क्यों है जापानियों में सफाई के प्रति गहरा जज्बा जो दुनिया के लिए है मिसाल

क्यों है जापानियों में सफाई के प्रति गहरा जज्बा जो दुनिया के लिए है मिसाल
साफ सफाई जापान के लोगों की संस्कृति का खास हिस्सा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जापान (Japan) के लोगों में सफाई (Cleanliess) के प्रति एक बेहतरीन जज्बा (Attitude) है जो यहां की रोजमर्रा की जिंदगी के हर पहलू में दिखाई देता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 23, 2020, 11:06 AM IST
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जापान (Japan) के लोग दुनिया के लोगों से बहुत अलग हैं. उनका काम और वक्त की पाबंदी के लिए जुनून पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है. जापान की एक और खास बात है और वह है यहां के लोगों का सफाई (Cleanliness) के लिए जुनून (Passion). यही जुनून ही वो वजह है कि टोक्यो जैसे दुनिया के बड़े और व्यस्ततम शहर भी साफ सफाई के मामले में अव्वल हैं.

हर जगह बेहतरीन सफाई का नजरिया
चाहे ट्रेनों और प्लेटफॉर्म की सफाई हो या फिर सार्वजनिक शौचालय, टोक्यो जापान के लोगों की सफाई के प्रति दीवानगी की प्रखर बानगी है. जापानियों का सफाई के प्रति इस खास नजरिये के पीछे देश का शिंतो व्यवस्था में विश्वास है. इसमें पारम्परिक शुद्धिकरण पर जोर दिया जाता है.

बचपन से ही सफाई के संस्कार
यहां के सफाई के प्रति आदर का जापान के सामाजिक मूल्यों से गहरा नाता है जो यहां के लोगों में बचपन से ही संस्कार के तौर पर पनपते हैं. यहां बच्चों को स्कूल जाने से पहले ही साफ सफाई के बारे में बताया जाता है और उन्हें स्कूल में जब अविभावक बच्चों को लेने जाते हैं तो उन्हें एक साफसुथरा बच्चों की उपयोग की हुई नैपी का बैग दिया जाता है जिसे वे अपने घर जाकर अपने ही कचरे की डब्बे में डालें.



स्कूल में ही बच्चों को सफाई की जिम्मेदारी
इसी तरह से जापान के प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को पहले ही दिन से साफ सफाई सिखाई जाती है. इसीलिए अविभावकों को खेल की किट, कॉपी किताबों और अन्य सामानों के साथ बहुत से सफाई करने वाले कपड़े भी खरीदने पड़ते हैं. बच्चे यहां पहले ही दिन से अपने क्लासरूम और लंच के बाद भी अपनी डेस्क को साफ करते हैं.

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यहां की गलियों में भी साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाता है. (Photo-pixabay)


जीवन के हर हिस्से में सफाई
साफ सफाई पर यह ध्यान यहां के रोजमर्रा की जिंदगी के हर पहलू में नजर आता है. यह केवल खुद के प्रति आग्रह के तौर पर ही नहीं बल्कि समाज के दूसरे लोगों के प्रति सम्मान के तौर पर भी देखा जाता है. यहां की गलियां कचरे से मुक्त रहती हैं और इससे भी खास बात यह है कि यहां बहुत काम सार्वजनिक कचरे के डिब्बे हैं क्योंकि लोग अपने साथ अपना कचरा भी खुद ही घर ले जाते हैं.

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दुनिया के लिए मिसाल
जापान में हुए विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट में जापान की कोलंबिया पर जीत के बाद फैन्स ने जीत के जश्न के दौरान एक ब्रेक लिया और मैदान की सफाई कर एक मिसाल पेश की थी. इतना ही नहीं कोरोना के फैलने से काफी पहले से यहां की ट्रेनों में यह नजारा देखने को मिल जाता है कि कुछ लोग यात्रा के दौरान सफेद सर्जिकल फेसमास्क पहले दिखते हैं. ये अपने बचाव के लिए नहीं बल्कि दूसरों तक खुद से कीटाणु न पहुंचें, इसके लिए मास्क पहनते हैं.

सैलानी बढ़ाते हैं जापानियों की चिंता
इतना ही नहीं पिछले साल जब जापान में सैलानियों की संख्या में बहुत ज्यादा इजाफा हुआ तो वहां लोगों ने सफाई से संबंधित मुद्दों पर चिंता जताई थी. यहां की मीडिया में इस बात पर चर्चा भी हुई थी कि कैसे यहां सैलानियों को इस तरह से सफाई का ध्यान रखने को कहा जाए कि उन्हें बुरा न लगे. यहां सार्वजनिक स्थानों पर खाना एक सामाजिक तौर पर निषेध है. इस बात को यहां के लोग बहुत बुरा मानते हैं.

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यहां लोग सार्वजनिक स्थानों पर नहीं खाते हैं. चलते हुए खाना तो यहां बहुत बुरा माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


सैलानियों का भी रहता है ख्याल
ऐसा नहीं है कि जापानियों को केवल अपने देश की सफाई का ख्याल रहता है. सैलानियों के बढ़ने से यहां लोग इस बात से भी चिंतित रहते हैं कि कहीं राह चलते खाने के सामान की वजह से खुद को किसी परेशानी में डाल दें, जैसे खाने में लगी सींक से नुकसान पहुंचना, या कुछ और. इसी वजह से वहां जगह-जगह अलग-अलग भाषाओं में ये चेतावनियां भी लिखी मिलती हैं कि चलते-चलते कुछ न खाएं.

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जापान में साफ-सफाई का जो ध्यान रखा जाता है वह उनके एक शब्द किरेई (kirei) में झलकता है जिसका मतलब सफा और खूबसूरत दोनों होता है. इसलिए जापान जाएं तो इस बात का ध्यान रखें कि कहीं आपकी साफ सफाई के प्रति जरा सी चूक जापानियों को दुखी न कर दे.
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