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Explained: क्यों उठी देश में स्पीड लिमिट बढ़ाने की बात, दूसरे देशों में क्या है रफ्तार?

राज्य अपनी सीमा में आने वाली सड़कों पर स्पीड में फेरबदल करते रहते हैं (Photo-  news18 English via Reuters)

राज्य अपनी सीमा में आने वाली सड़कों पर स्पीड में फेरबदल करते रहते हैं (Photo- news18 English via Reuters)

देश में हाइवे पर गाड़ियों की अधिकतम स्पीड (revise in maximum speed limits) बढ़ाने का जिक्र आया है. वैसे स्पीड की तुलना करें तो वेनेजुअला (Venezuela) में शहर के भीतर गाड़ियां सबसे धीमी गति से चलती हैं.

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    केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने देश में एक्सप्रेस वे और हाइवे पर गाड़ियों की अधिकतम लिमिट बढ़ाने की बात की. ये सीमा 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ाई जा सकती है. फिलहाल सड़क परिवहन मंत्रालय (Road Transport and Highways Ministry) ने कारों के लिए नेशनल हाइवे पर अधिकतम स्पीड तय कर रखी है लेकिन इसे राज्य अपने मुताबिक बदलते रहते हैं. कई बार काफी कम स्पीड पर भी चालान कट जाता है, जिसे लेकर सालभर पहले ही गडकरी ने अफसोस जताते हुए स्पीड बढ़ाने और सबके लिए समान करने (uniformity of speed limit) की बात की थी.

    अभी क्या है अधिकतम स्पीड
    वर्तमान में हाइवे पर कारों की स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा और एक्सप्रेस वे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटा है. दोपहिया वाहनों और ट्रक जैसे भारी वाहनों के लिए ये स्पीड अलग हो जाती है. जैसे बाइक सवाल अधिकतर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकते हैं, वहीं बस या ट्रक की स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जा सकती है.

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    हाइवे पर कारों की स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा और एक्सप्रेस वे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटा है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    क्यों बदलने की बात हो रही
    वैसे तो मिनिस्ट्री ने हाइवे पर गाड़ियों की मैक्सिमम स्पीड पक्की कर दी है लेकिन राज्य अपनी सीमा में आने वाली सड़कों पर स्पीड में फेरबदल करते रहते हैं. इससे नेशनल हाइवे के कुछ हिस्से अलग स्पीड को इजाजत देते हैं, तो कुछ अलग स्पीड को. इसका बुरा असर वाहन चालक पर पड़ता है. वो हाइवे पर एकदम से कम से ज्यादा या ज्यादा से कम गति में आने पर विवश रहता है, जिससे कई बार हादसों का डर होता है.

    ये भी पढ़ें: समझें, मानसून के बारे में सबकुछ, क्यों इसकी लेटलतीफी पड़ती है भारी?

    इसके अलावा पर्याप्त बोर्ड भी नहीं हैं जो बता सकें कि फलां जगह पर अधिकतम गति कितनी तय है. ऐसे में अनजाने में हुई गलती के कारण ड्राइवर को चालान भरना पड़ जाता है.

    स्पीड लिमिट एक समान होने पर वाहन चालकों को काफी सुविधा होगी
    इससे ड्राइविंग आसान हो जाएगी. साथ ही हादसों की डर भी कम रहेगा. इसके अलावा सरकार का ये भी मानना है कि बीते कुछ सालों में सड़कों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है. ऐसे में बेहतर सड़क पर भी धीमी गति से चलना सड़क पर लोड बढ़ा रहा है.

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    स्पीड का असमान होना भी सड़क हादसों की एक वजह है- सांकेतिक फोटो


    स्पीड में फेरबदल
    देश में अलग-अलग राज्य अपने हिस्से में आने वाले हाइवे पर गाड़ियों की स्पीड में फेरबदल करते रहे हैं, कुछ वैसा ही विदेशों में भी है. अलग-अलग देशों ने हाइवे पर अपनी अलग लिमिट तय की हुई है. वैसे बता दें कि दूसरे देशों में नेशनल हाइवे को अर्बन रोड कहा जाता है. ये वो सड़कें हैं, जहां पर्याप्त रोशनी हो और जो ढंग से बनी हुई हो. इंटरनेशनल ट्रैफिक सेफ्टी डाटा एंड एनालिसिस ग्रुप (IRTAD) के तहत कई पश्चिमी देशों ने अपने यहां एक ही स्पीड रखी है. यहां 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चलाई जा सकती है.

    नीदरलैंड इस मामले में थोड़ा अलग
    वहां लगभग पूरे देश में सड़क चाहे जितनी अच्छी हो, लेकिन गाड़ियों की स्पीड 30 किमी प्रति घंटे से ज्यादा नहीं रखी जा सकती है. स्पीड लिमिट तोड़ने पर यहां भारी जुर्माना भी लगता है. वहीं अमेरिका और चीन में सड़कों पर कोई अधिकतम गति तय नहीं है.

    वेनेजुअला में शहर के भीतर गाड़ियों की अधिकतम लिमिट 15 से 30 किमी प्रतिघंटा है. ये दुनिया में सबसे कम है. इसके बाद वेटिकन सिटी का नंबर आता है, जहां आप शहर में 30 की स्पीड में गाड़ी चला सकते हैं. गाड़ियों की गति में सबसे ज्यादा विविधता अमेरिका में दिखती है, जहां 30 किमी प्रति घंटे से लेकर 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सड़कों पर गाड़ियां दौड़ती दिख जाएंगी.

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    ड्राइविंग के मामले में दक्षिण अफ्रीका की सड़कें सबसे खतरनाक हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    गाड़ियों की अलग-अलग स्पीड के बीच ये जानना भी जरूरी है कि आखिर देश सड़क हादसों के मामले में कहां है. तुलना करें तो देश में दुनियाभर के वाहनों का केवल 1% है. इसके बाद भी सड़क हादसों में ग्लोबल डेथ के आंकड़े में हमारा योगदान 11% है. वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत सड़क हादसों में हुई मौतों के मामले में पहले स्थान पर है. बीते साल खुद गडकरी ने रोड एक्सिडेंट्स को कोरोना से ज्यादा खतरनाक कहा था.

    कई दूसरी रिपोर्ट्स ऐसी हैं, जिसमें ड्राइविंग के लिए खतरनाक देशों का क्रम बदल जाता है. दुनिया भर में ड्राइवर एजुकेशन उपलब्ध कराने वाली कंपनी जुटोबी ने एक स्टडी यही जानने के लिए की. इस दौरान 56 देशों को शामिल किया गया. इसमें पाया गया कि दक्षिण अफ्रीका की सड़कें सबसे खतरनाक हैं. यहां रोड हादसे में मरने वालों की संख्या 57 फीसदी से ज्यादा है. यहां हर एक लाख ड्राइवर्स में मरने वालों की संख्या 36 है.

    ड्राइविंग के मामले में सबसे सुरक्षित देशों की सूची में नॉर्वे सबसे ऊपर है, जहां सालाना प्रति लाख की ड्राइविंग आबादी में से 2.7 लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत होती है. इसकी वजह यहां के सख्त नियम-कायदे हैं. साथ ही यहां लोगों में सिविक सेंस ज्यादा है. लगभग 95 प्रतिशत लोग यहां सीट बेल्ट पहनकर ही गाड़ी चलाते हैं.

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