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यूरोप के इस खूबसूरत मुल्क में बढ़ी 'डेथ विश', 10 हजार लोगों ने की मौत की मांग

News18Hindi
Updated: February 2, 2020, 11:10 AM IST
यूरोप के इस खूबसूरत मुल्क में बढ़ी 'डेथ विश', 10 हजार लोगों ने की मौत की मांग
एकाएक मौत मांगने वालों को देखते हुए सरकार ने एक कमीशन बनाई है (प्रतीकात्मक फोटो)

क्या वजह है कि नीदरलैंड (the Netherlands) जैसे बेहद समृद्ध देश में लोगों के भीतर मरने की इच्छा (suicidal tendency) बढ़ती जा रही है?

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  • Last Updated: February 2, 2020, 11:10 AM IST
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अक्सर सिस्टम से तंग आए लोग इच्छा मृत्यु (Euthanasia) की मांग करते सनाई पड़ते हैं. इनकी संख्या इक्का-दुक्का ही होती है, लेकिन हाल ही में नीदरलैंड (the Netherlands) में एक चौंकाने वाले मामले में 10 हजार से भी ज्यादा लोगों ने सरकार से इच्छा मृत्यु की मांग की. संसद (Parliament) में इस मांग के बारे में बताते हुए देश की स्वास्थ्य मंत्री (health minister) और क्रिश्चियन डेमोक्रेट MP Hugo de Jonge ने कहा कि ये लोग 55 पार हैं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं. इच्छा मृत्यु मांगने के पीछे एक बड़ी वजह अकेलापन भी है.

मरने की गुहार लगाने वाले इन लोगों की संख्या असल में 10,156 हजार है. इतनी बड़ी संख्या में एकाएक मौत मांगने वालों को देखते हुए इसपर सरकार ने एक कमीशन बनाई, जिसका नाम था Wijngaarden commission. इसमें पाया गया कि मरने की इच्छा रखने वालों की ये विश काफी गंभीर है और वे हर हाल में ये करना चाहते हैं.

मरने की गुहार लगाने वाले इन लोगों की संख्या असल में 10,156 हजार है (प्रतीकात्मक फोटो)


संसद में ये मुद्दा उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि डेथ विश एक सामाजिक मुद्दा है और सबको मिलकर उन लोगों को दोबारा जिंदगी में लौटाने की कोशिश करनी चाहिए. वहीं विपक्ष की एक नेता Pia Dijkstra ने कहा कि वे 75 साल की उम्र पार कर चुके ऐसे लोगों के लिए यूथेनेशिया यानी इच्छा मृत्यु को कानून बनाने पर संसद में एक विधेयक पेश करेंगी ताकि ऐसे लोगों को एक आसान और गरिमामयी मौत मिल सके.

वैसे नीदरलैंड वो पहला देश है, जहां इच्छा मृत्यु पर साल 2001 में प्रतिबंधित किया गया था. इसकी वजह भी यही थी कि यहां पर लगातार ऐसे लोग बढ़ रहे थे, जो किसी वजह से इच्छा मृत्यु की मांग कर रहे थे. उसी साल एक डच डॉक्टर को ट्रायल पर डाला गया क्योंकि उसने सीवियर डिमेंशिया से जूझ रही एक ऐसी औरत को स्लीपिंग पिल्स दे दी थीं, जो शायद मौत के बारे में पक्की नहीं थी. माना गया कि ठीक मानसिक हालात में वो मरने की नहीं सोचती, ऐसे में डॉक्टर का उसे नींद की दवाएं देना उसे जबर्दस्ती मारने जैसा था.

यूथेनेशिया के लिए अर्जी देने वाले की उम्र 16 साल या इससे ज्यादा होनी चाहिए. (प्रतीकात्मक फोटो)


नीदरलैंड में यूथेनेशिया के लिए अर्जी देने वाले की उम्र 16 साल या इससे ज्यादा होनी चाहिए. ये साबित होना चाहिए कि शख्स ने सोच-समझकर मारे जाने की मांग की है. वो किसी ऐसी बीमारी या तकलीफ का शिकार होना चाहिए, जिसका कोई इलाज न हो और जो सहा न जा सके.बता दें कि संयुक्त राष्ट्र की विश्व खुशहाली रिपोर्ट (World Happiness Report) में नीदरलैंड पांचवे स्थान पर रहा. ये संयुक्त राष्ट्र की सातवीं सालाना रिपोर्ट है जो लगभग 155 देशों को कई पैमानों के आधार पर रैंक करती है, जैसे उस देश के नागरिक खुद को कितना खुश महसूस करते हैं या फिर उनमें डिप्रेशन जैसी नकारात्मक भावनाओं की दर कितनी है. रिपोर्ट में पांचवे नंबर पर होने के बावजूद देश की एक खास उम्र की आबादी का इतने डिप्रेशन में होना चौंकाता है.

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First published: February 2, 2020, 11:10 AM IST
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