आखिर क्यों अमेरिका ने कोरोना फंड को हथियारों की खरीदी पर उड़ा दिया?

पेंटागन ने कोरोना केयर फंड का बड़ा हिस्सा हथियारों की खरीदी पर खर्च कर दिया- सांकेतिक फोटो
पेंटागन ने कोरोना केयर फंड का बड़ा हिस्सा हथियारों की खरीदी पर खर्च कर दिया- सांकेतिक फोटो

चीन पर भड़के पेंटागन ने कोरोना केयर फंड का बड़ा हिस्सा हथियारों की खरीदी (Pentagon used corona fund to buy weapons) पर खर्च कर दिया. अब उसके पास वैक्सीन के लिए पैसों की तंगी हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 25, 2020, 10:54 AM IST
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अमेरिका में कोरोना (coronavirus in America) संक्रमितों की संख्या 71 लाख से ऊपर जा चुकी है. संक्रमण के मामले में टॉप पर खड़े देश में इसके बाद भी कई स्तरों पर लापरवाही दिख रही है. मिसाल के तौर पर यहां कोरोना के लिए रखे फंड से 1 बिलियन डॉलर से भी बड़ा हिस्सा पेंटागन (Pentasgon) ने हथियारों की खरीदी पर उड़ा दिया. इसके बाद से अमेरिका की राजनीति में भूचाल आया हुआ है. माना जा रहा है कि मेडिकल उपकरणों की खरीदी के लिए सुरक्षित इस फंड को आर्मी के खर्च में लगाने से आम अमेरिकी जनता का कोरोना से बचाव मुश्किल हुआ.

कोरोना केयर्स एक्ट हुआ पास
इसी साल के मार्च में महामारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए कांग्रेस ने केयर्स एक्ट (Cares Act) पास किया. इसके तहत पेंटागन को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सीनेट रिपब्लिकन ने 2 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 152 लाख करोड़ रुपए के फंड दिए. तय किया गया था कि ये फंड मेडिकल उपकरणों की खरीदी में लगाया जाएगा, जैसे मास्क, पीपीई किट और ऑक्सीजन. हालांकि अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने इसे कोरोना के इस फंड को मिलिट्री उपकरणों की खरीदी पर लगा दिया. साथ ही ये रिलीफ पैकेज की तरह भी काम आने वाला था.

अमेरिका में कोरोना संक्रमितों की संख्या 71 लाख से ऊपर जा चुकी है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

इंटरनेशनल मीडिया ने किया रिपोर्ट


इस बारे में वॉशिंगटन पोस्ट में एक रिपोर्ट आई है, जो विस्तार से बताती है कि कैसे पेंटागन की इस हरकत के कारण अमेरिका में कोरोना से 2 लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और अब भी बड़ूी आबादी से इससे प्रभावित है. रक्षा मुख्यालय की इस लापरवाही पर गुस्सा जताते हुए सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने हाल ही में इस बात का खुलासा किया है.

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वैक्सीन के लिए कम हो सकते हैं पैसे
CDC के मुताबिक अगले साल की शुरुआत में ही वैक्सीन के आने के बाद सभी अमेरिकियों को वैक्सीन देने की जरूरत पड़ेगी. इसके लिए तुरंत ही लगभग 6 बिलियन डॉलर का बजट चाहिए होगा. बता दें कि अमेरिका ने अपने लोगों को मुफ्त में कोरोना वैक्सीन देने का एलान किया है. CDC का कहना है कि केयर्स फंड ऐसी ही जरूरतों के लिए दिया गया था, न कि हथियारों की खरीदी के लिए.

फिलहाल अमेरिका चीन का विस्तार रोकने के लिए हरसंभव कोशिश करता दिख रहा है- सांकेतिक फोटो (flickr)


किन चीजों की हुई खरीदी
अमेरिकी डिफेंस ने हाल ही में चीन के आक्रामक रवैये के बदले में और भी ज्यादा आक्रामक रवैया दिखाया है. साथ ही वो रूस और ईरान जैसे देशों से भी परेशान है, जो लगातार अपना डिफेंस बजट बढ़ाते हुए नए प्रयोग कर रहे हैं. माना जा रहा है कि यही देखते हुए पेंटागन अपने विभाग को और मॉर्डन बना रहा है. यहां तक कि उसने शुरुआत में कोरोना मरीजों और अस्पताल के लिए मिले 3 बिलियन डॉलर में से सीधे 1 बिलियन डॉलर आर्मी के साजोसामान जैसे जेट इंजन पार्ट्स, बार्डी आर्मर और मिलिट्री यूनिफॉर्म बनाने में खर्च कर दिए.

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पहले भी ट्रांसपरेंसी का उठा था मुद्दा
बता दें कि पहले भी महामारी की शुरुआत में ये डर जताया गया था कि कोरोना के लिए जमा फंड का सही इस्तेमाल शायद ही हो सके. डेली मेल में इसपर एक रिपोर्ट की थी, जिसमें उसने शंका जताई थी कि फंड का बड़ा हिस्सा अमेरिकी अरबपतियों के हिस्से चला जाएगा. अमेरिका की जॉइंट कमिटी ऑन टैक्सेशन ने इस आंकड़े की जानकारी देते हुए कहा था कि फंड का लाभ करीब 82 फीसदी ऐसे अमीर उठा पाएंगे, जिनकी सालाना आमदनी 1 मिलियन डॉलर यानी करीब 7 करोड़ 60 लाख रुपए से ज्यादा है.

अमेरिका ने चीन के आक्रामक रवैये के बदले में और भी ज्यादा आक्रामक रवैया दिखाया- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


किन लोगों को फायदा
देखा जाए तो यही हुआ भी. रक्षा हथियार बनाने वाली कंपनी रॉल्स रॉयस और आर्सेलर मित्तल को 183 मिलियन डॉलर से ज्यादा रकम हथियारों के लिए दे दी गई. इसके अलावा स्पेस और सैटेलाइट तकनीक पर भी बड़े पैसे लगाए गए. अब जब कोरोना के लिए जमा इस फंड का इस्तेमाल हथियार खरीदी में दिखने के बाद से बाकी फंड के इस्तेमाल पर भी सवाल उठ रहे हैं.

किसलिए सेहत की बजाए रक्षा पर खर्च
माना जा रहा है कि फिलहाल अमेरिकी चुनाव को देखते हुए कई बड़े फैसले लिए गए. सेहत के लिए जमा फंड को रक्षा में लगाना भी ऐसा ही एक फैसला रहा. बता दें कि फिलहाल अमेरिका चीन का विस्तार रोकने के लिए हरसंभव कोशिश करता दिख रहा है. लगातार मिलिट्री अभ्यास के अलावा वो लंबी दूरी की मिसाइलें भी बना रहा है. इधर चीन भी कोरोना के खस्ताहाल देशों का फायदा उठाते हुए सुपर पावर बनने की फिराक में है.

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बता दें कि कोरोना के बाद देशों के डायनेमिक्स अलग होकर सामने आएंगे, जिसकी संभावना अभी से दिख रही है. इसमें अमेरिका चीन से पीछे चला जाएगा, ऐसे भी कयास लगाए जा रहे हैं. यही देखते हुए अमेरिका फर्स्ट की नीति रखने वाली ट्रंप सरकार कोरोना को संभालने की बजाए सैन्य मोर्चे पर खुद को ज्यादा मजबूत कर रही है. पेंटागन का हालिया सौदा भी यही बताता है.
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