क्यों देश के नए संसद भवन का आकार तिकोना रहने वाला है?

देश के नए संसद भवन की शुरुआती तस्वीर सामने आई है (Photo-news18 English)

देश के नए संसद भवन की शुरुआती तस्वीर सामने आई है (Photo-news18 English)

नए संसद भवन को त्रिभुजाकार शैली (new parliament building in triangle pattern) में बनाया जाएगा. इस आकार का वैदिक संस्कृति और तंत्रशास्त्र से भी गहरा नाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 7, 2020, 7:23 AM IST
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देश के नए संसद भवन की शुरुआती तस्वीर सामने आई है. इस नई इमारत की शैली त्रिभुजाकार होगी. टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के तहत बनने वाले इस संसद भवन का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने जा रहे हैं. इसी बीच इमारत के त्रिभुजाकार होने के पीछे बताया जा रहा है कि ये वास्तु के हिसाब से तय किया गया है. त्रिभुज का हमारी संस्कृति में खासा महत्व है.

त्रिभुज का जिक्र हमारी वैदिक संस्कृति में भी मिलता है, जिसे त्रिकोण कहा जाता है. ध्यान के दौरान इस आकार से मस्तिष्क को स्थिर होने में मदद मिलती है. कई तरह के तांत्रिक अनुष्ठानों के दौरान तिकोनी आकृति का काफी महत्व है और मान्यता है कि इस आकृति से ही अनुष्ठान पूरा हो पाता है. इसकी जगह गोल घेरा बनाना या कोई दूसरी आकृति का इस्तेमाल काम नहीं बनाता है.

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तीन दिशाओं की ओर तीन छोर वाला त्रिभुज अलग-अलग तरीके से अलग असर दिखाता है. अगर त्रिकोण ऊपर की ओर हो तो इसका मतलब उसमें अग्नि, लिंग और पुरुष तत्वों की भरमार है और उसी से जुड़े अनुष्ठान किए जा सकते हैं.

त्रिकोण नीचे की ओर दिखाए तो ये पानी, योनि और प्रकृति की ओर इशारा करता है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

इसी तरह से अगर त्रिकोण नीचे की ओर दिखाए तो ये पानी, योनि और प्रकृति की ओर इशारा करता है. ऐसे त्रिकोण से ग्रहों की इनसे जुड़ी स्थितियां सुधारी जा सकती हैं.

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कई बार एक साथ दो त्रिकोण भी बनाए जाते हैं. ये आकृतियां एक-दूसरे को भेदती हुई या ओवरलैप करती हुई होती हैं. इसमें त्रिकोण का एक सिरा ऊपर, जबकि दूसरा सिर नीचे की ओर होता है. ये आकृति एक ही साथ पुरुष और प्रकृति को दिखाती है, ऊपर वाला सिर पुरुष का होता है, जबकि नीचे का कोण प्रकृति का संकेत माना जाता है.

जब दो त्रिकोण इस तरह से मिलें कि दोनों मिलकर एक तारे की आकृति बनाएं, यानी छह कोण दिखें तो ये रचनात्मक बढ़ाने वाली आकृति बन जाती है. इस तरह के कोण से अनुष्ठान किसी रचनात्मक कार्य में सफलता देने वाला माना जाता है.

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तिकोनी आकृतियां जब एक-दूसरे से अलग-अलग छिटकी हुई दिखें यानी असंबद्ध हों तो ये कुछ और ही इशारा करता है. ये बताता है कि समय खत्म हो रहा है और अब सावधान होने की जरूरत है. वैदिक ज्योतिष, जिसकी काफी मान्यता है, उसमें भी त्रिकोण का काफी महत्व है. पहले, पांचवें और नवें घर त्रिकोणीय तरीके से संबद्ध होते हैं और सब अलग-अलग परिमाण देते हैं.

पुराने परिसर पर नए संसद भवन का निर्माण वैदिक तरीके से होगा

यानी कुल मिलाकर पुराने परिसर पर नए संसद भवन का निर्माण वैदिक तरीके से होगा ताकि देश की उन्नति में इमारत भी सहायक हो. लगभग 861.90 करोड़ रुपए की लागत में संसद की नई इमारत सालभर में पूरी हो जाएगी, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है. इसके निर्माण में 2000 लोग सीधे तौर पर शामिल होंगे तथा 9000 लोगों की परोक्ष भागीदारी होगी.

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नई बिल्डिंग में संयुक्त सेशन चलने पर भी 1,350 सांसदों के बैठने के लिए अच्छी-खासी जगह होगी. सांसदों के बैठने की व्यवस्था ज्यादा आरामदेह बनाई जा रही है. इसके तहत टू-सीटर बेंचें होंगी, ताकि किसी भी सांसद को आराम से बैठने की पूरी गुंजाइश हो. फिलहाल कई बार सीटें फुल होने पर सांसदों को सिकुड़कर भी बैठना पड़ जाता है. नई इमारत ये दिक्कत दूर कर देगी.

केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के मुताबिक इमारत करीब 65 हजार वर्ग मीटर में फैली होगी, जिसमें 16921 वर्ग मीटर का इलाका अंडरग्राउंड भी होगा. इस तरह से बिल्डिंग में भूमिगत को मिलाकर ग्राउंड फ्लोर और दो और मंजिलें भी होंगी.

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फिलहाल प्रस्तावित योजना में कई फेरबदल हो सकते हैं. इसमें साउथ ब्लॉक और नॉर्थ में भी बदलाव शामिल हैं. जैसे प्रधानमंत्री का आवास और कार्यालय साउथ ब्लॉक के पास स्थानांतरित हो सकता है, वहीं उप-राष्ट्रपति का नया घर नॉर्थ ब्लॉक के पास चला जाएगा. इन ब्लॉक्स में बदलाव से पूरे राजपथ का नक्शा बदल सकता है.

ब्लॉक्स में बदलाव से पूरे राजपथ का नक्शा बदल सकता है

लोकसभा, राज्यसभा और एक खुला-आंगन-सा होगा, जिसके चारों ओर एक लाउंज होगा. नए भवन में कई दिलचस्प प्रयोग दिख सकते हैं. जैसे यहां सेंट्रल हॉल में अलग-अलग आकार और तरीके की खिड़कियां होंगी. ये खिड़कियां असल में देश की विविधता को दिखाएंगी.

वैसे ये जानना जरूरी है कि आखिर क्यों इतने बड़े स्तर पर निर्माण की जरूरत पड़ रही है. दरअसल साल 2026 में देश लोकसभा के आकार पर कोई फैसला ले सकता है. बता दें कि आबादी का पूरा प्रतिनिधित्व करने के लिए सांसदों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है. इस बारे में राजनीतिक विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि साल 2026 में देश की जितनी आबादी होगी, उसे रिप्रेजेंट करने के लिए 848 सदस्यों की जरूरत हो सकती है. साल 2019 में ही भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इनकी मौजूदा संख्या को 545 से बढ़ाकर लगभग दोगुना करने की बात की थी. इसपर अगले पांच सालों बाद कोई बात होगी. हालांकि इस संभावना को ध्यान में रखते हुए ही नई संसद इमारत का फैसला लिया गया.

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