CO2 को एथिलीन में बदलने का मिला प्रभावी तरीका, जानिए कितना फायदेमंद है ये

कार्बन डाइऑक्साइड(CO2) जैसी ग्रीनहाउस गैस (Greenhouse gas) का इस तरह औद्योगिक स्तर पर एथिलीन (Ethylene) में बदलाव पहली संभव बनाया गया है.(तस्वीर: Pixabay)
कार्बन डाइऑक्साइड(CO2) जैसी ग्रीनहाउस गैस (Greenhouse gas) का इस तरह औद्योगिक स्तर पर एथिलीन (Ethylene) में बदलाव पहली संभव बनाया गया है.(तस्वीर: Pixabay)

कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) जैसी ग्रीन हाउस गैस (Green house gas) को एथिलीन (Ethylene) जैसे पदार्थ का औद्यौगिक उत्पादन के स्तर पर बदलना शोधकर्ताओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 18, 2020, 4:59 PM IST
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एथिलीन (Ethylene) एक बहुत ही अहम रसायन पदार्थ (Chemical material) है. इसका उपयोग प्लास्टिक के निर्माण, घुलाने वाला पदार्थ, कॉस्मैटिक्स और अन्य की अहम उत्पादों के निर्माण में होता है. इतनी विविध उपयोगिता (Utility) के होने का कारण एथिलीन एक बहुत कीमती (valuable) पदार्थ हो गया है. वहीं दूसरी तरफ पूरी दुनिया कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की बढ़ती मात्रा से परेशान है. अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रभावी तरीका खोजा है जिससे वे कार्बन डाइऑक्साइड को एथिलीन में बदल (Convert) सकते हैं.

तांबे के तारों का खास उपयोग
कैलटैक और UCLA सैमुली स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के शोधकर्ताओं की एक टीम ने अपनी इस विश्वस्नीय तकनीक का प्रदर्शन किया  जिससे कार्बन डाइऑक्साइड कारगरता से एथिलीन में बदलती है. इस प्रयोग में वैज्ञानोकों ने नैनोस्केल के तांबे के तारों (Copper Wires) का उपयोग किया जिनकी खास आकार की सतह होती है.

आकार की रही भूमिका
तांबे के तार इस एक रासायनिक प्रतिक्रिया में उत्प्रेरक की तरह काम कर पाए जिसमें ग्रीन हाउस गैसें तो कम निकलती हैं, लेकिन साथ ही उससे एथिलीन पैदा होता है.  इस प्रतिक्रिया की कम्प्यूटर गणनाओं ने दर्शाया कि खास आकार का उत्प्रेरक हाइड्रोजन या मीथेन की जगह एथिलीन के उत्पादन करता है.



इन चुनौतियों  के लिए समाधान
नेचर कैटालिस्ट में प्रकाशित इस विस्तृत अध्ययन के सह पत्रव्यवहारी लेखक और UCLA में मटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग के प्रोफेसर यू हुआंग ने कहा, “हमारा जीवाश्म ईंधन खत्म होने की कगार पर है, इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन भी कम चुनौतियां नहीं दे रहे हैं.”

Ethylene, Plastic
एथिलीन (Ethylene) का उपयोग प्लास्टिक (Plastic) के निर्माण में भारी मात्रा में किया जाता है. (तस्वीर: Pixabay)


जीवाश्मों पर निर्भरता होगी खत्म
प्रोफेसर हुआंग ने कहा, “ऐसा पदार्थ जो कारगर तरीके से ग्रीनहाउस गैसों को एक मूल्य बढ़ाने वाली ईंधन और रासायनिक फीडस्टॉक में बदल दे, ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. यह हमारी जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को भी खत्म करेगा. यह एकीकृत प्रयोग और सैंद्धांतिक विश्लेषण कार्बनडाइऑक्साइड के उपयोग के लिए एक संधारणीय राह दिखाता है.

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क्या है एथिलीन की दुनिया में भूमिका
आज एथिलीन का वैश्विक उत्पादन 158 मिलियन टन है. इसमें से ज्यादातर का उपोयग पॉलीथीन के उत्पादन में काम आता है जिसे प्लास्टिक पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है.  एथिलीन प्राकृतिक गैस जैसे हाइड्रोकार्बन से बनाई जाती है.

पुराना विचार है कॉपर का उपयोग
इस अध्ययन के सह पत्र व्यवहारी लेखक विलियम ए गोडार्ड III और कैलेटक में केम्स्ट्री, मटेरियल साइंस एंड एप्लाइड फिजिक्स के प्रोफेसर चार्ल्स और मैरी फेर्केल का कहना है कि इस प्रतिक्रिया को कैटेलाइज करने कॉपर का उपयोग करने का विचार तो बहुत पुराना था, लेकिन  इसमें अहम बात इस प्रतिक्रिया की दर को इतनी गति प्रदान करना था जिससे औद्योगिक उत्पादन संभव हो सके. उनका कहना है कि यह अध्ययन एक ऐसे ठोस मार्ग को दिखाता जिसमें एथिलीन उत्पादन को कार्बन डाइऑक्साइड का उपोयग कर ग्रीन इंडस्ट्री में बदलने की क्षमता है.

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इस तकनीक से वायु प्रदूषण (Air Pollution) को कम करने में बहुत मदद मिल सकती है. (फोटो: AP)


इससे पहले क्या हुआ था
इससे पहले कॉपर का उपयोग कर कार्बन डाइऑक्साइड को एथिलीन में बदलने का दो बार प्रयास किया. पहली बार इससे हायड्रोजन और मीथेन का उत्पादन हुआ जो दोनों ही औद्योगिक उत्पादन के लिए काम के नहीं है. दूसरे प्रयासों में एथिलीन का उत्पादन तो हुआ लेकिन वह लंबा नहीं टिका जिसमें इसकी कारगरता सही नहीं रह सकी.

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इन दो बाधों को पार करने के लिए शोधकर्ताओं ने अपना ध्यान कॉपर नैनोवायर के डिजाइन पर लगाया. उन्होंने कॉपर नौनोवायर को आणविक स्तर पर एक सीढ़ीनुमा आकार दिया. फिर भी इसमें खास बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया के दौरान और उसके बाद  कॉपर की सतह बिलकुल वैसी पाई गईं.  इससे इसका टिकाऊपन जाहिर होता है.
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