के पास अपने बेटे हैं, जो उसे सम्मान दिला सकते हैं. उप्र को किसी बेटे को गोद लेने की ज़रूरत नहीं है.

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इनके अलावा, प्रियंका का एक यादगार भाषण रायबरेली में 2012 के चुनावों के दौरान का भी रहा, जिसमें वोटरों से प्रियंका ने साफ तौर रप कहा था कि वो अपने विकास के लिए वोट करें, न कि किसी नेता के लिए. अपनी मां सोनिया के लिए चुनाव प्रचार करते हुए प्रियंका ने वोटरों को वोट की ताकत बताते हुए उत्तर प्रदेश में 'नकारात्मक राजनीति' को बदलने और 'विकास की राजनीति' को समर्थन देने की अपील की थी.

प्रियंका के बारे में क्या आपने ये भी सुना है?
हिंदू पद्धति से प्रियंका ने 18 फरवरी 1997 को दिल्ली बेस्ड बिज़नेसमैन रॉबर्ट वाड्रा के साथ शादी की थी. क्या आप ये जानते हैं कि वाड्रा से प्रियंका पहली बार 13 साल की उम्र में मिली थीं! और प्रियंका ने ही रॉबर्ट की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था.

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अपने पति रॉबर्ट वाड्रा और ​बच्चों मिराया व रेहान के साथ प्रियंका.


बेटी मिराया और बेटे रेहान की मां प्रियंका के पिता हिंदू थे और मां कैथोलिक हैं. इस बारे में दिलचस्प बात यह है कि प्रियंका खुद बौद्ध धर्म को फॉलो करती हैं. विपश्श्ना के साथ ही योग करने वाली प्रियंका ने बुद्ध धर्म के अध्ययन में एमए की डिग्री भी ली है. इससे पहले वो साइकोलॉजी में भी डिग्री ले चुकी थीं.

आखिर में यह भी जानिए कि पहले काफी गुस्सैल स्वभाव की प्रियंका के व्यवहार में सौम्यता का कारण उनका नियमित योग करना रहा है. यह भी एक फैक्ट है कि उनकी दादी इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 12 साल की प्रियंका को लंबे समय तक 24 घंटे सुरक्षा के घेरे में रखा जाता था, जिससे उनकी ज़िंदगी और मन काफी सिमट गया था और इसके असर से वो काफी समय तक जूझीं.
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