हवा से भी फैल सकता है संक्रमण! वुहान के दो अस्‍पतालों की हवा में मिला कोरोना वायरस

हवा से भी फैल सकता है संक्रमण! वुहान के दो अस्‍पतालों की हवा में मिला कोरोना वायरस
चीन के वैज्ञानिकों ने वुहान के दो अस्‍पतालों और कई सार्वजनिक जगहों की हवा का सैंपल इकट्ठा किया है.

शोधकर्ताओं को चीन के वुहान शहर (Wuhan) के दो अस्‍पतालों की हवा से एक इंच के 10,000 वें हिस्‍से के बराबर छोटे कोरोना वायरस के आरएनए मिले हैं. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ये हवा के जरिये संक्रमण (Airborne Transmission) फैलाने के लिए काफी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 29, 2020, 7:48 PM IST
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कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर दुनियाभर में शोध जारी हैं. चूंकि ये वायरस चीन (China) के वुहान से फैलना शुरू हुआ था, इसलिए चीन के वैज्ञानिक लैब के साथ ही इस शहर के वातावरण में भी शोध कर रहे हैं. इसी क्रम में उन्‍हें वुहान (Wuhan) के दो अस्‍पतालों की हवा में मिले ड्रॉपलेट (Airborne Droplets) में एक इंच के 10,000 वें हिस्‍से के बराबर छोटे कोरोना वायरस के आरएनए (RNA) मिले हैं.

इस तरह का शोध पहले भी लैब में किया जा चुका है, लेकिन सामान्‍य वातावरण में कोरोना वायरस का हवा में मिलना अच्‍छे संकेत नहीं माना जा रहा है. हालांकि, अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं हो पाया है कि अस्‍पतालों की हवा से जुटाए सैंपल्‍स में मौजूद वायरस संक्रमण फैला सकता है या नहीं. लेकिन, शोधकर्ताओं का मानना कि इतनी छोटी ड्रॉपलेट बात करते या सांस लेते समय श्‍वसन तंत्र में आसानी से पहुंच सकती है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये हवा के जरिये संक्रमण (Airborne Transmission) फैलना के लिए काफी है.

वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गेनाइजेशन अब भी अपनी बात पर अडिग
वर्जीनिया टेक में सिविल एंड एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर लिंसी मैर का कहना है कि हवा में मौजूद ये वायरस अगले 2 घंटे तक एक से दूसरी जगह फैल सकता है. इसका सीधा मतलब है कि इसमें हवा के जरिये संक्रमण फैलाने की पूरी क्षमता है. उनके अलावा कई अन्‍य वैज्ञानिकों का भी मानना है, 'इन साक्ष्‍यों के आधार पर इस बात को मानने के ठोस कारण हैं कि कोरोना वायरस एयरोसोल (Aerosol) के जरिये भी फैल रहा है.'
चीन के वैज्ञानिकों को अस्‍पताल की हवा के सैंपल्‍स में कोरोना वायरस का आरएनए मिला है (फोाटो साभार: न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स)




वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) लगातार इस बात से इनकारा कर रहा है कि कोरोना वायरस हवा से भी फैल सकता है. संगठन का कहना है कि कोरोना वायरस बडी ड्रॉपलेट (Larger Droplets) के जरिये ही फैल सकता है, जिनका ज्‍यादा देर हवा में रहना नामुमकिन है. उसका कहना है कि ये वायरस ड्रॉपलेट के अलग-अलग सतहों पर गिरने (Contaminated Surfaces) और उसके बाद उन जगहों को छूने के बाद नाक, मुंह या चेहरे पर हाथ लगाने से फैलता है.

सैंपल लेने के बाद अब इन चीजों की जांच करेंगे वैज्ञानिक
वुहान के अस्‍पताल में शोध करने वाले वैज्ञानिक अब ये पता करेंगे कि अस्‍पताल की हवा से जुटाए गए एयरोसोल में मौजूद कोरोना वायरस के आरएनए संक्रमण फैला सकते हैं या नहीं. वैज्ञानिक पता करेंगे कि उन्‍हें हवा में कोरोना वायरस का नुकसान नहीं पहुंचाने वाला हिस्‍सा मिला है या इससे उस हवा में सांस लेने वाला बीमार हो सकता है. द न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल एकेडमीज ऑफ साइंसेस, इंजीनियरिंग एंड मेडिसिन में एमर्जिंग इंफेक्शियस डिजीज और 21वीं सदी में स्‍वास्‍थ्‍य जोखिम की स्‍टैंडिंग कमेटी के प्रमुख हार्वी वी. फाइनबर्ग का कहना है, 'इस शोध से अभी ये पता पता नहीं चला है कि हवा में वायरस अपनी संख्‍या में इजाफा कर सकता है या नहीं. यही नहीं ये भी अहम सवाल है कि क्‍या हवा से लिए गए नमूनों से वायरस को कल्‍चार किया जा सकेगा यानी क्‍या आप लैब में इस पर परीक्षण करने के लिए अलग कर पाएंगे?'

वैज्ञानिकों ने अस्‍पतालों के अलावा सार्वजनिक जगहों की हवा से भी सैंपल इकट्ठे किए हैं.


अस्‍पतालों के अलावा सार्वजनिक जगहों से भी लिए सैंपल
वैज्ञानिकों ने वुहान के रेनमिन हॉस्पिटल और कोरोना मरीजों के इलाज के लिए बनाए गए एक अस्‍थायी अस्‍पताल की हवा से एयरोसोल के नमूने लिए हैं. इसके अलावा वुहान और आसपास के इलाकों की सार्वजनिक जगहों की हवा से भी सैंपल जुटाए गए हैं. इनमें एक आवासीय इमारत, एक सुपरमार्केट और दो डिपार्टमेंट स्‍टोर शामिल हैं. ये सैंपल्‍स फरवरी और मार्च में जुटाए गए हैं. अस्‍पताल के आइसोलेशन वार्ड और मरीज के कमरे की हवा में बहुत कम मात्रा में वायरस मिले हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन हवाओं में वेंटिलेशन की अच्‍छी व्‍यवस्‍था होने के कारण ऐसा हुआ है. इसके उलट टॉयलेट एरिया, स्‍टोर रूम या वेंटिलेशन की अच्‍छी व्‍यवस्‍था की कमी वाली छोटी जगहों की हवा में वायरस काफी मात्रा में पाया गया है. इसके अलावा उन्‍होंने उन कमरों की हवा से भी सैंपल जुटाए, जहां मेडिकल स्‍टाफ प्रोटेक्टिव क्‍लोद बदलते थे. हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर अस्‍पताल साफ-सफाई का ज्‍यादा से ज्‍यादा ध्‍यान रखें तो हवा से संक्रमण फैलने का जोखिम बहुत कम हो सकता है.

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