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पाकिस्तान का वो कौन सा हिस्सा है, जिसने फिर उठाई आजादी की मांग

News18Hindi
Updated: November 21, 2019, 7:54 PM IST
पाकिस्तान का वो कौन सा हिस्सा है, जिसने फिर उठाई आजादी की मांग
पाकिस्तान सरकार ने सिंधुदेश की मांग करने वाले लोगों पर देश, सरकार, राज्य संस्थानों के खिलाफ नारेबाजी, विद्रोह, आतंकवाद और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.

ऐसा पहली बार नहीं है जब कराची (Karachi) में सिंधुदेश (Sindh Desh) की मांग की गई है. सिंधियों के नेता जीएम सईद ने अलग देश की मांग को लेकर लंबे समय तक लड़ाई लड़ी थी.

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  • Last Updated: November 21, 2019, 7:54 PM IST
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बीते 18 नवंबर को पाकिस्तान (Pakistan) के कराची (Karachi) शहर में अलग सिंधुदेश (Sindh Desh) की मांग को लेकर हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान से अलग नए सिंधुदेश की मांग को दोहराया. ऐसा पहली बार नहीं है जब कराची में सिंधुदेश की मांग की गई है. सिंधियों के नेता जीएम (गुलाम मुर्तजा) सईद ने अलग देश की मांग को लेकर लंबे समय तक लड़ाई लड़ी थी.

कई लोगों पर केस दर्ज
पाकिस्तान सरकार ने सिंधुदेश की मांग करने वाले लोगों पर देश, सरकार, राज्य संस्थानों के खिलाफ नारेबाजी, विद्रोह, आतंकवाद और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इनमें सिंधी राष्ट्रवाद की आवाज उठाने वाली पार्टी जिये सिंध कौमी महाज के चेयरमैन और अन्य नेताओं शामिल हैं. पुलिस ने FIR लिखी है कि रैली में पार्टी चेयरमैन और अन्य नेताओं ने कार्यकर्ताओं को देश से बगावत के लिए उकसाया.

सिंधुदेश की आवाज बुलंद करने वाले नेता जीएम सईद.
सिंधुदेश की आवाज बुलंद करने वाले नेता जीएम सईद.


1972 से चल रही है मांग
बीते कई दशक से सिंधी लोग सिंधुदेश की मांग कर रहे हैं. इसी मांग को लेकर सिंधियों के नेता जीएम सईद ने बांग्लादेश की आजादी के बाद पाकिस्तान से अलग होने के लिए आंदोलन की शुरुआत की थी. उन्होंने सिंधी राष्ट्रवाद को धार दी. 1972 में ही सईद ने जिये सिंध तहरीक नाम की पार्टी बनाकर देश की सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था. सिंधी भाषा और पहचान के लिए शुरू किया गया ये आंदोलन बांग्ला आंदोलन से प्रेरित था. सईद ने इसे पंजाबियों और मोहाजिरों के अत्याचार के खिलाफ मुक्ति आंदोलन की तरह इस्तेमाल किया. उनके इस आंदोलन को विदेशों में रह रहे सिंधियों का समर्थन हासिल था जिसमें भारतीय सिंधी भी शामिल थे. सईद ने सिंधुदेश आंदोलन को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ किताबें भी लिखीं. 1995 में अपनी मृत्यु तक वो इस आंदोलन से जुड़े रहे.

बेनजीर की मौत के बाद फिर तेज हुआ आंदोलनसईद की मौत के बाद करीब एक दशक तक सिंध आंदोलन खामोश रहा. साल 2007 में पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर अली भुट्टो की मौत के बाद इस आंदोलन ने एकदम से तेजी पकड़ी. जिये सिंधु कौमी महाज (JSQM) और वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस जैसे संगठनों को लोगों का समर्थन मिलना शुरू हुआ.

साल 2012 में कराची में JSQM ने सिंधुदेश के समर्थन में एक बड़ी रैली निकाली थी. इस रैली में JSQM के नेता बशीर खान कुरैशी ने उर्दू भाषी लोगों से भी आंदोलन के लिए मदद मांगी थी.

बेनजरी भुट्टो
बेनजरी भुट्टो


सिंध में सक्रिय हैं कई पार्टियां
इस समय सिंध में सिंधुदेश की मांग को लेकर कई पार्टियां सक्रिय हैं. इनमें जिये सिंधु कौमी महाज सबसे प्रमुख है. दरअसल ये पार्टी जीएम सईद की मृत्यु के बाद बनी थी. उनके जीवित रहते सिंधु देश की मांग करने वाली कई पार्टियां थीं लेकिन उनकी मौत के बाद सभी पार्टियों JSQM में विलय कर लिया था.

इसके अलावा जिये सिंध मुत्ताहिदा महाज नाम की एक और पार्टी भी आंदोलन कर रही है. ये पार्टी पाकिस्तान के साथ किसी बातचीत की समर्थक नहीं है. इसके मुताबिक पाकिस्तान के साथ किसी भी स्वायत्ता की बात के बजाए सीधे स्वतंत्रता की मांग करनी चाहिए. इस पार्टी के नेता शफी मोहम्मद बरफत ने JSQM से अलग होकर साल 2000 में अपनी पार्टी बनाई थी. शफी को पाकिस्तान से देशनिकाला दे दिया गया है. वो जर्मनी में राजनीतिक शरण लेकर रह रहे हैं.

सिंधु की लड़ाई में छात्रों का भी बड़ा हिस्सा शामिल है. जिये सिंधु स्टूडेंट्स फेडरेशन छात्र संगठन भी सिंधुदेश की मांग कर रहा है. इसके अलावा सिंधु नेशनल मूवमेंट नाम की एक पार्टी भी आंदोलन चला रही है.
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First published: November 21, 2019, 7:41 PM IST
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