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पंडित नेहरू की वायरल तस्वीर और विक्रम साराभाई के बीच क्या है संबंध?

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल होती है.

इस तस्वीर के जरिये भारत के पहले प्रधानमंत्री (Jawahar Lal Nehru) पर खूब निशाने साधे जाते हैं. ऐसे तमाम प्रपंच और प्रोपेगैंडा को फैलाने वाले ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं कि उस तस्वीर में नेहरू के साथ जो लड़की है वो कौन है? ये हैं भारत के अंतरिक्ष इतिहास के बड़े नाम विक्रम साराभाई की पत्‍नी मृणालिनी साराभाई. देश के नाम कई उपलब्धियां दर्ज कराने वाले विक्रम साराभाई का 30 दिसंबर 1971 को उनका निधन हो गया था.

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    पंडित जवाहर लाल नेहरू (Pt. Jawahar Lal Nehru) की एक तस्वीर इंटरनेट पर बहुत शेयर होती है. इसमें वो एक लड़की के कंधे पर हाथ रखकर खड़े हैं. इस तस्वीर के जरिये भारत के पहले प्रधानमंत्री पर खूब निशाने साधे जाते हैं. ऐसे तमाम प्रपंच और प्रोपेगैंडा को फैलाने वाले ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं कि उस तस्वीर में नेहरू के साथ जो लड़की है वो कौन है? वो ये भी नहीं जानते हैं कि जिस महिला के कंधों पर चढ़कर वो नेहरू के चरित्रहनन में लगे हुए हैं, वो इस देश की तमाम उपलब्धियों की गवाह रही हैं.

    नेहरू के साथ तस्वीर में मृणालिनी साराभाई हैं. मशहूर नृत्यांगना और प्रोफेसर विक्रम अंबालाल साराभाई की पत्नी. प्रोफेसर विक्रम साराभाई आधुनिक भारत के नींव के पत्थरों में एक कहे जा सकते हैं. भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और इसरो को खड़ा करने में उनका सबसे बड़ा योगदान है. आईआईएम अहमदाबाद उन्हीं की देन है. इस तरह की तमाम चीज़ों, भारत के परमाणु कार्यक्रम के बीच भारत के लिए उनकी विरासत में हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम भी हैं. साराभाई ही वो जौहरी थे, जिन्होंने कलाम को न सिर्फ पहचाना बल्कि तराशकर इस देश के खजाने का अहम हिस्सा बनाया.

    भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम की रखी नींव
    विक्रम अंबालाल साराभाई भारत के अंतरिक्ष इतिहास के जनक कहे जा सकते हैं. एक तरह से उन्‍होंने भारत के अंतरिक्ष प्रोग्राम की नींव रखी. उन्‍होंने देश में 40 अंतरिक्ष और शोध से जुड़े संस्‍थानों को खोला. यही नहीं आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया. उनका जन्‍म गुजरात के अहमदाबाद में 12 अगस्‍त 1919 को हुआ था. देश के नाम कई उपलब्धियां दर्ज कराने के बाद 30 दिसंबर 1971 को उनका निधन हो गया.

    विक्रम साराभाई
    आज विक्रम साराभाई की पुण्‍यतिथि है.


    विक्रम साराभाई ने 86 वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे, जबकि 40 संस्थान खोले. साइंस और इंजीनियरिंग क्षेत्र में 1966 में भारत सरकार की ओर से पद्म भूषण से सम्मान हासिल करने वाले डॉ. विक्रम साराभाई के नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता. अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाने वाले विक्रम साराभाई ने वस्त्र, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य कई क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया.

    साराभाई के नाम पर तिरुवनंतपुरम में स्थापित थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉचिंग स्टेशन (टीईआरएलएस) और संबद्ध अंतरिक्ष संस्थाओं का नाम बदलकर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र रख दिया गया. यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक प्रमुख अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र के रूप में उभरा.

    मृणालिनी और विक्रम साराभाई के विवाह की तस्वीर
    मृणालिनी और विक्रम साराभाई के विवाह की तस्वीर.


    काम करने का तरीका था बेहद अलग
    साराभाई को एक स्‍वप्‍न दृष्‍टा कहा जाता है. उनके कार्य करने का तरीका बेहद अलग था. वे हर क्षेत्र के भीतर सृजनात्‍मक और संगठानात्‍मक तरीके से उतरते थे. यही वजह है कि उन्‍होंने अपने विचारों को संस्थाओं में परिवर्तित किया. सृजनशील वैज्ञानिक, सफल और दूरदर्शी उद्योगपति, शिक्षाविद, कला पारखी, अग्रणी प्रबंध प्रशिक्षक और सबसे अहम महान संस्था निर्माता साराभाई के व्यक्तित्व में कई विशेषताएं थीं.

    उनके जीवन का सबसे अहम काम था देश के एटॉमिक एनर्जी के काम को नई दिशा देना. दरअसल, डॉ. होमी जहांगीर भाभा की 1966 में मृत्यु के बाद डॉ. साराभाई ने जब परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष का कार्यभार संभाला, तो उन्‍होंने इसे एक नई दिशा दी. इसे समाज के बीच व्‍यवहारिक स्‍तर पर ले आए. उन्‍होंने विज्ञान प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए संचार, मौसम संबंधी भविष्यवाणी और प्राकृतिक संसाधनों के लिए शोध का शानदार काम किया है.

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