कौन है वो नेता, जो मुस्लिमों को डेनमार्क में गैरजरूरी मानता है?

दक्षिणपंथी समूह के लीडर रमसुस पालुदन की हिरासत के बाद मामला बढ़ने लगा

Sweden riots: दक्षिणपंथी संगठन के समर्थकों ने कुरान जलाया, जिसके बाद स्वीडन में हिंसा भड़क उठी.

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    स्वीडन दंगों की चपेट में है. शुक्रवार से ही यहां सैकड़ों लोग दक्षिणपंथी समूह के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं. असल में मामला तब शुरू हुआ, जब समूह ने अपने नेता रमसुस पालुदन को गिरफ्तार करने के विरोध में कथित तौर पर कुरान को जला दिया. इससे भड़का मुसलमान समुदाय विरोध प्रदर्शन कर रहा है. मामले की आंच पूरे देश में फैल रही है. इस बीच जानिए, कौन है वो नेता, जिसके लिए शांतिप्रिय देश में भड़की है हिंसा की आग.

    मीटिंग में रोकने से शुरू हुआ बवाल
    सबसे पहले तो विस्तार से मामले को समझते हैं. यहां के शहर माल्मो में एक मीटिंग होने वाली थी. इस मीटिंग में दक्षिणपंथी समूह के लीडर रमसुस पालुदन भी शामिल होने वाले थे. बता दें कि वे डेनमार्क से हैं और अपने कट्टरपंथी विचारों को लेकर जाने जाते हैं. मीटिंग का विषय भी था- स्कैंडिनेवियाई देशों में इस्लामीकरण. बता दें कि उत्तरी यूरोप के आने वाले देशों को स्कैंडिनेवियाई देश कहते हैं. इनमें नॉर्वे, स्वीडन व डेनमार्क आते हैं.

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    कुरान की प्रति जला दी
    मीटिंग के संवेदनशील विषय को देखते हुए उन्हें इसमें शामिल नहीं होने दिया गया, बल्कि स्वीडन की सीमा पर ही रोक दिया गया. वे एक तरह से हिरासत में ले लिए गए. स्थानीय प्रशासन को अनुमान था कि इससे मीटिंग में आग उगलते विचार देने से भड़कने वाली हिंसा नहीं होगी. लेकिन हुआ इसका उलट ही. पालुदन के समर्थकों ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी का दमन माना और बदले में हिंसात्मक कदम उठाते हुए कुरान की प्रति जला दी. साथ ही इसका वीडियो भी पोस्ट किया गया. ऐसा ब्लूमबर्ग ने टीटी न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया है.

    माल्मो शहर में लोग गाड़ियां जलाने लगे और साथ ही पुलिस पर भी पथराव करने लगे


    शुरू हो गई हिंसा
    उस वीडियो के फैलने के साथ ही मुसलमान समुदाय में गुस्सा भड़क गया. सीमावर्ती माल्मो शहर में लोग गाड़ियां जलाने लगे और साथ ही पुलिस पर भी पथराव करने लगे. वहां पर अब भी गुस्सा भड़का हुआ है. इधर पुलिस की हिरासत से निकलने के बाद नेता पालुदन ने फेसबुक पर पोस्ट किया- मैं स्वीडन में दो सालों के लिए बैन हो चुका है. हालांकि यहां बलात्कारियों और कातिलों का स्वागत है.

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    इस नेता के बारे में हम क्या जानते हैं
    पालुदन पिछले साल इंटरनेशनल मीडिया में पहली बार सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने बेकन (मुस्लिमों के लिए वर्जित मांस) के साथ रखकर कुरान को जलाया था. वैसे वे पेशेवर वकील हैं. साल 2017 में पालुदन ने स्टेम कर्स (Stam Kurs) नामक पार्टी बनाई. ये धुर दक्षिणपंथी विचारों वाली पार्टी है. साथ ही वे फेसबुक पर लगातार मुसलमानों की बढ़ती आबादी और उनके आक्रामक रवैये के खिलाफ लिखते और पोस्ट करते रहे.

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    खूब लोकप्रिय होने लगे
    डेनमार्क में उनकी लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी कि साल 2019 में हुए डेनिश चुनावों में वे जीत के काफी करीब पहुंच गए थे. चुनाव के दौरान अपनी कैंपेन और यहां तक कि अपने एजेंडा में भी पालुदन ने डेनमार्क से 3 लाख से ज्यादा मुस्लिम शरणार्थियों को हटाने का वादा किया था. हालांकि इसके बाद भी उनकी पार्टी स्टेम कर्स केवल 2 प्रतिशत से पीछे रह गई.

    पालुदन ने डेनमार्क से 3 लाख से ज्यादा मुस्लिम शरणार्थियों को हटाने का वादा किया था (Photo-wallpaperflare)


    जून में पालुदन पर अपनी पार्टी की सोशल साइट से एंटी-मुस्लिम बातें और वीडियो पोस्ट करने का आरोप लगा. नस्लवाद के आरोप में उन्हें तीन महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी और उन्हें वकालत से भी रोक दिया गया.

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    डेनमार्क से मुस्लिमों को हटाने का वादा किया था
    वैसे जिस एजेंडा के आधार पर पालुदन जीत के पास पहुंच चुके थे, वो था डेनमार्क में शरणार्थी मुसलमानों की आबादी. बता दें कि ये कई बार यूरोपियन देशों में मुद्दा बनती रही है. जहां तक डेनमार्क की बात है, Religion.dk ने साल 2018 में कहा था कि देश में 3 लाख 6 हजार मुस्लिम हैं. इस तरह से वे वहां की सबसे बड़ी माइनोरिटी आबादी है. इसमें से अधिकतर लोग मिडिल ईस्ट के आतंक से बचते हुए आए हैं. लेकिन अब वहां तेजी से मस्जिदें बन रही हैं और स्थानीय लोग भी नए धर्म को स्वीकार कर रहे हैं. आमतौर पर धर्मनिरपेक्ष कहे जाने वाले डेनमार्क में मुस्लिमों के लिए अलग कानून की मांग हो रही है. इसपर बहुत से दूसरे धर्म के लोग परेशान हैं और उनकी यही समस्या पालुदन के पक्ष में जा रही है.

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