क्या इस्लामिक देश तुर्की के खिलाफ खड़ा ग्रीस दूसरा इजरायल बन जाएगा?

इस वजह से ग्रीस को दूसरा इजरायल माना जा रहा है- सांकेतिक फोटो (Pxhere)
इस वजह से ग्रीस को दूसरा इजरायल माना जा रहा है- सांकेतिक फोटो (Pxhere)

बार-बार ये बात आ रही है कि तुर्की के खिलाफ खड़ा हो चुका देश ग्रीस दूसरा इजरायल बनने जा रहा (Greece turning into new Israel) है. ये देश दरअसल कट्टर इस्लामिक मुल्क बन रहे तुर्की के सामने खड़ा है, जिसमें यूरोपियन देश भी उसका साथ दे रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 11:09 AM IST
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तुर्की और ग्रीस के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव (tension between Turkey and Greece) अब खुलकर सामने आ गया है. इन दोनों के बीच लड़ाई समुद्री ताकत को लेकर है. असल में दोनों ही देश मेडिटेरेनियन सी (भूमध्य सागर) के बड़े हिस्से पर अपना-अपना दावा जता रहे हैं. इससे उन्हें खनिज और तेल का फायदा हो सकता है. अब इन दो देशों के बीच लड़ाई में यूरोपियन देश भी शामिल हो रहे हैं. देखने पर पता चलता है कि अधिकतर यूरोपियन देश ग्रीस के साथ हैं. इससे ग्रीस एक तरह से नए इजरायल की भूमिका में आ रहा है. जानिए, क्या है तुर्की और ग्रीस के बीच का गोलमाल.

ऊर्जा स्त्रोतों को लेकर लड़ाई
तुर्की और ग्रीस के बीच लड़ाई वैसे तो काफी पुरानी है लेकिन नया मामला ऊपर से देखने पर ऊर्जा स्त्रोतों की लड़ाई जैसा लगता है. समुद्र के भीतर बीते कुछ सालों में गैस रिसोर्सेज का पता लगा है. ये जिस भी देश के हिस्से जाएगा, वो आर्थिक तौर पर काफी ताकतवर बन जाएगा. यही देखते हुए समुद्री सीमा को लेकर इन दोनों देशों के बीच ठनी हुई है.

तेल के स्त्रोतों को लेकर ग्रीस और तुर्की में ठनी हुई है- सांकेतिक फोटो (Photo-CNBC)

इससे बढ़ी और लड़ाई


लड़ाई तब और बढ़ी, जब ग्रीस ने साल 2019 में लीबिया की सरकार के साथ एक समझौता किया. लीबिया चूंकि खुद आर्थिक तौर पर कमजोर और लगातार लड़ाइयों में उलझा रहा देश है इसलिए ग्रीस ने उसकी मदद की बात की. वो लीबिया के साथ मिलकर समुद्र में गैस खोजने का अभियान चला रहा है. इस बात पर तुर्की को गुस्सा आ गया क्योंकि लीबिया और ग्रीस मिलकर जहां गैस की खोज कर रहे हैं, उस समुद्री हिस्से पर तुर्की अपना दावा करता है.

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तुर्की ने उठाया ये कदम
भड़का हुआ तुर्की अपनी तरह से उन सारे समुद्री इलाकों में जा रहा है, जहां ग्रीस किसी भी देश के साथ मिलकर ऊर्जा स्त्रोतों की खोज में लगा है. तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन यूरोपियन देशों के खिलाफ काफी आक्रामक रवैया रखते हैं और जब-तब धमकियां देते रहते हैं. उनका सारा एजेंडा दुनिया में इस्लामिक मुल्कों की बढ़त है. इससे तुर्की के खिलाफ यूरोपियन देश भी लामबंद हो रहे हैं. फिलहाल चूंकि ग्रीस और तुर्की आमने-सामने की लड़ाई में आ रहे हैं इसलिए मजबूत यूरोपियन देश ग्रीस के साथ खड़े हो गए हैं. ये ठीक वैसा ही है, जैसे दुश्मन का दुश्मन दोस्त माना जाता है.

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ग्रीस ताकतवर हो रहा है
यहां तक कि उसकी तुलना इजरायल से हो रही है. बता दें कि अरब देशों के खिलाफ इजरायल को मजबूत बनाने में अमेरिका ने मदद की थी. भरपूर सैन्य और तकनीकी ताकत रखने वाला इजरायल अब भी अमेरिका का दोस्त बना हुआ है. इससे अमेरिका को काफी फायदा भी है. इसी तरह से अब यूरोपियन संघ ग्रीस को ट्रीट कर रहे हैं. वे उसे कूटनीतिक मोर्चे पर तो आश्वास्त कर ही रहे हैं, सैन्य सहायता भी दे रहे हैं.

तुर्की के विश्वविख्यात हागिया सोफिया म्यूजियम को मस्जिद में बदल दिया गया


फ्रांस बना नया अमेरीका
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में ग्रीस ने फ्रांस से 18 राफेल जेट की खरीदी की. साथ ही वो समुद्री ताकत बढ़ाने के लिए पनडुब्बियां भी ले रहा है. इसपर अलग-थलग पड़ा तुर्की आरोप लगा रहा है कि यूरोपियन देशों की शह ग्रीस को इजरायल बना देगी. ग्रीक मीडिया तक तुर्की के विशेषज्ञ अपनी बात पहुंचा रहे हैं. तुर्की के ये एक्सपर्ट मानते हैं कि ईयू का अनकंडिशनल सहयोग आज नहीं तो कल ग्रीस को खतरनाक बना देगा.

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लगभग सारे देश तुर्की के खिलाफ
खासकर सैन्य ताकत के मामले में यूरोप के सबसे मजबूत देशों में शुमार फ्रांस ग्रीस की खुलकर मदद कर रहा है. खबर के मुताबिक इस साल के आखिर तक वो ग्रीस को मिराज के साथ कई ताकतें देगा. यहां तक कि अमेरिका भी समुद्री बेस बनाने में तुर्की के खिलाफ ग्रीस की मदद कर रहा है. खुद ग्रीस के रक्षा मंत्री Nikos Panagiotopoulos ने इसकी पुष्टि की है. कुल मिलाकर ये साफ है कि अमेरिका से लेकर लगभग सारे बड़े पश्चिमी देश तुर्की के खिलाफ अप्रत्यक्ष जंग में ग्रीस का साथ दे रहे हैं और उसे हर मोर्चे पर मजबूत बना रहे हैं. यही वजह है कि तुर्की एक्सपर्ट बार-बार ग्रीस की तुलना इजरायल से करने लगे हैं.

एर्दोआन को कट्टर मुस्लिम विचारधारा का माना जाता है जो यहूदियों या दूसरे धर्म के लोगों को हीन भाव से देखते हैं


तुर्की नेता एर्दोआन भी एक वजह
तुर्की के खिलाफ लामबंदी की एक वजह खुद तुर्की के वर्तमान राष्ट्रपति एर्दोआन हैं. दरअसल एर्दोआन को कट्टर मुस्लिम विचारधारा का माना जाता है जो यहूदियों या दूसरे धर्म के लोगों को हीन भाव से देखते हैं. हाल ही में उन्होंने तुर्की के विश्वविख्यात हागिया सोफिया म्यूजियम को मस्जिद में बदल दिया. इसपर लगभग सभी पश्चिमी देशों ने नाराजगी जताई थी क्योंकि मूल तौर पर ये इमारत एक चर्च थी.

कथित तौर पर आतंक को दे रहे बढ़ावा
माना जाता है कि इस्लामिक देश की छवि तैयार करके खुद को पूरी दुनिया के मुसलमानों का नेता बनाने पर तुले एर्दोआन की ओर से पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों को मदद भी मिल रही है. हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में इस बारे में बताया गया है कि कैसे कश्मीर और यहां तक कि केरल में भी तुर्की की मदद से पाकिस्तान भारतीय मुसलमानों को कट्टर बनाने पर तुला हुआ है. इसी रवैये के चलते एर्दोआन की ग्लोबल मीडिया में आलोचना भी होने लगी है.
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