इन विवादों में पहले भी सामने आ चुका है रॉबर्ट वाड्रा का नाम

जांच के सिलसिले में रॉबर्ट वाड्रा को शनिवार को फिर से ED के सामने पेश होना है.

News18Hindi
Updated: February 8, 2019, 4:55 PM IST
इन विवादों में पहले भी सामने आ चुका है रॉबर्ट वाड्रा का नाम
रॉबर्ट वाड्रा (फाइल फोटो)
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Updated: February 8, 2019, 4:55 PM IST
रॉबर्ट वाड्रा कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी के जीजा हैं. इन दिनों वह लंदन में अपनी कथित प्रॉपर्टी को लेकर चल रही ED की जांच के चलते चर्चा में हैं. पिछले हफ्ते कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तारी से बचने के लिए पटियाला हाउस कोर्ट में अर्जी लगाई थी. जहां उन्हें 16 फरवरी तक के लिए अंतरिम जमानत मिल गई थी. हालांकि जांच के सिलसिले में उन्हें शनिवार को फिर से ED के सामने पेश होना है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक संजय भंडारी ने माना था कि रॉबर्ट वाड्रा, उनके सहयोगी मनोज अरोड़ा और उसके बीच ईमेल्स हुए थे और इनमें घर के संबंध में बातचीत है. इस बंगले को अक्टूबर, 2009 में 19 करोड़ रुपए में खरीदा गया था और जून 2010 में बेच दिया गया.

मेल में सामने आया था वाड्रा का नाम
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार ही आयकर विभाग ने मई, 2016 में भंडारी के ठिकानों पर छापा मारा था. इस दौरान भंडारी के ईमेल आईडी पर आए और यहां से भेजे ईमेल्स की जांच भी की गई थी. इनमें से एक ईमेल रॉबर्ट वाड्रा ने 4 अप्रैल, 2010 को अपनी निजी ईमेल आईडी से भेजा था. तब आयकर अधिकारियों के मुताबिक संजय भंडारी ने तलाशी के समय ही स्वीकार कर लिया था कि इस मेल में लंदन स्थित घर की साज-सज्जा से जुड़ी बातचीत है.

यूपीए-I के दौर में बढ़े वाड्रा और उठने लगे  सवाल


रॉबर्ट वाड्रा ने 1997 में आर्टेक्स नाम की एक हैंडीक्राफ्ट्स की कंपनी खोली थी. बाद में उन्होंने कई कंपनियां खोलीं. उनकी मां मॉरीन उनकी कंपनियों स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी, स्काई लाइट रियल्टी, नॉर्थ इंडिया आईटी पार्क्स, रियल अर्थ एस्टेट्स और ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग में डायरेक्टर हैं. ये सारी कंपनियां नवंबर 2007 और जून 2008 के बीच रजिस्टर्ड कराई गई थीं. उस वक्त इनका पेड-अप शेयर कैपिटल 5 लाख रुपये से 25 लाख रुपये के बीच था. बताते चलें, पेड-अप शेयर कैपिटल वह पैसा होता है जो शेयर के बदले में कंपनी को अपने शेयरहोल्डर्स से मिलता है.

क्या था DLF विवाद?
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अरविंद केजरीवाल भी रॉबर्ट वाड्रा पर गड़बड़ी का आरोप लगा चुके हैं. अक्टूबर, 2011 में उन्होंने कहा था कि रॉबर्ट वाड्रा ने DLF से बहुत कम दामों पर जमीन और 65 करोड़ का बिना ब्याज का लोन लिया है और इसके बदले DLF को राजनीतिक फायदे पहुंचाने का वादा किया है. केजरीवाल ने इस मामले में जांच की मांग भी की थी. इस वक्त तक केजरीवाल राजनीति में नहीं आए थे. वाड्रा ने इसका कोई सीधा जवाब न देते हुए केजरीवाल को 'मैंगो मैन इन बनाना रिपब्लिक' बताया था. वहीं DLF ने भी ऐसी किसी डील से इंकार किया था.

कॉरपोरेशन बैंक का ओवरड्राफ्ट
कई रिपोर्ट्स में वाड्रा की कंपनियों की बैलेंस शीट में भी गड़बड़ी का दावा किया था. कहा गया था कि कॉरपोरेशन बैंक से एक 7.94 करोड़ का एक ओवरड्राफ्ट भी मिला था. हालांकि कॉरपोरेशन बैंक ने भी इससे इंकार कर दिया था.

एक मामला यह भी उठा था
22 मार्च, 2012 को एक और ख़बर सामने आई थी, जिसमें यूनिटेक में वाड्रा के 20 परसेंट शेयर होने की बात कही गई थी. हालांकि मीडिया ने इस रिपोर्ट का फॉलोअप नहीं लिया और यह आई-गई बात हो गई.

वाड्रा के मामले में फाइनेंशियल एक्सप्रेस अख़बार ने एक संपादकीय में लिखा था, 'सरकार और कांग्रेस पार्टी के लिए समस्या ज्यादा गंभीर है. एक रियल स्टेट कंपनी के लिए जितनी भी छूटें चाहिए वो पाने के बाद हमेशा यूपीए चीफ (तत्कालीन चीफ सोनिया गांधी) के दामाद पर उंगलियां उठती रहेंगी. अब यह सरकार और कांग्रेस पार्टी का दायित्व है कि वे साबित करें कि जो क्लियरेंस दिए जा रहे हैं वो किसी भी प्रभाव के चलते नहीं हैं.'

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