वैज्ञानिकों ने बनाया खास डिवाइस, जानिए कोरोना के खिलाफ होगा कितना मददगार

वैज्ञानिकों ने बनाया खास डिवाइस, जानिए कोरोना के खिलाफ होगा कितना मददगार
कोरोना वायरस के इलाज के शोध में नई तकनीक मदद कर सकती है.

शोधकर्ताओं ने ऐसा उपकरण बनाया है जो बैक्टीरिया (Bacteria) और वायरस (Virus) जैसे महीन कणों को अलग करने में सक्षम है. इससे बीमारियों के इलाज ढूंढने में वैज्ञानिकों को काफी मदद मिलेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2020, 7:07 PM IST
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नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona Virus) का इलाज अभी तक ढूंढा नहीं जा सका है. वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन और दवा पर अभी कई तरह के ट्रायल कर रहे हैं. इस सिलसिले में कई शोध ऐसे भी हैं जो इलाज ढूंढ रहे शोधकर्ताओं के लिए मददगार हो सकते हैं.  इंजीनियरिंग शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक सूक्ष्य लैब यंत्र (Miniature lab device) बनाया है जो दवा बना रहे वैज्ञानिकों की मदद कर सकता है.

क्या कर सकता है ये डिवाइस
इस नई तकनीक से दवा बना रहे शोधकर्ता बैक्टीरिया या वायरस के दवा प्रतिरोधी तंतुओं को अलग कर सकते हैं. ऐसे सूक्ष्म कणों को पहचान कर अलग कर पाना अब तक कठिन था. ये महीन कण इबोला और कोरोना वायरस के तंतु भी हो सकते हैं.

चिप में ही होगा लैब वातावरण



साइंस डेली के लेख के मुताबिक रोचेस्टर इंस्टीट्यूट टेक्नॉलॉजी के शोधकर्ता की डू और ब्लांसा लैपिजिको एंसिनास ने एक अंतरराष्ट्रीय टीम के साथ मिलकर एक नया सिस्टम  डिजाइन किया है. यह एक चिप पर लैब वाला एक माइक्रोफ्लूडिक डिवाइस (Microfludic device) है.



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यह तकनीक वायरस को जल्दी अगल कर उस पर शोध में गति ला सकती है. . (प्रतिनिधि फोटो)


क्यों अहम था यह शोध
इस डिवाइस की अहमियत बताते हुए डू ने कहा, “दवा प्रतिरोधक बैक्टीरिया संक्रमण दुनिया में हर साल हजारों लोगों को मार रहे हैं. यह संख्या बढ़ती ही जा रही है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक साल 2050 में यह संख्या एक करोड़ तक पहुंच सकती है.”

खतरनाक वायरस के खिलाफ भी काम आ सकता है
शोधकर्ताओं ने बताया कि इन बीमारियों को बेहतर तरीके से पहचान करने, समझने और इनका इलाज करना बहुत जरूरी है. इसके लिए नमूनों का शुद्ध होना भी अहम है जिसके लिए उन्होंने काम किया है.  इस डिवाइस से वायरस को अलग किया जा सकेगा जो कोरोना वायरस और इबोला जैसे वायरस के खिलाफ कारगर हो सकता है. टीम ने खास तौर पर बैक्टीरिया इन्फेक्शन पर काम किया जो शरीर के द्रव्यों में होते हैं. इसमें सबसे बड़ी समस्या यह थी कि कैसे उच्च संख्या वाले पैथोजन्स को बेहतर तरीके से अलग-थलग किया जा सके.

अब तक का सबसे अच्छा डिवाइस है यह
यह डिवाइस वास्तव में एक खास तरह का लैब वातावरण देता है जो फील्ड अस्पतालों या क्लीनिक्स में उपयोग में लाया जा सकेगा. यह अभी बाजार में उपलब्ध फिल्टरों के मुकाबले तेजी से नमूने एकत्र करने और उनका विश्लेषण कर सकेगा. इसके चौड़े और उथले चैनल्स महीन बैक्टीरिया अणुओं को  चुबकीय कणों तक खींच लेंगे.

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यह शोध अभी केवल बैक्टीरिया के मुताबिक किया था, लेकिन इसके वायरस पर भी प्रभावी होने की उम्मीद है.


सफल रही तकनीक
इसमें नैनो डिवास पर गहरे चैनल, बैक्टीरिया वाले द्रव्य की बहने की ज्यादा गति और चैनल के पास गनेटिक टुकड़े तीनों मिलकर नमूने ले ने की प्रक्रिया को तेज और प्रभावी कर देगें. इस तकनीक से शोधकर्ता  शारिरिक द्रव्य से बैक्टीरिया को अलग करने में सफल रहे और उन्हें विश्लेषण करने के लिए बड़ी संख्या में बैक्टीरिया भी मिले.

और खासियतें भी हैं इस डिवाइस में
इस डिवाइस की एक खास बात यह भी है कि यह एक ही समय में कई नमूनों का परीक्षण कर सकता है. इसके अलावा यह किसी तालाब से भी नमूने लेने में सक्षम है और पानी की एक बूंद से भी परीक्षण कर सकता है. यह बैक्टीरिया को दूसरे रसायनों में भी विश्लेषण के लिए छोड़ सकता है. यह डिवाइस जीवकणों के अलग करने के लिए विद्युत का प्रयोग करता है.

कैसे मदद करेगा कोरोना संकट में यह डिवाइस
शोधकर्ताओं का उद्देश्य केवल बैक्टीरिया और मानवीय प्लाज्मा को अलग करना ही नहीं है. उन्हें उम्मीद है कि यह तकनीक अन्य संक्रमणों पर भी कारगर हो सकती है. वायरसों के नमूनों के परीक्षणों में जांच की गति तेज होगी जिससे कोरोना वायरस के इलाज या वैक्सीन की खोज की प्रक्रिया में गति आ सकती है.

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