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यहां सड़कों पर पुलिस नहीं, रोबोट हैं तैनात, लॉकडाउन तोड़ने वाले का लेते हैं ID

यहां सड़कों पर पुलिस नहीं, रोबोट हैं तैनात, लॉकडाउन तोड़ने वाले का लेते हैं ID

अस्पतालों में भी इनके इस्तेमाल की योजना बना रही है

अस्पतालों में भी इनके इस्तेमाल की योजना बना रही है

लॉकडाउन (lockdown) के दौरान ट्यूनीशिया (Tunisia) की सड़कों पर पुलिस (police) की जगह रोबोट घूम रहे हैं जो हर आने-जाने वाले को रोकते और उनसे ID कार्ड और बाहर निकलने की वजह पूछते हैं.

    इस उत्तरी अफ्रीकन देश में लॉकडाउन का पालन ठीक से हो सके, इसके लिए सड़कों पर पुलिस की बजाए रोबोट तैनात किए गए हैं. ये रोबोट लगातार पेट्रोलिंग करते रहते हैं और सड़कों पर कोई भी घूमता नजर आए तो उससे कड़ाई से पूछताछ करते हैं. यहीं पर इनका काम खत्म नहीं होता. रोबोट इस रिपोर्ट को राहगीर के ID के साथ पुलिस कंट्रोल रूम भेजते हैं. कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के ट्यूनीशिया के इसी तरह के कदमों के कारण इस देश में अब तक संक्रमण 553 तक ही पहुंचा है, जबकि बहुत से देश इससे काफी प्रभावित देखे जा रहे हैं.

    ट्यूनीशिया में लॉकडाउन का ये तीसरा सप्ताह चल रहा है. 17 मार्च से यहां लॉकडाउन हुआ है, जो 19 अप्रैल तक चलने वाला है. इसके तहत केवल जरूरी सेवाएं ही खुली हुई हैं और इन्हीं के लिए लोग बाहर निकल सकते हैं. लॉकडाउन के दौरान लोगों पर नजर रखने के लिए यहां दूसरे देशों की तरह पुलिस तैनात नहीं है, बल्कि रोबोट ये काम कर रहे हैं. पी-गार्ड्स के नाम से इन रोबोट को पेट्रोलिंग पर लगाया गया है. 4 पहियों के साथ एक थर्मल इमेज कैमरा और लाइट डिटेक्शन तकनीक से युक्त ये रोबोट सड़क पर चल रहे किसी भी व्यक्ति की तुरंत तस्वीर ले लेता है, इससे किसी के बचकर भागने की गुंजाइश नहीं रहती. इसके बाद रोबोट उसके पास जाकर आईडी कार्ड की मांग करते हैं और जांच के लिए इसकी इमेज कंट्रोल रूम में भेजी जाती है.

    रोबोट सड़क पर चल रहे किसी भी व्यक्ति की तुरंत तस्वीर ले लेता है


    इसके कई फायदे हैं जैसे सरकार मान रही है कि ये ह्यूमन टू ह्यूमन कॉन्टैक्ट को टालने का एक बेहतर तरीका है. इससे सबसे पहले तो पुलिस और सेना पर संक्रमण का खतरा कम होगा. दूसरा, आम लोगों में पुलिस की बजाए रोबोट से डर ज्यादा दिख रहा है. वैसे ट्यूनीशिया में लॉकडाउन की शुरुआत में प्रेसिडेंट Kais Saied ने पुलिस और सेना की तैनाती की थी लेकिन बाद में संक्रमण का खतरा टालने के लिए उन्हें हटाकर रोबोट्स को तैनात कर दिया गया.

    इस रोबोकॉप को साल 2015 में बनाया गया था, जिसके बाद से ये दुनिया के कई देशों में सिक्योरिटी गार्ड का काम कर रहे हैं. एक रोबोट की कीमत 76 से लेकर 80 लाख तक होती है. सड़कों पर रोबोकार्प की सफलता के बाद अब ट्यूनीशियन सरकार अस्पतालों में भी इनके इस्तेमाल की योजना बना रही है लेकिन यहां इन्हें सिक्योरिटी की बजाए मरीजों के परिजनों की मदद के लिए तैयार किया जाएगा.

    महीनेभर पहले एक अस्पताल में 14 रोबोट्स को अलग-अलग कामों के लिए तैनात किया गया


    वैसे COVID-19 के मामले में WHO की फिजिकल डिस्टेंसिंग की सलाह को मानते हुए बहुत से देश रोबोट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. जैसे चीन के वुहान में ही महीनेभर पहले एक अस्पताल में 14 रोबोट्स को अलग-अलग कामों के लिए तैनात किया गया. ये वहां पर फ्लोर और कमरों को संक्रमण रहित बनाने, दवाइयां मरीजों तक पहुंचाने, उनका बुखार नापने, हार्ट रेट देखने और ब्लड ऑक्सीजन लेवल जांचने जैसे काम कर रहे हैं. साथ ही साथ वे मरीजों के मनबहलाव का भी काम कर पाते हैं. Science Robotics जर्नल में इसी महीने छपे एक लेख के मुताबिक थोड़े बदलाव के बाद रोबोट ही नाक और गले से सैंपल लेने का भी काम करने लगेंगे. इससे ग्राउंड लेवल पर काम कर रहे अस्पताल कर्मियों के संक्रमण के संपर्क में आने का डर कम होगा.

    अस्पतालों के अलावा रोबोट्स शॉपिंग मॉल और सुपरमार्केट जैसी जगहों पर भी लगाए जा रहे हैं. जैसे जर्मनी के lindlar में कई सुपरमार्केट में रोबोट्स तैनात हैं जो किसी को भी कोविड-19 से जुड़े नियम तोड़ते देखते हैं तो तुरंत चेतावनी देते हैं. इसे  'Prepper' नाम दिया गया है.

    जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में ह्यूमनॉइड रोबोट पर ट्रायल चल रहा है


    कोरोना जैसी बेहद संक्रामक बीमारी के मामले में रोबोट्स की जरूरत को भारत भी समझ रहा है. जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में ह्यूमनॉइड रोबोट पर ट्रायल चल रहा है कि वे मरीजों को दवाएं देने या सफाई का काम कितनी कुशलता से कर सकते हैं. ट्रायल सफल होने पर उन्हें कोविड-19 पॉजिटिव लोगों की देखभाल में लगाया जा सकता है. केरल में भी इसी तरह का प्रयोग हो रहा है ताकि आइसोलेशन वार्ड में मरीजों की मदद की जा सके. चैन्नई में भी Stanley Medical College and Hospital में रोबोट की मदद लेने की योजना बनाई जा रही है. यहां पर रोबोह्यूमन का पहला ट्रायल सफल भी हो चुका है.

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    Tags: China, Corona positive, Corona Suspect, Coronavirus in India

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