Coronavirus: क्यों हो रहे हैं एंटी मास्क प्रोटेस्ट?

Coronavirus: क्यों हो रहे हैं एंटी मास्क प्रोटेस्ट?
स्पेन में हजारों की भीड़ कोरोना से बचाव के लिए मास्क का विरोध कर रही है (Photo-pixabay)

स्पेन में हजारों की भीड़ कोरोना से बचाव के लिए मास्क का विरोध (anti-mask protest in Spain) कर रही है. उनका कहना है कि मास्क कोई साजिश है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 17, 2020, 1:46 PM IST
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कोरोना के खतरे के बीच स्पेन की राजधानी मैड्रिड में हजारों की भीड़ ने इकट्ठा होकर मास्क का विरोध किया. रविवार को प्रदर्शन करती ये भीड़ मास्क हटाने की मांग कर रही है. बता दें कि कोरोना संक्रमण के मामले में काफी ऊपर जा चुके स्पेन में मई से सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनना अनिवार्य हो चुका है. इसका हल्का-फुल्का विरोध पहले से ही हो रहा था, लेकिन 2 दिनों पहले पब्लिक में स्मोकिंग पर बैन के बाद लोग सीधे सड़कों पर उतर आए. जानिए, क्यों लोग मास्क का विरोध कर रहे हैं.

मैड्रिड में रविवार को लोग मास्क के विरोध में सड़कों पर उतर आए. उनके हाथों में बड़े-बड़े प्ले कार्ड्स थे, जिनपर कई बातें लिखी थीं, जैसे- वायरस का कोई अस्तित्व नहीं है, मास्क किल्स या हम डरे हुए नहीं हैं. प्रदर्शनकारियों में आम लोग नहीं, बल्कि कंस्पिरेसी थ्योरीज को बढ़ावा देने वाले लोग भी शामिल थे. कुल मिलाकर ऐसे लोग मास्क के खिलाफ बोल रहे हैं जिन्हें लगता है कि कोरोना वायरस जैसी कोई चीज असल में है ही नहीं, बल्कि सरकारें झूठ बोल रही हैं.

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कुछ ऐसे भी थे, जो कोरोना की वैक्सीन के खिलाफ थे. उनका मानना है कि वैक्सीन लोगों को कमजोर बनाती है. फ्रांस 24 की रिपोर्ट में रैली में आई एक 58 साल की महिला ने कहा कि वे मानती हैं कि मास्क और कोरोना दोनों ही सरकारों की कोई साजिश है. पिलर मार्टिन नाम की इस महिला को यकीन है कि कोरोना से मौत के आंकड़ों को सरकार जानबूझकर बढ़ाकर बताती है.
लोगों को यकीन है कि कोरोना से मौत के आंकड़ों को सरकार जानबूझकर बढ़ाकर बताती है सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


प्रदर्शनी में आए कई लोग एक फिल्म "Plandemic" का हवाला दे रहे थे. ये एक डॉक्युमेंट्री है जो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दी गई है. फेसबुक और यूट्यूब पर भी ये उपलब्ध नहीं. लोगों का आरोप था कि इसमें बताया गया था कि कैसे मास्क के कारण जानें जा सकती हैं या फिर वैक्सीन की वजह से अरबों की जान गई.

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बता दें कि स्पेन कई महीनों तक कोरोना प्रभावित देशों में टॉप 4 में रहा. ये देखते हुए वहां 3 महीने का सख्त लॉकडाउन लगा दिया गया जो 21 जून को खत्म हुआ. उसके बाद पब्लिक प्लेस के लिए मास्क अनिवार्य हो गया. इसी पर लोग भड़के हुए हैं. साथ में उनके गुस्से को और भड़काने का काम स्पेन सरकार के हालिया आदेश ने किया, जिसके तहत स्मोकिंग के लिए मास्क उतारने पर कोरोना का डर होने के कारण पब्लिक प्लेस पर स्मोकिंग को भी बैन कर दिया गया.

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वैसे अगर केवल मास्क पहनने से कोरोना से काफी हद तक बचा जा सकता है तो लोग इतने छोटे उपाय का भी विरोध क्यों कर रहे हैं? विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे एक खास मनोविज्ञान काम करता है. टुडे.कॉम की रिपोर्ट में नॉर्थ कैरोलिन की ड्यूक यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी एक्सपर्ट मार्क लैरी इसे आजादी से जोड़ते हैं. वे कहते हैं कि लोग वही करते हैं, जिसके लिए उन्हें रोका जाए. मास्क पहनना भी इसी तरह से आजादी से जुड़ जाता है. मार्क के मुताबिक अगर लोगों को मास्क पहनने से रोका जाए तो भी वे उल्टी प्रतिक्रिया देंगे और मास्क पहनना चाहेंगे.

अगर लोगों को मास्क पहनने से रोका जाए तो भी वे उल्टी प्रतिक्रिया देंगे और मास्क पहनना चाहेंगे (Photo-pixabay)


क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट जोशुआ क्लापाव का भी यही मानना है. वे मानते हैं कि जब सरकारें मास्क को अनिवार्य बनाती हैं जो ये आम लोगों के लिए ऐसा ही है, जैसा बॉस से कोई आदेश लेना. लोग इसे तुरंत अपनी आजादी से जोड़ते हैं और वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा कोई उखड़ा हुआ कर्मचारी अपने बॉस से करे.

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एंटी मास्क प्रोटेस्ट करने वालों की तरह ही एक और श्रेणी भी है जो वैक्सीन के विरोध में है. इन्हें एंटी-वैक्सर्स (anti-vaxxers) कहा जाता है. एंटी-वैक्सर्स मानते हैं कि वैक्सीन की दुनिया को जरूरत ही नहीं है, बल्कि सारी खतरनाक बीमारियों को इंसानी शरीर ऐसे ही हरा सकता है. वे यह भी मानते हैं कि वैक्सीन के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और कई दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं. यहां तक गर्भावास्था के दौरान मां को लगने वाली वैक्सीन्स पर भी ये समुदाय सवाल करता है. उसका तर्क है कि बच्चों में बढ़ती ऑटिज्म या कई तरह की मानसिक बीमारियां इसी की देन हैं.
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