मिल्की वे के आसपास मिली तारों की ‘Recycled’ गैस, वैज्ञानिक मान रहे इसे अहम

मिल्की के (Milky Way) पास गैसीय कणों का एक हालो (Halo) दिखाई दिया है जिसका तारों के निर्माण और मृत्यु से संबंध दिख रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
मिल्की के (Milky Way) पास गैसीय कणों का एक हालो (Halo) दिखाई दिया है जिसका तारों के निर्माण और मृत्यु से संबंध दिख रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एक छोटे सैटेलाइट (Small satellite) ने हमारी गैलेक्सी (Galaxy) मिल्की वे (Milky Way) के पास हालो (Halo) खोजा है जिसका संबंध गैलेक्सी के तारों से दिखाई दे रहा है. इस खोज ने कई उम्मीदें जगाई हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 22, 2020, 7:23 PM IST
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हमारे ब्रह्माण्ड (Universe) की उत्पत्ति और विकास को जानने के लिए वैज्ञानिक तारों, गैलेक्सी (Galaxy) सहित कई पिंडों का अध्ययन करते हैं. टेलीस्कोप के जरिए वे तारों, ग्रहों, ब्लैकहोल, जैसे कई पिंडों का अवलोकन कर जानकारी जमा करने के साथ उन प्रक्रियाओं को समझने का प्रयास करते हैं जो आज के ब्रह्माण्ड की गतिविधियों को संचालित करती हैं. लेकिन इस छोटे से अंतरिक्षयान हालोसेट (HaloSat) ने हमारी गैलेक्सी मिल्कीवे (Milky Way) के आसापास गर्म गैस का एक मंडल (Halo) देखा है जिसमें वैज्ञानिकऔर खगोगलविद काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

गर्म गैस का हालो
हालोसेट के अवलोकनों से पता चला है कि मिल्कीवे एक भारी गर्म गैसे के मंडल से घिरा है जिसे लगातार पैदा होने वाले और मरते हुए तारों में उत्सर्जित पदार्थ मिल रहा है. हालो या मंडल वह इलाका होता है जो गर्म गैस से भरा होता है जो किसी गैलेक्सी के आसपास पाया जाता है इसके सर्कमगैलेक्टिक मीडियम (Circumgalactic medium) भी कहा जाता है.

इस पहले को सुलझा सकता है ये हालो
गर्म गैस का यह मंडल या होला 13 अरब साल पहले मिल्की वे के निर्माण के समय उसके लिए इन्क्यूबेटर की तरह काम किया करता था. इस हालो से लंबे से अनसुलझी उस पहेली का हल मिल सकता है जिसमें वैज्ञानिक यह पता लगाने में लगे हैं कि ब्रह्माण्ड का खोया हुआ पदार्थ कहां है.



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इस हालो (Halo) में पदार्थ (Matter) तारों (Star)से आता जाता है यह एक अहम खोज हो सकती है.


तीव्र एक्सरे उत्सर्जन
नासा के द्वारा अनुदानित इस अध्ययन के नतीजे नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित हुए हैं. शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि सर्कमगैलेक्टिक मीडियम की एक डिस्क की तरह का आकार है जिससे तीव्र गति का एक्स रे उत्सर्जन हो रहा है.

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क्या बताता है यह उत्सर्जन
यूनिवर्सिटी ऑफ इओवा के प्रोफेसर और इस अध्ययन के करेसपॉन्डिंग लेखक फिलिप कारेट ने बताया, “एक्स रे उत्सर्जन मिल्की वे के उन हिस्सों के ऊपर ज्यादा हैं जहां तारों का निर्माण ज्यादा तेजी से हो रहा है. इससे यह पता चलता है कि सर्कमगैलेक्टिक मीडियम का तारों के निर्माण से संबंध है. और संभव है कि हमें वह गैस देख रहे हों जो पहले मिल्की वे में गिरी, उसने तारे बनाए और अब रीसाइकिल होकर वापस इस मीडियम में आ गई है. हर गैलेक्सी का इस तरह का मीडियम होता है. ये इलाके गैलेक्सी के निर्माण और विकास को समझने के लिहाज से बहुत अहम होते हैं. इसके साथ ही ये यह भी बताते हैं कि कैसे ब्रह्माण्ड में हीलियम और हाइड्रोजन के केंद्र से कॉस्मिक विस्तार में बदलते हुए तारों, ग्रहों, धूमकेतु, और अन्य पिंडों को बनाती गई.

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इस खोज से ब्रह्माण्ड (Universe) के कई रहस्य सुलझ सकते हैं.


डार्क मैटर नहीं इस पदार्थ की खोज
हालोसैट उस समान तरह के कणों की तलाश करता है जिससे दिखाई देने वाला विश्व बना होता है. इसे बार्योनिक पदार्थ कहते हैं. माना जाता है कि ब्रह्माण्ड के पैदा होने के समय से ही इसके बारे में पता नहीं चल सका है. हालोसैट इसी बार्योनिक पदार्थ की तलाश में ही मिल्की वे के सर्कमगैलेक्टिक मीडियम का अवलोकन कर रहा था. बार्योनिक पदार्थ डार्क मैटर से अलग होता है. डार्क मैटर दिखाई नहीं देता और केवल गुरूत्व से अंतरिक्रिया करता है.

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वैज्ञानिक अब तक केवल दो तिहाई बार्योनिक पदार्थ की ब्रह्माण्ड मौजूदगी का पता कर सके हैं. बचा हुआ पदार्थ सर्कमगैलेक्टिक माध्यम का सही तरह से अध्ययन करना चाहते हैं. और इसके लिए वे उसका सही आकार जानना चाहते हैं. उनके मुताबिक यह आकार जानना अकेले हालोसैट के बस की बात नहीं है क्योंकी वह चमकीली एक्स रे के पार के इलाके को नहीं देख पाएगा.
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