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जानिए, क्यों फ्रांस में मुर्दों के साथ भी हो सकती है शादी, खुद राष्ट्रपति देते हैं अनुमति

फ्रांस में मुर्दों के साथ खास परिस्थितियों में शादी हो सकती है, जिसके लिए राष्ट्रपति अनुमति देते हैं- सांकेतिक फोटो
फ्रांस में मुर्दों के साथ खास परिस्थितियों में शादी हो सकती है, जिसके लिए राष्ट्रपति अनुमति देते हैं- सांकेतिक फोटो

फ्रांस में मृतक से शादी (Necrogamy in France) करने पर पुरानी तारीख पर शादी का रजिस्ट्रेशन होता है. इस दौरान स्थानीय प्रशासन भी शादी को सपोर्ट करता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 29, 2020, 4:46 PM IST
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इस्लामिक अलगाववाद के खिलाफ कानून बनाने की बात करने वाला यूरोपियन देश फ्रांस आजकल सुर्खियों में है. वैसे आमतौर पर ये देश अपने आजाद-खयालों के लिए जाना जाता है. यहां तक कि फ्रांस में कोई चाहे तो मृत व्यक्ति से भी शादी (Posthumous marriage in France) रचा सकता है. इसके लिए उसे सरकारी अधिकारियों और मृतक के परिजनों से इजाजत लेनी होती है.

मृतक के शादी की इस प्रथा को अंग्रेजी में नेक्रोगेमी भी कहते हैं. ये रिवाज वाला 19वीं सदी से चला आ रहा है. यहां तक कि वहां सिविल कोड के आर्टिकल 171 में इसकी अनुमति दी गई है. इसके तहत अगर कोई चाहे तो लंबे समय से अपने साथी रहे, और एकाएक मृत हो गए शख्स से शादी कर सकता है. हालांकि इसके लिए राष्ट्रपति से लेकर स्थानीय प्रशासन और मृतक के परिवार वालों की भी सहमति चाहिए होती है.

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मृतक से शादी करने की ये परंपरा पहले विश्व युद्ध के दौरान चलन में आई थी. बगैर शादी गर्भवती महिला का साथी अगर युद्ध के दौरान मारा जाए तो उसे मृतक से ही शादी करनी होती थी ताकि बच्चे को पिता का नाम मिल सके. हालांकि इसे कानूनी जामा साल 1959 में मिला. तब एक पुल बांध टूटने पर 423 लोग मारे गए थे. इसी दुर्घटना के एक मृतक की कुछ दिनों पहले ही सगाई हुई थी. मृतक की मंगेतर ने सरकार से मृतक से ही शादी करने की अपील की.
फ्रांस के राष्ट्रपति चार्ल्स दी गौले ने पहली बार मृतक से शादी को सहमति दी थी


तब चार्ल्स दी गौले (Charles de Gaulle) फ्रांस के राष्ट्रपति थे. उन्होंने मृतक के शादी की अनुमति दे दी. इस घटना को लोगों की खूब वाहवाही मिली और महीनों तक ये घटना सुर्खियों में रही. इसके बाद ही नेशनल असेंबली ने कानून पारित कर दिया, जिसके तहत कुछ खास परिस्थितियों में कोई अपने मृत साथी से शादी कर सकता है.

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इसके लिए ये साबित करना होता है कि मृतक का उससे ही शादी करने का इरादा था, जो शादी की मांग कर रहा है. इसमें मृतक के परिजनों की सहमति, दोस्तों के बयान तक लिए जाते हैं ताकि पक्का हो सके कि कोई गलत मांग नहीं हो रही. शादी असली शादी की तरह लगे, इसके पक्के इंतजाम किए जाते हैं और तस्वीर के साथ ही शादी की सारी रस्में की जाती हैं.

साथ ही प्रशासन भी अपनी ओर से काफी एक्टिव रहता है. वो बैक डेट पर शादी का रजिस्ट्रेशन करता है. यानी उस तारीख का जिसमें दोनों ही पक्ष जीवित रहे हों. इससे आगे किसी कानूनी जरूरत में कोई बाधा नहीं आती है और डेथ सर्टिफिकेट भी सही रहता है.

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ये भी हो सकता है कि लोग किसी से आर्थिक फायदे के लिए उसे मार दें और फिर शादी का नाटक रचाएं. कानून में इसका भी ध्यान रखा गया है. कोई इरादतन ऐसा न करे, इसके लिए प्रशासन पक्का करता है कि मृतक से शादी करने वाले को उसकी विरासत न मिले, बल्कि विडो पेंशन मिले. साथ ही अगर शादी करने वाला चाहे तो अपने साथी का सरनेम भी अपने नाम में जोड़ सकता है.

कई दूसरे देशों में भी मृत व्यक्ति से शादी रचाई जा सकती है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


फ्रांस के अलावा कई दूसरे देशों में भी मृत व्यक्ति से शादी रचाई जा सकती है. जैसे साल 1983 में दक्षिण कोरिया में ऐसा ही एक मामला आया था. एक धार्मिक नेता और व्यावसायी के बेटे Heung Jin Moon की दुर्घटना में मौत हो गई. इसके कुछ ही दिनों बाद Heung Jin Moon की शादी होने वाली थी. सारी तैयारियां हो चुकी थीं. तब मंगेतर सामने आई और उसने खुद मृतक से शादी की मांग की.

कोरियाई आस्था के मुताबिक उसका तर्क था कि शादी के बाद मरने वाले को स्वर्ग मिलता है. इसी देश में एक बॉक्सर की मंगेतर ने भी उसकी मौत के बाद तस्वीर से शादी की थी. कोरियाई मान्यता के अनुसार आत्मा से शादी करने वाले को सारी जिंदगी दूसरा साथी चुनने की इजाजत नहीं होती है. दक्षिण कोरिया में दूरदराज के इलाकों में अब भी ये मान्यता है, हालांकि इसके लिए कोई कानून नहीं है.

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जापान के ओकिनावा प्रांत में भी मृतक से शादी को मान्यता मिल जाती है. ये प्रांत चीनियों की आवाजाही के कारण काफी हद तक उसी के प्रभाव में है. चूंकि चीन में भी आत्मा से शादी का रिवाज है, तो जापानी प्रांत में भी ये रिवाज चला आया. इस प्रथा को चीनी भाषा में minghun कहते हैं यानी आत्मा से शादी. ये शादी दो अविवाहित मृतकों या फिर एक जीवित और एक मृत के बीच भी हो सकती है.
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