रोहित शेखर मर्डर की तरह इस चैंपियन बैडमिंटन स्टार की हत्या में संदिग्ध थी बीवी

रोहित शेखर मर्डर की तरह इस चैंपियन बैडमिंटन स्टार की हत्या में संदिग्ध थी बीवी
सैयद मोदी (फाइल फोटो)

सैयद मोदी देश के सबसे बड़े बैडमिंटन खिलाड़ी थे. उनकी हत्या के कुछ सालों बाद उनकी पत्नी अमिता ने उस रसूख वाले शख्स से शादी कर ली, जिन्हें मोदी के मर्डर के लिए अमिता के साथ चार्जशीट किया गया था

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  • Last Updated: April 26, 2019, 6:25 PM IST
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इन दिनों देश में दिवंगत राजनीतिज्ञ एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर की हत्या का मामला खासा चर्चित है. इस मर्डर में पुलिस ने उनकी बीवी अपूर्वा को गिरफ्तार किया है. इस मर्डर ने 30 साल पुराने उस हाईप्रोफाइल मर्डर को ताजा कर दिया है. जब देश के सबसे बड़े बैडमिंटन खिलाड़ी की हत्या में उसकी बीवी और दोस्त का नाम उछला था. पुलिस ने उन्हें संदिग्ध भी माना था.

इस मामले में 28 जुलाई 1988 को लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम के बाहर बैडमिंटन खिलाड़ी सैयद मोदी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. जब ये हत्या हुई तब सैयद मोदी स्टेडियम में प्रैक्टिस करके निकल रहे थे. जैसे ही वो सड़क पर पहुंचे, तभी हत्यारों ने उन पर आठ गोलियां दाग दीं.

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वो देश के टॉप बैडमिंटन खिलाड़ी थे. आठ बार राष्ट्रीय चैंपियन बन चुके थे. उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन सिंगल्स का गोल्ड जीता था. जिस समय मोदी की हत्या हुई, उस समय वो महज 28 साल के थे. माना जा रहा था कि वो देश का नाम और रोशन करेंगे. इसी बीच ये दुर्भाग्यशाली घटना हो गई. गौरतलब है कि उन्होंने उस समय देश के टॉप खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण को हराकर अपने लिए टॉप पोजीशन बनाई थी.
मर्डर से हिल गया था सारा देश 

जैसे उनके मर्डर की खबर आईं. पूरा देश हिल गया. किसी की समझ में नहीं आया कि क्यों कोई एक ऐसे खिलाड़ी को मारेगा, जिसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है. अगले दिन के अखबार इसी मर्डर की सुर्खियों से रंगे हुए थे. बाद में जब साजिश की परतें उधड़ने लगीं. सब साफ होता गया. इस हत्या में उनकी पत्नी अमिता मोदी और उस समय राजनीति में रसूख रखने वाले संजय सिंह का नाम सामने आया..

सैयद मोदी की शादी का जमकर विरोध हुआ था


पहले प्यार फिर विरोधों के बीच शादी 
1978 में सैयद मोदी जूनियर नेशनल चैंपियन थे. उसी समय उनका सेलेक्शन बीजिंग में एक इंटरनेशनल टूर्नामेंट के लिए हुआ. उस टीम में एक महिला खिलाड़ी भी थीं. उसका नाम अमिता कुलकर्णी  था. दोनों एक दूसरे की ओर आकर्षित हो गए. हालांकि मोदी मुसलमान थे और गोरखपुर के एक बेहद साधारण परिवार से थे. वहीं अमिता महाराष्ट्र के अच्छे परिवार से थीं. मुंबई के उच्च परिवार से ताल्लुक रखने वाली अमिता बड़े स्कूल में पढ़ी लिखीं और मॉडर्न लड़की थीं.

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जब दोनों करीब आए और उनकी चर्चाएं जोर पकड़ने लगीं. इसलिए भी कि दोनों का धर्म अलग था और इसलिए भी क्योंकि दोनों अलग-अलग बैकग्राउंड से ताल्लुक रखते थे. दोनों परिवारों ने भी इसका खासा विरोध किया, लेकिन सारे विरोध के बाद भी सैयद मोदी और अमिता ने 1984 में शादी कर ली.

फिर संजय सिंह से अमिता की नजदीकी
जिस साल अमिता की शादी सैयद मोदी से हुई उसी साल उनकी मुलाकात अमेठी के राजा संजय सिंह से हुई. संजय सिंह राजनीतिक रसूख वाले इंसान थे, राजीव गांधी के मित्र थे और साथ ही अमेठी के राजघराने से थे. करियर बनाने के चक्कर में अमिता ने मां बनने से इनकार कर दिया.
सैयद मोदी को शक होने लगा कि अमिता का अफेयर संजय सिंह से चल रहा है. पति को और जलाने के लिए अमिता एक डायरी में संजय सिंह के साथ रोमांस की डिटेल्स लिखा करती थीं. जब वो घर से बाहर होतीं, तो मोदी चुपके से वो डायरी पढ़ते और दुखी होते. ये बात अमिता को भी मालूम थी कि सैयद मोदी उसकी डायरी पढ़ते हैं.

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बढ़ता गया शक 

1987 में अमिता ने सैयद मोदी को बताया कि वो मां बनने वाली है. सैयद मोदी को शक था कि अमिता उनसे नहीं, बल्कि संजय सिंह से प्रेग्नेंट है. मई 1988 में बच्ची का जन्म हुआ, जिसका नाम आकांक्षा रखा गया. मोदी की ह्त्या के समय बेटी महज दो महीने की थी.

यूं हुआ मर्डर
बेटी के पैदा होने के दो महीने के बाद मोदी और अमिता के बीच कटुता जबरदस्त तरीके से बढ़ चुकी थी. 28 जुलाई 1988 की शाम वो हमेशा की तरह अपने स्कूटर से निकल रहे थे. तभी दो बाइक सवारों ने उनका रास्ता रोका. मोदी कुछ समझ पाते उससे पहले ही हमलावरों ने 0.38 रिवॉल्वर से उनके सीने में दनादन आठ गोलियां उतार दीं.

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गोलियां इतनी पास से चलाई गईं थीं कि मोदी को इलाज का वक्त भी नहीं मिला. उनकी मौके पर ही मौत हो गई. केस सीबीआई को सौंपा गया. सीबीआई ने मोदी के घर रेड मारकर डायरी हासिल कर ली. उस डायरी की वजह से मोदी के मर्डर के पीछे उनकी वाइफ और संजय सिंह का हाथ होने का शक पैदा हुआ.

फिर किसे हुई सजा
नवंबर 1988 में सीबीआई ने इस केस में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया था. आरोपियों में संजय सिंह, अमिता मोदी, जितेंद्र सिंह, भगवती सिंह, अखिलेश सिंह, अमर बहादुर सिंह और बलई सिंह शामिल थे. सीबीआई का आरोप था कि संजय सिंह, अमिता मोदी और अखिलेश सिंह ने सैयद मोदी के मर्डर की साजिश रची थी. बाकी चार लोगों ने इस हत्याकांड को अंजाम तक पहुंचाया था.
आखिरी आरोपी भगवती सिंह को लखनऊ के सेशन कोर्ट ने दोषी करार दिया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. 22 अगस्त 2009 को अदालत ने सीबीआई की फांसी की सजा की मांग को खारिज कर दिया था.

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अदालत में क्या हुआ
अदालत में संजय सिंह की तरफ से दिग्गज वकील रामजेठमलानी ने मोर्चा संभाला था. सैयद मोदी मर्डर केस की जांच जब पूरी हुई तो कोर्ट में सीबीआई के तमाम दावों की धज्जियां उड़ गई थीं. सितंबर 1990 में संजय सिंह और अमिता मोदी का नाम इस केस से ही अलग कर दिया. बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक और अहम आरोपी अखिलेश सिंह को इस मामले से बरी कर दिया. लंबे समय बाद 22 अगस्त 2009 को भगौती सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.

फिर अमिता और संजय ने शादी कर ली
केस से बरी होने के बाद अमिता मोदी और संजय सिंह ने शादी कर ली. इसने दुनिया भर की मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा. शादी और इससे पहले मर्डर केस में नाम आने के चलते संजय सिंह की काफी फजीहत हुई. उन्हें काफी सालों तक राजनीति से किनारा करना पड़ा.

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