कश्मीर का वो मंदिर, जहां से गांधी, नेहरू, गफ्फार खान ने दिए पैगाम

श्रीनगर स्थित शीतलनाथ मंदिर 31 साल बाद खोला गया.

बसंत पंचमी (Basant Panchami) के मौके पर 31 साल बाद श्रीनगर स्थित मंदिर (Srinagar Temple) को खोला गया. मंदिर से जुड़े लोगों ने कहा कि स्थानीय मुस्लिमों के सहयोग से ही यह संभव हुआ. धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से यह मंदिर कितना अहम रहा है, जानिए.

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    कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में प्रसिद्ध डल झील (Dal Lake) से महज़ 1 किलोमीटर पर स्थित शीतलनाथ मंदिर (Sheetalnath Temple) सदियों से कश्मीर में भैरव पीठ के तौर पर प्रसिद्ध रहा है. इस मंदिर को शीतलेश्वर भैरव की पवित्र स्थली माना जाता है. इतिहास देखें तो पुराने समय में इसे आह्लादमठ के नाम से भी प्रसिद्धि हासिल थी, बाद में इसका नाम गुंड अहल्मर भी चल पड़ा था. भारत की आज़ादी (Freedom Struggle of India) के समय यह मंदिर ऐतिहासिक रहा, तो 1990 में इसे बंद किए जाने तक की नौबत आई.

    शीतलेश्वरम शीतलनाथ वन्दिहम भैरवम् सदा... दो हज़ार साल पुराने ऐतिहासिक दस्तावेज़ नीलमथ पुराण में इस सूक्त में इस पवित्र स्थान का उल्लेख मिलता है. सम्मानित इतिहासकार और धर्म के विद्वान डॉ. टीएन गंजू के मुताबिक तंत्र साहित्य में जो आधिकारिक ग्रंथ आनंद तंत्र मिलता है, उसमें कहा गया कि कश्मीर के 13 भैरवों में से सबसे ज़्यादा पवित्र व प्रतिष्ठित स्थल के रूप में शीतलनाथ की ख्याति रही.

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    इनके अलावा, शीतलेश्वर महात्म्य नामक ग्रंथ के आधार पर इस मंदिर की ऐतिहासिकता बताई जाती है. 15वीं सदी में कश्मीर के सुल्तान ज़ेनुलाबिदीन के समय में राजकीय इतिहासकार रहे जोनाराजा ने हेतकेश्वर और शीतलेश्वर का उल्लेख किया है, जिससे स्पष्ट होता है कि 600 साल पहले भी यह मंदिर महत्वपूर्ण था.

    कैसे नष्ट हुआ मंदिर?
    इतिहासकार आरके परिमू ने लिखा कि अफगान शासन के समय में इस प्राचीन मंदिर को नष्ट करने की कवायदें हुईं. महत्वपूर्ण यह है कि 1990 के आसपास कश्मीर में आतंकवाद का साया फैला, तब यहां हिंदुओं को संकट में डालने के लिए मंदिर से जुड़ी हवन शाला को भी नष्ट किया गया. हालांकि बताया जाता है कि स्थानीय मुस्लिम हमेशा इस मंदिर के सहयोगी रहे. मंदिर के केयरटेकिंग कामों में भी स्थानीय मुस्लिम रहे.

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    शीतलनाथ मंदिर के पोर्टल पर मंदिर का यह मौजूदा चित्र मिलता है.


    कहा जाता है कि सदियों से यहां सेवा करने वाली महिलाएं हर दिन सूर्योदय से पहले तांबे के कलश से पानी भरकर भगवान शिव की गागर में पानी भरती रही थीं. सैकड़ों सालों में कभी ऐसा नहीं हुआ था कि यह काम रुका हो, लेकिन 1990 में आतंकवादी फिज़ा ऐसी बनी कि कश्मीरी पंडितों को खदेड़ा गया, तब यह सिलसिला टूटा और एक ऐतिहासिक मंदिर अनिश्चितकाल के लिए बंद करना पड़ा.

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    मंदिर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
    भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के पहले, दौरान और उसके बाद भी देश के महान नेताओं में शुमार महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे नाम इस मंदिर से जुड़ते रहे. इन सभी ने शीतलनाथ मंदिर स्थित पवित्र चबूतरे से भाषण दिए. एक लंबा समय रहा कि ऐतिहासिक महत्व वाला मंदिर कश्मीरी लोगों के लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी का मंच बना.

    इस मंदिर की ख्याति के साथ ही मान्यता इतनी रही कि लोगों ने इसके लिए जान देने में भी परहेज़ नहीं किया. गंजू बताते हैं कि जब 1960 के दशक में कुख्यात परमिशोरी केस के समय जब संप्रदाय की आन पर बात आ गई थी, तो राज्य सरकार के खिलाफ लोग खड़े हुए थे और इस मंदिर के लिए सात लोगों ने शहादत दी थी, जिनमें से कुछ की समाधियां आज भी मंदिर परिसर में हैं.

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    क्या है मंदिर का भूगोल और भविष्य?
    शीतलनाथ के पूर्व में स्थित पहाड़ी पर प्रसिद्ध शंकराचार्य मंदिर है, ​जहां महर्षि अरबिंदो को 1903 में प्रेरणा मिलने की बात कही जाती है. इसके दक्षिण में सिर्फ आधे किलोमीटर पर श्रीनगर का केंद्र लाल चौक है, जहां 1948 में नेहरू ने तिरंगा फहराया था. इस मंदिर से उत्तर की तरफ आप एक किलोमीटर जाएंगे तो श्रीनगर की पहचान डल लेक मिलेगी, जिसे संस्कृत में महासरित के नाम से दर्ज किया गया. और पश्चिम में कुछ ही दूर लोकोक्ति बन चुकी नदी झेलम की धारा है.

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    शीतलनाथ मंदिर के कायाकल्प को इस तरह काल्पनिक चित्र में मंदिर के पोर्टल पर दर्शाया गया है.


    कहते हैं कि 10वीं सदी में आचार्य अभिनवगुप्त के समय में यहां भारत के सबसे ज़्यादा विद्वान, आध्यात्मिक और शिक्षित लोग थे. इसी इतिहास को दोहराने और मंदिर व इसके परिसर को जो भी नुकसान सदियों में हुआ है, उसे पाटने के मकसद से एक लक्ष्य मंदिर के पुनरुद्धार से जुड़ी एक संस्था ने तैयार किया है, जिसके मुताबिक शीतलनाथ परिसर में सरकारी स्कूल को रिसर्च सेंटर में तब्दील करने का प्रस्ताव है. मंदिर की इमारत से लेकर पूरे परिसर का कायाकल्प कर इसे दुनिया के पर्यटन नक्शे पर लाने का सपना भी देखा जा रहा है.

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