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नाथूराम गोडसे ने गांधीजी के बेटे देवदास को बताया था उनकी हत्या का सच

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Updated: January 30, 2020, 12:54 PM IST
नाथूराम गोडसे ने गांधीजी के बेटे देवदास को बताया था उनकी हत्या का सच
नाथूराम गोड्से ने जेल में गांधीजी के बेटे देवदास से बात करने के लिए 45 मिनट मांगे थे, जिसकी अनुमति उसे नहीं मिली

गांधीजी के छोटे बेटे और हिंदुस्तान टाइम्स के तत्कालीन संपादक देवदास गांधी जब जेल में नाथूराम गोडसे से मिलने पहुंचे तो तुरंत उनको पहचान गया. तब उसने कहा, मेरी गांधीजी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी लेकिन मैने इस वजह से उनकी हत्या कर दी

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  • Last Updated: January 30, 2020, 12:54 PM IST
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30 जनवरी 1948 यही वह तारीख है जब नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. गोडसे ने जिस वक्त गांधीजी पर गोली चलाई वह दिल्ली के बिड़ला भवन में शाम की प्रार्थना सभा से उठ रहे थे. अपनी सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल से गोडसे ने गांधीजी पर तीन गोलियां चलाई थी. नाथूराम गोडसे को हत्या के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया गया था. हत्या की पहली रात गोडसे को तुगलक रोड पुलिस स्टेशन के हवालात में रखा गया था.

गांधीजी की हत्या के बाद उनके बेटे देवदास गांधी गोडसे से मिलने जेल में पहुंचे. देवदास को लगा था कि किसी सिरफिरे व्यक्ति ने उनके पिता की हत्या की है, लेकिन जैसे ही वह हवालात के बाहर पहुंचे गोडसे ने ही उऩ्हें पहचान लिया और कहा, “मैं समझता हूं आप श्रीयुत देवदास गांधी हैं.“ इस पर देवदास खासे हैरान हुए उन्होंने कहा, “आप मुझे कैसे जानते हैं?" नाथूराम ने कहा, “हम लोग एक संपादक सम्मेलन में मिल चुके हैं. वहां आप ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के संपादक के नाते और मैं ‘हिंदू राष्ट्र’ के संपादक के रूप में आया था.”

गोडसे ने कहा था पौने घंटे में बता दूंगा सबकुछ 
नाथूराम ने कहा, “आज आप मेरी वजह से अपने पिता को खो चुके हैं. आप और आपके परिवार पर जो वज्रपात हुआ है, उसका मुझे खेद है. मैंने गांधी की हत्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक कारणों से की है. आप पुलिस से पूछिए, अगर पौने घंटे का वक्त दें तो मैं आपको बता सकूं कि मैंने गांधीजी की हत्या आखिर क्यों की."

महात्मा गांधी के बेटे देवदास जब जेल में नाथूराम गोड्से से मिलने पहुंचे तो वो उनको तुरंत पहचान गया


दरअसल नाथूराम गोडसे गांधीजी की हत्या पर गांधीवादियों से चर्चा करना चाहता था. लेकिन ये मुलाकात तीन मिनट से अधिक वक्त तक नहीं चल सकी. इसके बाद 8 नवम्‍बर 1948 को 90 पेज का बयान कोर्ट के सामने पढ़ते हुए उसने कहा था कि 32 सालों से इकट्ठा हो रही उकसावेबाजी और फिर मुसलमानों के लिए उनके आखिरी अनशन ने आखिरकार मुझे इस नतीजे पर पहुंचने के लिए प्रेरित किया कि गांधी का अस्तित्‍व तुरंत खत्‍म करना ही चाहिए.

नाथूराम ने कहा, उनकी गांधीजी से कोई व्यक्तिगत अदावत नहीं थी.
क्यों की थी डॉक्टरी जांच की पहल
नाथूराम ने दूसरे आरोपी और अपने भाई गोपाल गोडसे को बताया था कि हत्या के बाद जब उसे तुगलक रोड थाने ले जाया गया तो उसने डॉक्टरी जांच कराने के लिए कहा. नाथूराम ने कहा था कि उसने ऐसा इसलिए किया ताकि बाद में सरकार उसे पागल घोषित न कर सके.

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First published: January 30, 2020, 12:31 PM IST
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