क्या 2050 तक Robots करने लगेंगे सभी इंसानी काम, जानिए विशेषज्ञ का जवाब

रोबोट्स अंतरिक्ष अभियानों का काफी खर्चा बचा सकते हैं.
रोबोट्स अंतरिक्ष अभियानों का काफी खर्चा बचा सकते हैं.

साल 2050 तक रोबोट्स (Robots) सभी इंसानी काम कर सकेंगे. एक ट्रांसह्यूमनिस्ट (Trnashumanist) ने इसकी बहुत उम्मीद जताई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 29, 2020, 6:51 PM IST
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नई दिल्ली: विज्ञान जगत में ऐसी बहुत सी कोशिशें की जा रही हैं जिसमें रोबोट खास काम कर सकें जो अब तक इंसान करते हैं. क्या इंसान वैज्ञानिक तकनीक की मदद से ऐसा रोबोट बना सकता है जो सारे इंसानी काम कर सके. अब दावा किया जा रहा है कि यह साल 2050 तक मुमकिन है.

किसने किया यह दावा
इस सवाल का जवाब एक ट्रांसह्यूमनिस्ट विचारक ने दिया है. ट्रांसह्यूमनिस्ट मानते हैं कि इंसान को अपनी जैविक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए तकनीक का इसतेमाल करना चाहिए. उनके मुताबिक यह बहुत मुमकिन भी है.

कितने प्रतिशत संभावना है ऐसा होने की
इस विचारधारा को सिलिकॉन वैली में बहुत समर्थन मिला है और इसके समर्थकों में हाल ही खासा इजाफा भी हुआ है. इन्हीं में से यूके की ट्रांसह्यूमन पार्टी के कोषाध्यक्ष और लंदन फ्यूचरिस्ट के अध्यक्ष डेविड वुड ने यह दावा किया है कि इस बात की 50 प्रतिशत संभावना है कि साल 2050 तक रोबोट सारे इंसानी काम कर सकेंगे.



Robot
आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस ने रोबोट को बहुत सक्षम बना दिया है.(प्रतीकात्मक फोटो)


क्या पहले से ही ऐसा कह रहे हैं वुड
वुड ने कहा, “मुझे लगता है कि इस बात की 50 प्रतिशत संभावना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सभी इंसानी कामों से आगे निकल जाएगी और आधी सदी गुजरने तक रोबॉट्स सारे इंसानी काम कर सकेंगे.” एक्सप्रेसडॉटसीओडॉटयूके में प्रकाशित लेख के अनुसार वुड ने कहा, “मैं पहले ही कह चुका हूं 2025 तक ऐसा होने की 10 प्रतिशत संभावना है.”

क्या है समस्या
आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस वह बिंदु है जहां मशीन किसी मामले में इंसानी बुद्धिमत्ता के बराबर आ जाती हैं या उससे आगे निकल जाती हैं. वुड ने दलील दी कि हम जो विनाशकारी तकनीकी क्षमता विकसित कर रहे हैं वह इंसानी जीव विज्ञान से मेल नहीं खाती. हमारा कुछ इंसानी बर्ताव हमारे जैविकविकास के शुरुआत में ठीक था, लेकिन अब यह खतरनाक हो चला है.

इस उदाहरण से समझें यह समस्या
वुड ने उदाहरण देते हुए कहा, “कम समय वाली बातों पर हमारा ज्यादा ध्यान देना, हमसे अलग लोगों से हमारा डर. इस तरह की बातें पहले ठीक थीं, लेकिन अब ये हमारे लिए खतरनाक हैं. जब हमारे आस पास मीठा नहीं होता था तब हमें मीठा पसंद होना सही बात थी, लेकिन अब जब हमारे आस पास बहुत मीठा खाने को उपलब्ध है, ऐसे में भी मीठा पसंद होना हमारे इंसानी व्यवहार की अच्छी बात नहीं है.”

क्या करना होगा हमें
वुड ने जोर देते हुए कहा, “इससे पहले की हम हमारे भावों पर भयावह तकनीक को हावी होने दें, हमें पता लगाना होगा कि यह आदतें हमें कैसे नियंत्रित करती हैं. ऐसा न करना घातक या विनाशक हो सकता है. मुझे लगता है कि हमें इंसानी व्यवहार को बेहतर करना होगा.”

मनुष्य में सुधार की जरूरत
वुड की चिंता क्षमता नहीं है और न ही तकनीकी विकास है. वे तो केवल मनुष्यों में ही सुधार चाहते हैं जिससे “यदि हम बेहतर हुए बिना ही ताकतवर और होशियार होते गए तो हम अपनी ताकत और होशियारी का खतरनाक इस्तेमाल करेंगे. चाहे जानबूझ कर करें या फिर अनजाने में. हमें व्यापक विनाश के लिए केवल कुछ ही प्रतिशत खराब लोगों की जरूरत होगी.”

तो क्या रोबोट को इंसानी काम नहीं करना चाहिए
वुड के विचार संकेत देते हैं कि उन्हें इस बात की चिंता नहीं है कि तकनीक मानव से आगे निकल जाएगी, बल्कि तकनीक के लिए मानव कितना सही तरीके से उपलब्ध होगा यही उनकी चिंता है. बेशक वुड की बातों से साफ है कि रॉबोट्स एक न एक दिन मानव से आगे निकल ही जाएंगे और इस दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बहुत तेजी से आगे जा रही है.

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