चंद्रमा की वजह से आएगी समुद्र तटों में बाढ़, नासा के शोध ने बताया कैसे

चंद्रमा (Moon) की कक्षा में बदलाव का सीधा असर दुनिया के तटीय इलाकों पर पड़ेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

NASA के अध्ययन में बताया गया है कि 2030 के दशक में समुद्री तटीय इलाकों (Coastal Regions) में बाढ़ आएगी जिसकी वजह चंद्रमा (Moon) की कक्षा में बदलाव होगा.

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    दुनिया में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के दुष्परिणामों को लेकर लगातार कोई न कोई अध्ययन चेतावनी दे रहे हैं. लेकिन जलवायु परिवर्तन के एक प्रभाव को हमारा चंद्रमा भी घातक बना रहा है. नासा के वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन के जरिए अगले दशक में आने वाले खतरनाक नतीजों के बारे में भी जानकारी निकाली है. अध्ययन में यह पूर्वानुमान लगाया गया है कि अमेरिकी तटीय इलाकों में 2030 के दशक में  उच्च ज्वार (High Tide) के कारण होने वाली बाढ़ की रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी होगी. वैज्ञानिकों ने इसका कारण महासागरों के जलस्तर के बढ़ने के साथ चंद्रमा की कक्षा (Orbit of Moon) के डगमगाने को बताया है.

    चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण
    शोधकर्ताओं का कहना है कि यह सब चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के बढ़ने से होगा जिसका सीधा प्रभाव पृथ्वी पर होगा. इससे उच्च ज्वार या हाई टाइड में बहुत ज्यादा इजाफा होगा और साथ ही जलवायु परिवर्तन की वजह से महासागरों का जल स्तर भी बढ़ जाएगा जिससे बहुत अधिक नुकसान होने की संभावना है.

    अभी क्या है स्थिति
    अमेरिका के नेशनल ओसियानिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के मुताबिक साल 2019 में आटलांटिक और खाड़ी तटों पर बाढ़ के 600 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए थे. वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण में यह बदलाव उसकी कक्षा के डगमगाने से होगा. जिसका प्रभाव पृथ्वी पर उच्च ज्वार बढ़ने के रूप में होगा.

    और भी खराब होंगे हालात
    दो साल पहले ये सभी मामले उच्च ज्वारके कारण आई बाढ़ के थे. जलवायु परिवर्तन ने समुद्री जलस्तर इतना ज्यादा बढ़ा दिया है कि उच्च ज्वार तटीय इलाकों में बाढ़ लाने के लिए काफी थे. ऐसे में चंद्रमा का बढ़ा हुआ गुरुत्वाकर्षण उच्च ज्वार वाली बाढ़ को और भी बदतर बना देंगे. नासा चीफ ने मुताबिक निचले इलाके में जोखिम ज्यादा है और उनकी हालात बहुत ज्यादा खराब होने वाली है.

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    नासा (NASA) ने हाल के समय पर पृथ्वी संबंधित शोधों पर अपना ध्यान ज्यादा केंद्रित किया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    तूफान में बदले बिना भी घातक
    नासा के समुद्र जलस्तर बदलाव टीम इस मामले में जरूर नियोजन और सुरक्षा के लिए जरूरी जानकारी जुटाने और पहुंचाने का काम कर रही है. इस अध्ययन के प्रमुख लेखक फिल थॉम्पसन ने बताया है कि उच्च ज्वार बाढ़ अभी तूफान में नहीं बदलेंगे, लेकिन फिर भी उनका प्रभाव कुछ ऐसा ही रहेगा.

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    नहीं हो सकेगा व्यापार व्यवसाय
    थॉमसन का कहना है कि जब महीने में 10 से 15 बाद बाढ़ की स्थिति हुई तो ऐसे इलाके में व्यापार- व्यवसाय काम नहीं कर पाएंगे. नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित इस अध्ययन में इन सब का कारण चंद्रमा की कक्षा में डगमगाहट को बताया गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह डगमगाहट 18.6 साल में पूरा होता है अलग-अलग तरह के दो गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के दौर से गुजरता है.

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    जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण पहले ही दुनिया के कई तटीय इलाके डूब के खतरे से जूझ रहे हैं.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    क्या होगा इन दो दौर में
    पहला दौर समुद्री लहरों को कम रखता है जहां उच्च ज्वार छोटे होते हैं और भाटा या लो टाइड ऊंचे होंगे लेकिन दूसरे दौर में उच्च ज्वार और ज्यादा ऊंचे होंगे और भाटा निम्न होंगे. समुद्री जल स्तर के बढ़ने के साथ ही 2030 के दशक में ये प्रभाव और ज्यादा हो जाएंगे. 18. 6 साल के आधे हिस्से में पृथ्वी के नियमित ज्वार भाटा असामान्य हो जाएंगे. इसमें इनका प्रभाव कम होगा. वहीं दूसरे हिस्से में ज्वार और भाटा दोनों ही असामान्य रूप अधिक हो जाएंगे.

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    शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया इस समय ज्वारा-भाटा की बढ़ने वाली स्थिति का सामना करना रह है और यह अगला चक्र  2030 के दशक के मध्य में फिर से शुरू होगा. साफ है कि यह प्रभाव पूरी दुनिया में ही दिखाई देगा. यह मालद्वीप, नीदरलैंड, भारत, और पूर्वी एशिया के कई इलाकों को डुबो देगा जो पहले ही समुद्र जलस्तर बढ़ने से डूब का खतरा झेल रहे हैं.

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