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हर 5 में से एक सरीसृप पर है विलुप्त होने का जोखिम

हर 5 में से एक सरीसृप पर है विलुप्त होने का जोखिम

सरीसृप (Reptiles) की कई प्रजातियां इस समय विलुप्त होने के खतरे में हैं जिसकी वजह मानवीय क्रियाएं ज्यादा हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

सरीसृप (Reptiles) की कई प्रजातियां इस समय विलुप्त होने के खतरे में हैं जिसकी वजह मानवीय क्रियाएं ज्यादा हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का एक बड़ा असर जैविविधता (Biodiversity) की भारी कमी होना भी है नए अध्ययन में शोधकर्ताओं सरीसृपों पर गहराई और विस्तार से विश्लेषण में पाया है कि सरीसृप प्रजातियों (Reptile Species) तेजी से विलुप्त होने की स्थिति में आ रहे हैं. अध्ययन के अनुसार हर पांच में से एक सरीसृप प्रजाति विलुप्तप्राय हो गई है. इसमें मगरमच्छ और कछुए की भी बहुत सी प्रजातियां शामिल हैं.

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    पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण जैवविविधता (Biodiversity) में भी बहुत व्यापक और गहरे बदलाव देखने के मिल रहे हैं. इसका सीधा असर विभिन्न जानवरों की प्रजातियों के अस्तित्व पर पड़ा है और घटती जैवविविधता के कराण दुनिया में विलुप्त होने वाली या विलुप्त होने की कगार पर पहुंचने वाली प्रजातियों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है. इसमें सरीसृत जीव भी शामिल है. नए अध्ययन में पाया गया है कि पांच में एक सरीसृप प्रजाति (Reptile speiceis) पर विलुप्त होने का खतरा है.

    कछुए और मगरमच्छ ज्यादा खतरे में
    दुनिया के इन ठंडे खून के जीवों के पहले सबसे बड़े  वैश्विक आंकलन के मुताबिक जिन प्रजातियों में विलुप्त होने का खतरा बहुत बढ़ गया है उनमें कछुए और मगरमच्छ की आधी से ज्यादा प्रजातियां हैं. दूसरे जीवों पर मंडरा रहे खतरों का भी दस्तावेजीकरण किया गया है. 40 प्रतिशत सेअधिक उभयचरों, 25 प्रतिशत स्तनपायी जीवों और 13 प्रतिशत पक्षी प्रजातियों विलुप्त होने का खतरा झेल रही हैं.

    हजारों सरीसृप प्रजातियों का आंकलन
    अभी तक शोधकर्ताओं ने खास तौर से सरीसृपों पर इस संकट से संबंधित इतना विस्तारित और व्यापक परिदृश्य ने बनाया था. नेचर जर्नल में प्रकाशित इस नए वैश्विक आंकलन में शोधकर्ताओं ने 10196 सरीसृप प्रजातियों का आंकलन कर इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (IUCN) की विलुप्तप्राय प्रजातियों की लाल सूची के पैमानों का हिसाब से मूल्यांकन किया.

    कितनी प्रजातियों पर खतरा
    शोधकर्ताओं ने पाया कि उन्होंने कम से कम 1820 यानि 21 प्रतिशत प्रजातियों को असुरक्षित, विलुप्तप्राय और गंभीर रूप से विलुप्तप्राय हैं. इस अध्ययन के सहलेखक नील कॉक्स ने बताया कि यह केवल खतरे का सामाना करने वाली ज्यादा संख्या वाली प्रजातियां हैं. अब जब हम जानते हैंकि हर सरीसृप प्रजाति पर खतरा है, वैश्विक समुदाय को इस दिशा में कदम उठाने चाहिए.

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    मगरमच्छ (Crocodile) की आधी प्रजातियां भी विलुप्त होने का खतरा झेल रही हैं. (फाइल फोटो)

    मगरमच्छ और कछुओं की प्रजातियां
    इस सभी सरीसृप प्रजातियों में मगरमच्छ और कछुओं की प्रजातियां सबसे ज्यादा जोखिम में हैं. इनमें क्रमशः 50 और 50 प्रतिशत प्रजातियों को सबसे ज्यादा खतरा है. कॉक्स का कहना है कि ऐसा शोषण और उत्पीड़न की वजह से हुआ है. जहां मगरमच्छों को उनके मांस के लिए और इंसानी बस्तियों से दूर करने के लिए मारा जाता है. कछुए को व्यापार और परंपरागत दवाओं के लिए मारा जाता है.

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    सांप भी हैं खतरे में
    सरीसृपों में सबसे ज्यादा खतरा सांपों को है. इसमें किंग कोबरा जिसे दुनिया का सबसे जहरीला सांप माना जाता है. दक्षिण एशिया में प्रमुख रूस से पाया जाने वाला यह सांप पांच फुट तक लंबा हो सकता है. कॉक्स ने बताया है कि कोबरा सांप भी विलुप्त होने की कगार पर है. लेकिन यह शर्म का विषय है कि आज यह इतना कम हो गया है कि उस पर विलुप्त होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है.

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    दुनिया में खास तौर दक्षिण एशिया में किंग कोबरा सापों (Snakes) के विलुप्त होने का ज्यादा खतरा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    क्यों है खतरा
    शोधकर्ताओं ने पाया कि शुष्क आवास जैसे रेगिस्तान, घास के मौदान और सवाना के मैदान आदि तक सीमित रह गए सरीसृप कम खतरे में हैं जबकि जंगल में रहने वाले सरीसृपों को ज्यादा खतरा है. कृषि, आक्रमणकारी प्रजाति, शहरी विकास जैसी गतिविधियों के कारण सरीसृपों को ज्यादा खतरों का सामाना करना पड़ा है.

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    वहीं जलवायु परिवर्तन दस प्रतिशतसे ज्यादा प्रजातियों के लिए सीधे तौर पर खतरा बना हुआ है, लेकिन यदि बढ़ते समुद्र जलस्तर जैसे दूसरे कारकों को शामिल करने यह संख्या बहुत अधिका हो सकती है. शोधकर्ताओं को इस बात से हैरानी भी हुई है कि स्तनपायी जीवों, पक्षियों और उभयचरों के संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों का फायदा सरीसृपों को भी मिला है. उन्हें उम्मीद है कि उनके विश्लेषण से सरीसृपों को बचाने में मदद मिल सकेगी.

    Tags: Climate Change, Environment, Research, Science

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