Explained: किस घटना ने पड़ोसी देश म्यांमार में तख्तापलट कर दिया?

म्यांमार का नियंत्रण अगले एक साल के लिए सेना के हाथ में रहेगा

म्यांमार (Myanmar) में नव-निर्वाचित आंग सान सू ची (Aung San Suu Kyi) की सरकार के सभी बड़े नेताओं को हिरासत में लेते हुए सेना ने सत्ता संभाल ली. साथ ही सेना प्रमुख ने अगले सालभर के लिए देश में इमरजेंसी लगा दी है.

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    लगभग सारे ही देशों में फिलहाल किसी न किसी वजह से प्रदर्शन चल रहे हैं, लेकिन म्यांमार की घटना इन सबपर भारी है. वहां सोमवार को सेना ने देश की सबसे बड़ी नेता आंग सान सू ची को हिरासत में ले लिया. इसके तुरंत बाद टेलीविजन पर एलान किया गया कि म्यांमार का नियंत्रण अगले एक साल के लिए सेना के हाथ में रहेगा.

    क्या हाल हैं म्यांमार में
    म्यांमार में आपातकाल के बाद देशभर में सड़कों पर सैनिक नजर आ रहे हैं. ये घटनाक्रम हैरान करने वाला है. आंग सान सू ची के नेतृत्व में देश चीन की गिरफ्त से मजबूती से लड़ता दिख रहा था, तो आखिर क्या वजह है तो यहां रातोंरात तख्तापलट हो गया?

    चुनाव में धांधली का आरोप
    इसकी शुरुआत हुई साल 2020 के नवंबर में हुए उस चुनाव से, जिसमें आंग सान सू ची की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) ने भारी बहुमत से जीत हासिल की. इसके पीछे आंग सान सू ची की लोकप्रियता को कारण बताया गया. हालांकि सेना को शक था कि चुनाव में भारी गड़बड़ी हुई है और इसी वजह से उनकी पार्टी जीती.

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    आंग सान सू ची की सरकार हिरासत में है (Photo- news18 English via Reuters)


    धोखधड़ी का आरोप लगाते हुए सेना ने यूनाइटेड इलेक्शन्स कमीशन (UEC) से मांग की वो या फिर सरकार या उसके नुमाइंदे यानी चुने हुए नेता साबित करें कि चुनाव में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई और सबकुछ पारदर्शिता से हुआ है. सेना की इस मांग को पूरा करने से इनकार करते हुए नई चुनी व्यवस्था ने अपना काम शुरू कर दिया.



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    इसके बाद 1 फरवरी को म्यांमार की सेना ने नव-निर्वाचित संसद की बैठक रोकते हुए नेताओं को गिरफ्तार कर लिया. बता दें कि साल 2011 से पहले इस देश में सेना का ही कब्जा था, यानी लोकतांत्रिक की बजाए सैन्य सरकार थी. अब तख्तापलट के बाद सरकार सेना प्रमुख मिन आंग लाइंग के हाथ में आ गई है.

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    म्यांमार की खबरों को रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट The Irrawaddy ने इस बारे में विस्तार से बताया है. इंडियन एक्सप्रेस में इस बारे में खबर आई है. इसमें स्थानीय वेबसाइट के हवाले से बताया गया कि सेना प्रमुख ने लोगों से संविधान और नियमों का पालन करने को कहा.

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    म्यांमार में आपातकाल के बाद देशभर में सड़कों पर सैनिक नजर आ रहे हैं- सांकेतिक फोटो


    यहां ये जानने की बात है कि म्यांमार में संविधान भी सेना का ही बनाया हुआ है. साल 2008 में सेना ने संविधान ड्राफ्ट कर कई बदलाव किए. तब आंग सान सू ची की पार्टी ने जो लगातार लोकतांत्रिक शासन की बात करती रही थी, उन्होंने संविधान के हवाले से हुए साल 2010 के चुनावों का बहिष्कार कर दिया था.

    दरअसल संविधान में लोकतंत्र की कम और सेना के अधिकार सुरक्षित रखने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा था. इसे मिलिट्री लोकतंत्र तक कहा गया. इसके मुताबिक सेना ने पार्लियामेंट के दोनों ही सदनों में अपने लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने की बात की थी. इस तरह से सेना ने पक्का कर लिया था कि भले ही देश में लोकतंत्र आ जाए लेकिन वो कहने भर का लोकतंत्र हो. सभी बातों और कानूनों के लिए सेना से इजाजत जरूरी हो.

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    सेना ने देश के ज्यादातर हिस्सों में इंटरनेट और फोन सर्विस तक बंद करवा दी है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    आंग सान सू ची ने इसका भारी विरोध किया और बात अमेरिका से लेकर यूरोपियन यूनियन तक चली गई. दबाव बढ़ने लगा और धीरे-धीरे ही सहीं, सेना ने इस नेता को चुनाव का रास्ता दिया. नवंबर 2020 में आंग सान सू ची की पार्टी भारी मतों से अंतर से जीती. उनका मुकाबला सेना की नकली पार्टी से था. अब इसी बात पर भड़की सेना ने नेता और उनकी पार्टी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया.

    चूंकि आंग सान सू ची देश में काफी लोकप्रिय नेता हैं, इसलिए उनकी गिरफ्तारी के तुरंत बाद सेना ने देश के ज्यादातर हिस्सों में इंटरनेट और फोन सर्विस तक बंद करवा दी है. सेना को डर है कि ऐसा न करने पर विद्रोह भड़क सकता है. म्यांमार बैंकिंग एसोशिएसन के अनुसार बैंकों ने भी अस्थायी समय के लिए सभी सर्विसेज बंद कर दी हैं. ऐसे में आने वाले समय में किसी प्रदर्शन या मुश्किल से भी इनकार नहीं किया जा सकता.

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