जानिए क्यों रात को सोने से पहले पढ़नी चाहिए किताबें

जानिए क्यों रात को सोने से पहले पढ़नी चाहिए किताबें
अशोक चक्रधर एक हास्य कवि हैं.

सोशल मीडिया और गैजेट्स से भरी हमारी जिंदगी में किताबें पढ़ने की आदत कम होती जा रही है. कई रिसर्च में ये बात सामने आई है कि रात को सोने से पहले पढ़ने से हमारी मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है और स्ट्रेस लेवल कम होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2020, 9:14 PM IST
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सोशल मीडिया (Social Media) के इस युग में तकरीबन सभी घरों के बुजुर्ग लोग बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान देने को जरूर कहते हैं. अक्सर ये भी हिदायत मिलती है कि सोने से पहले जरूर पढ़ना. ऐसी कई रिसर्च भी आई हैं कि सोशल मीडिया और गैजेट्स के लगातार इस्तेमाल से हमारी मेंटल हेल्थ पर असर पड़ता है. मेंटल हेल्थ अच्छी रखने के लिए कई तरह की सलाह डॉक्टरों द्वारा भी दी जाती हैं जैसे मेडिटेशन, अच्छी नींद और वर्कआउट. लेकिन इस महीने पब्लिकेशन हाउस पेंग्विन-रैंडम हाउस ने किताबें पढ़ने के जरिए मेंटल वेलनेस को लेकर एक शानदार प्रोग्राम चलाया है.

पेंग्विन रैंडम हाउस ने एक होमवेयर कंपनी के साथ मिलकर रीडटूस्लीप कैंपेन लॉन्च किया है. ये कैंपन कंपनी ने अमेरिका में स्लीप अवेयरनेस मंथ के सिलसिले में लॉन्च किया है. माना जाता है कि अगर सोने के पहले आप किताबें पढ़ते हैं तो आपको बेहतर नींद आती है. साथ ही यह ये आपके तनाव को भी दूर करता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर




अगर इस पहल का फायदा देखा जाए तो इससे सोशल मीडिया में डूबी हुई हमारी पीढ़ी किताबें पढ़ने की तरफ अपने कदम ज्यादा तेजी से बढ़ाएगी. वर्तमान समय में लोग मोबाइल स्क्रीन के अलावा रात को सोने के पहले टीवी देखते हैं. कई बार हमे टीवी देखते हुए समय का अंदाजा नहीं होता है और कब रात बीत जाती है ये पता भी नहीं चलता. ऐसी आदतें हमारी अनहेल्दी लाइफ स्टाइल को और ज्यादा बढ़ावा देती हैं.
साथ ही टीवी स्क्रीन से निकलने ब्लू लाइट हमारे ब्रेन को मेलाटोनिन प्रोड्यूस करने से रोकती है. हमारे ब्रेन का यही हारमोन नींद के लिए जिम्मेदार होता है. और जब ये हार्मोन कम बनता है तो सीधे तौर पर हमारी नींद प्रभावित होती है. दरअसल रात को सोने के पहले हमारी आंखें और दिमाग दिन के कम्प्यूटर वाले माहौल से आजादी चाहते हैं लेकिन हम ऐसा नहीं कर पाते.

न्यू यॉर्क पोस्ट में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक पेंग्विन रैंडम हाउस के सीनियर मार्केटिंग मैनेजर केल्सी मैनिंग का कहना है-किताबें पढ़ने का मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक प्रभाव बेहद गहरा होता है. और दुनिया के सबसे बड़े पब्लिशिंग हाउस होने के नाते हमने ये मैसेज फैलाने की सोची है. एक किताब न सिर्फ आपका ज्ञानवर्द्धन कर सकती है बल्कि अन्य कई तरीकों से फायदा पहुंचा सकती है.



क्या है स्लीप अवेयरनेस मंथ
अमेरिका में मार्च महीने को स्लीप अवेयरनेस मंथ घोषित किया गया है. अमेरिका के नेशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक देश भर में करीब 4 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें स्लीपिंग डिसऑर्डर है. स्लीपिंग डिसऑर्डर की समस्या अब तकरीबन हर देश में बढ़ रही है. जीवन में गैजेट्स के बढ़ते इस्तेमाल ने लोगों की नींद के खिलवाड़ करना शुरू कर दिया है.
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