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कोरोना की ये दवा पहले ही ह्यूमन ट्रायल में हुई फेल, WHO ने हटाई रिपोर्ट

कोरोना की ये दवा पहले ही ह्यूमन ट्रायल में हुई फेल, WHO ने हटाई रिपोर्ट

कोरोना के इलाज की दिशा में हो रहा पहला ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल असफल रहा है

कोरोना के इलाज की दिशा में हो रहा पहला ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल असफल रहा है

कोरोना वायरस (coronavirus) के इलाज की दिशा में हो रहा पहला ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल (human clinical trial) असफल रहा है. एंटी वायरल ड्रग रेमडेसिवियर (remdesivir) पर चीन (China) में हो रहे इस प्रयोग के रिजल्ट गलती से World Health Organization (WHO) की वेबसाइट पर आ गए लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया.

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    पूरी दुनिया में 28 लाख 30 हजार से ज्यादा की आबादी कोरोना संक्रमित (corona infected) हो चुकी है, जबकि 1 लाख 90 हजार से ज्यादा जानें गई हैं. ऐसे में इस रहस्यमयी बीमारी के लिए वैक्सीन (vaccine) या फिर दवा (medicine) की खोज जोरों पर है. कई देशों में इसके ट्रायल (trial) भी हो रहे हैं. हालांकि चीन में चल रही ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल (human clinical trial) के नतीजे आ चुके हैं, जो नाउम्मीद करने वाले हैं. एंटी वायरल दवा रेमडेसिवियर (remdesivir) पर बहुत से देशों की उम्मीद टिकी हुई थी लेकिन पहले ही ट्रायल में ये बुरी तरह से फेल हो गई.

    ये रिपोर्ट असावधानी से 23 अप्रैल को WHO की वेबसाइट पर क्लिनिकल ट्रायल डेटाबेस में भी आ गई थी, जिसे आनन-फानन हटा लिया गया. हालांकि तब तक इसका स्क्रीनशॉट लिया जा चुका था. फाइनेंशियल टाइम्स में आई खबर के अनुसार चीन में हो रहे इस ट्रायल में 237 कोरोना मरीजों को शामिल किया गया. इसमें से 158 मरीजों को रेमडेसिवियर दवा दी गई, जबकि 79 को प्लेसीबो (placebo) पर रखा गया.

    चीन में हो रहे इस ट्रायल में 237 कोरोना मरीजों को शामिल किया गया


    प्लेसीबो असल में एक तरह का इफेक्ट है, जिसमें रियल ट्रीटमेंट की जगह मरीज को फेक ट्रीटमेंट देते हैं. इसमें मरीज को पता नहीं होता कि उसे इलाज में मिल रही दवाएं नकली हैं जो सेहत पर किसी भी तरह का अच्छा या बुरा असर नहीं डालती हैं. सभी को यही बताया जाता है कि उन्हें एक जैसी दवा दी जा रही है. कोरोना के ट्रायल में 158 मरीज, जिनमें संक्रमण गंभीर नहीं था, उन्हें चॉक पाउडर जैसी दवा दी गई, जिसमें कुछ भी नहीं था. एक महीने तक इलाज चला. इस दौरान 18 मरीजों पर साइड इफेक्ट के कारण रेमडेसिवियर दवा बंद करनी पड़ी. महीनेभर बाद इसके नतीजे डरानेवाले दिखे. रेमडेसिवियर दिए जा रहे 13.9 प्रतिशत मरीजों की मौत हो गई, जबकि दूसरे समूह, जिसे कोई दवा नहीं दी गई थी, उसमें मौत की दर 12.8 थी.

    यह ट्रायल एक अमेरिकी बायोटेक कंपनी गिलिएड साइंसेज (Gilead Sciences) ने किया था जिसके नतीजे WHO की साइट पर विस्तार में आ गए. थोड़ी ही देर बाद इस रिपोर्ट को हटा दिया गया और संगठन ने कहा कि ये रिपोर्ट फाइनल नहीं थी और गलती से साइट पर आ गई. इधर ट्रायल करने वाली कंपनी का कहना है कि ट्रायल के नतीजे अंतिम नतीजे नहीं हैं क्योंकि ट्रायल में ज्यादा लोग शामिल नहीं हुए थे. इतने छोटे ग्रुप पर हुए ट्रायल से कुछ भी नतीजा नहीं निकाला जा सकता.

    इस दौरान 18 मरीजों पर साइड इफेक्ट के कारण रेमडेसिवियर दवा बंद करनी पड़ी


    कंपनी के प्रतिनिधि ने एएफपी से बातचीत में कहा कि जैसे-जैसे रजिस्ट्रेशन होगा, दवा का ट्रायल चलता रहेगा. चीन में हो रहे ट्रायल में शामिल एक और वैज्ञानिक स्टीफन इवांस, जो कि London School of Hygiene & Tropical Medicine के प्रोफेसर हैं, मानते हैं कि फिलहाल दवा के बारे में कुछ भी पक्का नहीं कहा जा सकता क्योंकि स्टडी ग्रुप बुरा या अच्छा कहने के लिहाज से काफी छोटा था.

    क्या है रेमडेसिवियर
    ये एक एंटीवायरल दवा है, जो साल 2009 में सामने आई थी. ये उन दवाओं की श्रेणी में आती है जो वायरस पर सीधा हमला करती हैं. वहीं बहुत सी दवाएं वो होती हैं, जो सीधे हमले की बजाए इम्यून सिस्टम को हमले के लिए तैयार करती हैं. ये वायरस वायरस के भीतर घुस जाती है और इसकी वजह से उनका जीनोम सीक्वेंस गड़बड़ा जाता है, जिससे वायरस खुद को बढ़ा नहीं पाते हैं.

    इबोला के कहर के दौरान भी मरीजों को आराम देने के लिए इस दवा का उपयोग हुआ था, हालांकि तब भी इसका ट्रायल सफल नहीं हुआ था. फिलहाल कोरोना वायरस पर इसकी कुछ जांचें कहती हैं कि ये दवा वायरस की बढ़त को रोक देती है लेकिन तभी जब कोरोना की शुरुआत में इसका इस्तेमाल किया जाए. जिन मरीजों में संक्रमण गंभीर स्तर पर पहुंच गया है, उनपर ये खास असर नहीं करती है. वैसे इसी दवा पर बड़े स्तरों पर भी कई ट्रायल अलग-अलग देशों में हो रहे हैं, जिनके नतीजे मई या जून में आ सकते हैं. वहीं गिलिएड साइंसेज का कहना है कि बड़े ग्रुप्स में और ट्रायल के तीनों चरणों में सफल होने पर दवा के 10 लाख डोज बनाकर इच्छुक देशों को दिए जा सकते हैं.

    जिन मरीजों में संक्रमण गंभीर स्तर पर पहुंच गया है, उनपर ये खास असर नहीं करती है


    US National Institutes for Health भी इस दवा को लेकर बंदरों पर प्रयोग कर रहा है, जिसके शुरुआती नतीजे आशाजनक दिखे.

    इससे पहले एंटी-मलेरिया ड्रग हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (hydroxychloroquine), जिसे कोरोना के इलाज (treatment of coronavirus) में सबसे कारगर माना जा रहा था, नई स्टडी के अनुसार कोरोना के मरीजों पर उसके भी खतरनाक दुष्परिणाम दिखे हैं. इसके कारण कई मरीजों में कार्डियो वस्कुलर (दिल की बीमारी) डिसीज दिखी, जिन्हें पहले कभी हार्ट संबंधी कोई समस्या नहीं रही थी.

    बता दें कि कुछ दिनों पहले Indian Council of Medical Research (ICMR) ने भी रेमडेसिविर दवा के इस्तेमाल के बारे में विचार करने की बात की थी. इस बारे में ICMR के प्रमुख वैज्ञानिक रमन गंगाखेडकर ने कहा था कि दवा के इस्तेमाल को लेकर WHO के नतीजों का इंतजार किया जाएगा. साथ ही घरेलू स्तर पर भी इस दवा के उत्पादन को देखना होगा.

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    Tags: Corona, Corona infection, Corona positive, Corona Suspect, Coronavirus, Coronavirus in India

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