प्रकाश को नदी की तरह बहते देखा शोधकर्ताओं ने, जानिए क्या था वह प्रयोग

प्रकाश को नदी की तरह बहते देखा शोधकर्ताओं ने, जानिए क्या था वह प्रयोग
वैज्ञानिकों ने पहली बार प्रकाश का यह बर्ताव प्रयोग में देखा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रकाश (Light) विशेष परिस्थितियों में बिखरने के बजाए नदी की तरह शाखाओं (Branches) में बहता है.

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प्रकाश (Light) के बारे में हमारे वैज्ञानिकों की धारणा कई बार बदली है तो कई बार बेहतर भी हुई है. पहले उन्हें लगता था कि प्रकाश केवल तरंग (Wave) हैं फिर बाद में सिद्ध हुआ कि वह तरंग और कणों दोनों का मिश्रण है.  हाल ही में हुए एक खास प्रयोग में शोधकर्ताओं ने उसका एक और अजीब रूप देखा है. उन्होंने प्रकाश को नदी (River) की तरह बहते देखा है.


कहां हुआ यह अध्ययन
हाल ही में नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक इजराइल इस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी- टेक्नियन के शोधकर्ताओं ने पहली बार प्रकाश को शाखाओं में बहते देखा जैसा कि नदी बहती है. इस अध्ययन को टेक्नियन के पीएडी छात्र एनातोले पात्सिक ने मिगुएल बैनडर्स के साथ किया जबकि शोध की अगुआई टेक्नियन के प्रोफेसर ऊरी सिवान ने की.
क्या हुआ इस अध्ययन में
आमतौर पर जब तरंग किसी भी ऐसी जगह से गुजरती है जहां बाधाएं हों तो वह स्वाभाविक तौर पर बिखर जाती है जिसे स्कैटरिंग ऑफ लाइट कहते हैं. यह बिखराव सभी दिशाओं में होता है. स्कैटरिंग एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसे हमारे आसपास कई जगह होते देखा जा सकता है. धरती से आसमान के नीले दिखाई देने की वजह भी यही प्रक्रिया है.



और क्या हुआ इस प्रयोग में अलग
लेकिन जब व्यवाधानों की लंबाई प्रकाश की वेवलेंथ से कहीं ज्यादा हो तो प्रकाश असामान्य रूप में बिखरता है. यह शाखाओं में बंटने लगता है जिसकी तीव्रता बहुत ही ज्यादा होती है जिससे जैसे जैसे तरंग आगे बढ़ती वह विभाजित होने लगती है. इस प्रक्रिया को शाखा प्रवाह यानि कि Branched Flow कहते हैं.

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आमतौर पर प्रकाश की किरणें या तो सीधी चलती है या फिर उनमें बिखराव होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


पहले भी हो चुके हैं इस तरह के प्रयोग
इस प्रक्रिया को पहली बार साल 2001 में इलेक्ट्रोन के साथ होते देखा गया था. उससमय सुझाया गया था कि यह प्रक्रिया सभी तरह के तरंगों के साथ हो सकती हैं जिसमें ध्वनि तरंगों और साथ ही सागर की तरंगों के साथ भी हो सकती है. एसिस्टैंट प्रोफेस मिगुएल बैंडर्स ने कहा, ”वैसे तो उनकी टीम कुछ नया पता करने की कोशिश में रहती है, लेकिन इस अध्ययन वे कुछ और ही खोज रहे थे, लेकिन जो उन्होंने देखा वह उससे कहीं बेहतर था जो वे देखना चाहते थे.”

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क्या कहा शोधकर्ताओं ने
उन्होंने कहा, “हम जानते थे कि तरंगें जब समान माध्यम में आगे बढ़ती हैं तो वे फैलती हैं. लेकिन दूसरी तरह के माध्यमों में प्रकाश का बर्ताव अलग हो सकता है.  जब हमारे पास अव्यवस्थित माध्यम रहा जिसमें विविधताएं खास तरह की थीं जैसे कि पहाड़ों और घाटियों जैसा इलाका तब तरंगें खास अंदाज में आगे बढ़ेंगीं और आगे बढ़ने के साथ ही शाखाएं बनाएंगी. इस तरह वे एक पेड़ की शाखाओं का सुंदर स्वरूप बना सकती हैं.”

क्या किया शोधकर्ताओं ने  
शोधकर्ताओं ने लेजर बीमक को साबुन की एक महीन परत के साथ जोड़ा. इस परत में अलग अलग मोटाई के कई व्यवधान थे. उन्होंने पाया कि प्रकाश जब इस साबुन की महीन फिल्म में गया तो वह बिखरा नहीं बल्कि उसने कई शाखाएं बना लीं और प्रकाश की शाखा प्रवाह (Branched Flow) की प्रक्रिया अपना ली.

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जब प्रकाश बिखरता है को स्कैटरिंग ऑफ लाइट का प्रक्रिया होने की संभावना ज्यादा होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


यह अनोखी घटना
पात्सिक ने बताया, “ऑप्टिक्स में हम आमतौर पर प्रकाश को केंद्रित करने में और एक बीम के हतौर पर प्रासारित करने के लिए बहुत मेहनत करते हैं, लेकिन यहां हैरानी की बात यह थी की साबुन की परत का असामान्य स्वरूप ने प्रकाश को केंद्रित होने से रोक दिया है. यह प्रकृति के तरफ से हैरान करने वाली एक और घटना है.”

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शाखा प्रवाह बनाने की क्षमता ऑप्टिक्स की दुनिया में नए आयाम खोल देगी और इसके साथ ही इस प्रक्रिया के साथ होने वाले शोधों में अवसर भी. प्रोशपल उरी सिवान का कहना है कि यह प्रकाश की तरंगों के साथ इस प्रक्रिया का पहला प्रदर्शन हैं. इस अनोखी चीज की खोज से ज्यादा उत्साहवर्धक कुछ और नहीं हो सकता”
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