जानिए लद्दाख में ऐसा क्या है, जो चीन हर हाल में उसे हथियाना चाहता है

यहां यूरेनियम, ग्रेनाइट और सोने का भंडार है, जो चीन हथियाना चाहता है (news18)

यहां यूरेनियम, ग्रेनाइट और सोने का भंडार है, जो चीन हथियाना चाहता है (news18)

लद्दाख (Ladakh) पर चीन (China) की नजर यूं ही नहीं है, इसके पीछे बड़ी वजह है. दरअसल वहां यूरेनियम और सोने का भंडार (uranium and gold reserves) है, जो चीन हथियाना चाहता है.

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भारत (India) और चीन (China) के बीच लद्दाख में नियंत्रण रेखा पर तनाव (India China Border Dispute) लगातार गहरा रहा है. यहां पिछले दो हफ्तों में बड़ी संख्या में चीन की ओर से अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती (more army troops in Ladakh) देखने को मिली. इसके साथ ही देश ने भी अपने सैनिक तैनात कर दिए. इधर चीन बंकर बनाने जैसी तैयारियों में जुटा हुआ है. जानिए, आखिर, क्या वजह है जो लद्दाख के लिए चीन कोरोना संकट (coronaviurs crisis) के दौर में भी इतना उतावला लग रहा है.

पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) झील और गलवान घाटी (Galwan Valley) वे जगहें हैं, जो साल 1962 से ही भारत-चीन के बीच तनाव की वजह रहे हैं. चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) इस जगह को कब्जाना चाहती है और लगातार इसकी कोशिश भी कर रही है. हालांकि इस वक्त, जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है, ऐसे में भी चीन का लद्दाख के कुछ हिस्सों पर दावा करना अजीब लगता है. लेकिन चीन के इस उतावलेपन के पीछे है इस क्षेत्र की पहाड़ियां और उनमें मिलने वाली बेशकीमती धातुओं का भंडार. गोगरा पोस्ट के बाजू में ही वो पहाड़ है, जिसे गोल्डन माउंटेन कहते हैं. भूविदों का मानना है कि इस इलाके में सोने की अपार संपदा है. इस सोने को हथियाना चीन को आर्थिक मजबूती देगा. यही वजह है कि चीनी सैनिक लगातार आक्रामक होते रहते हैं. वैसे इलाके में चीन की सक्रियता के कारण भारत सरकार भी यहां पर सोने की खदानों पर खास सर्वे नहीं कर सकी है.

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पैंगोंग त्सो झील और गलवान घाटी वे जगहें हैं, जो साल 1962 से ही भारत-चीन के बीच तनाव की वजह रहे हैं

सोने के अलावा एक उससे भी कीमती चीज यहां पर है- यूरेनियम. यहां कई इलाकों में बेहतरीन क्वालिटी के यूरेनियम का भंडार मिला है, जिससे परमाणु बिजली और परमाणु हथियार भी बनाए जा सकते हैं. साल 2007 में जर्मनी की एक लैब ने लद्दाख के पहाड़ों का सैंपल टेस्ट किया. इसमें पाया गया कि पहाड़ी मिट्टी में ही 5.36 प्रतिशत यूरेनियम है. ये पूरे देश के किसी भी यूरेनियम भंडार से ज्यादा है. बता दें कि अपने यहां छत्तीसगढ़, आंध्रपप्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में यूरेनियम वाली पहाड़ियां मिलती रही हैं. ये स्टडी पब्लिक होने के बाद से ही चीन ने लद्दाख पर और भी ज्यादा आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया.

वैसे भूगर्भ वैज्ञानिकों का मानना है कि लद्दाख में यूरेनियम का ये भंडार देश के दूसरे हिस्सों के मुकाबले काफी नया है. ये लगभग 25 से लेकर 100 अरब साल पुराना होगा. वहीं देश के दूसरे राज्यों में मिले यूरेनियम भंडार कई हजार अरब साल पुराने माने जाते हैं.

चीन के पास 260 न्यूक्लियर बम हैं और इन्हीं की संख्या वो कम से कम 1000 करना चाहता है (Photo-pixabay)


अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के कारण चीन खुद को और भी ज्यादा परमाणु शक्ति संपन्न करने की सोच रहा है. हाल ही में चीन के रक्षा विशेषज्ञों ने सुझाया कि उन्हें देश की परमाणु शक्ति को 1000 गुना ज्यादा करने की जरूरत है ताकि अमेरिका की आक्रामकता से सुरक्षित रह सकें. फिलहाल खुफिया एजेंसियों का कहना है कि चीन के पास 260 न्यूक्लियर बम हैं और इन्हीं की संख्या वो कम से कम 1000 करना चाहता है. अब परमाणु हथियार बनाने के लिए चीन को हर हाल में यूरेनियम की जरूरत पड़ेगी. खासकर इतनी बड़ी मात्रा में हथियार तैयार करने के लिए उसके अपने देश का भंडार काफी नहीं होगा. यही वजह है कि चीन लगातार लद्दाख की सीमा पर सख्त हो रहा है.

वैसे इससे पहले चीन अरुणाचल प्रदेश में ऊपरी सुबनसिरी जिले से केवल 15 किलोमीटर की दूरी पर खुदाई कर चुका है. इस दौरान उसे काफी सारा सोना और चांदी मिला, जिसकी लागत लगभग 60 खरब डॉलर बताई जा रही है. और खुदाई के लिए चीन के काफी सारी तैयारियां कीं. पूरे इलाके में सड़कों और हवाई अड्डों का एक नेटवर्क भी बनाया गया, जहां हजारों की संख्या चीन के मजदूर, इंजीनियर और भूगर्भ विशेषज्ञ काम में लगे हुए हैं.

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