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दफ्तर से पेन-पेपर की चोरी क्यों करते हैं कर्मचारी, हुआ खुलासा

News18Hindi
Updated: October 31, 2019, 12:09 PM IST
दफ्तर से पेन-पेपर की चोरी क्यों करते हैं कर्मचारी, हुआ खुलासा
इन मामूली चोरियों से ऑफिस का सामान लगभग 35% तक घट जाता है (सभी तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

लगभग 23 फीसदी लोग ही ऑफिस स्टेशनरी को चोरी किसी खास मकसद के साथ करते हैं, वहीं 77 प्रतिशत कर्मचारी बेमकसद कोई भी सामान उठा लेते हैं.

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  • Last Updated: October 31, 2019, 12:09 PM IST
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क्या आपने कभी दफ्तर से A-4 साइज पेपर, पेपरवेट या स्टेशनरी चुराई है? या फिर प्रिंटर से अपने खुद के इस्तेमाल के लिए प्रिंटआउट्स लिए हैं? ब्रिटेन की एक कंपनी पेपरमार्ट के एक सर्वे में निकलकर आया है कि तकरीबन सभी कर्मचारी अपने ऑफिस से स्टेशनरी यानी पेन-पेपर चुराते हैं.

सभी ने की है कभी न कभी चोरी
एक पेन की लॉन्चिंग के मौके पर ये सर्वे किया गया, जिसमें शामिल 100% लोगों ने बताया कि उन्होंने कभी न कभी पेन चुराया है. इसी तरह के कई और सर्वे भी यही बताते हैं कि कर्मचारियों को ऑफिस से स्टेशनरी चुराने या निजी जरूरत के लिए प्रिंटआउट लेने से कोई गुरेज नहीं. साथ ही ये भी निकलकर आया इस छोटी-मोटी चोरी का कंपनियों पर आर्थिक बोझ काफी ज्यादा है. इन मामूली चोरियों से ऑफिस का सामान लगभग 35% तक घट जाता है. यहां तक कि कई कंपनियोंके लिए ये उनके सालाना रिवेन्यू का 1.4 प्रतिशत तक हो जाता है.

बस यूं ही चुरा लिया

इस मामूली चोरी को कोवर्कर्स क्राइम का नाम दिया गया और इसका प्रतिशत भी निकाला गया. इसमें पाया गया कि लगभग 23 प्रतिशत लोग ही ऑफिस स्टेशनरी को चोरी किसी खास मकसद के साथ करते हैं, वहीं 77 प्रतिशत लोग बेमकसद कोई न कोई सामान उठा लेते हैं.

77 प्रतिशत लोग बेमकसद कोई न कोई सामान उठा लेते हैं


चोरी की अजीबोगरीब वजहें
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सर्वे में शामिल 1600 लोगों में से 50 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे पेन चुराते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि दफ्तर का पेन ज्यादा स्मूद लिखता है. 36 प्रतिशत ने कहा कि दफ्तर का लोगो बना होना और पेन का शानदार दिखना उन्हें इसे चुराने के लिए प्रेरित करता है. बाकी लोगों का कहना था कि उन्हें रंग या कुछ और पसंद है, जिसकी वजह से उन्होंने चोरी का फैसला किया.

चोरी होने वाले बाकी सामानों में पेंसिल, मार्कर, पेपर क्लिप, रबर बैंड, टी बैग, चीनी, नमक और स्टेपलर तक शामिल हैं.

इतनी मामूली सी चोरी क्यों करते हैं
इसका जवाब कंपनी-कर्मचारी रिश्ते और मनोविज्ञान पर काम करता है. नौकरी की शुरुआत में कॉन्ट्रैक्ट से अलग भी कई वादे किए जाते हैं जैसे कि कंपनी में अच्छा माहौल मिलेगा, क्रिएटिव फ्रीडम होगी, काम के घंटे फ्लेक्जिबल होंगे आदि. इसे साइकोलॉजिकल कॉन्ट्रैक्ट कहते हैं. कुछ समय बाद ही कर्मचारी को पता चलता है कि ऐसा कुछ भी नहीं है या जितनी उम्मीद थी, उससे कहीं कम है. ऐसे में वो खुद को ठगा हुआ महसूस करता है. तभी से कर्मचारी काम में लापरवाही करने लगता है या फिर छोटी-मोटी चोरियां करने लगता है.

कंपनी ने किया धोखा
सर्वे में शामिल लगभग 55 फीसदी नौकरीपेशा लोगों को शिकायत है कि कंपनियों ने उनसे किए वादे पूरे नहीं किए. ये शिकायत अमूमन नौकरी के पहले दो सालों के भीतर आती है. लगभग 65 प्रतिशत लोग ये कहते हैं कि नौकरी के पहले ही साल में वे खुद के साथ हुए धोखे से परेशान हो गए. बहुतेरे कर्मचारी इसके साथ ही काम के लिए लापरवाह हो जाते हैं, बिना जरूरत भी छुट्टी लेते हैं और अपना व्यवहार भी बिगाड़ने लगते हैं.

लोगों को शिकायत है कि कंपनियों ने उनसे किए वादे पूरे नहीं किए


चोरी को हक मान लेते हैं
एक नॉन-प्रॉफिट मीडिया संस्थान The Conversation ने भी दफ्तरों में चोरी की आदत पर सर्वे किया. इसमें भी यही निष्कर्ष सामने आया कि कर्मचारी तभी ऐसा करना शुरू करते हैं, जब उन्हें लगता है कि कंपनी उनसे किए वादे पूरे नहीं कर रही. वे मानते हैं कि चूंकि कंपनी ने उनसे साथ धोखा किया है, तो उनका भी हक है कि कंपनी को छोटा-मोटा धक्का दें.

हालांकि इस तरह की मामूली चोरियां, जिनसे किसी का कोई खास नुकसान या फायदा नहीं, इसे kleptomania की श्रेणी में रखा जाता है लेकिन दफ्तर में होती चोरी इस श्रेणी में शामिल नहीं. ये असंतोष जताने का एक तरीका है.

चोरी से बचने के लिए क्या करें?
मनोविज्ञान में इसके लिए भी एक रास्ता सुझाया गया है. कंपनी से असंतुष्ट कर्मचारी BRAIN (Benefits, Risks, Alternatives, Information and Nothing) का इस्तेमाल कर सकते हैं. पहले तौलें कि आपकी इस छुटपुट चोरी का क्या फायदा है. अगर फायदा नहीं है तो क्या इसके खतरे हैं? खतरे लेकर भी आप खुश नहीं हैं तो क्या करना चाहिए? इसके लिए कंपनी से बात करनी चाहिए. बात करने से पहले पूरी सूची बना लें कि आपकी कंपनी से क्या उम्मीदें हैं और कंपनी की किन उम्मीदों पर आप खरे उतरे हैं. हो सकता है कि इससे बात बन जाए.

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First published: October 31, 2019, 12:09 PM IST
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