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दुनिया के लिए अनोखी होगी वाजपेयी जी के नाम पर बनने वाली 'अटल टनल'

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Updated: December 26, 2019, 5:50 PM IST
दुनिया के लिए अनोखी होगी वाजपेयी जी के नाम पर बनने वाली 'अटल टनल'
रोहतांग टनल का नाम होगा ‘अटल टनल’

रोहतांग टनल (Rohtang Tunnel) को बनाने का फैसला अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) के प्रधानमंत्री रहने के दौरान ही लिया गया था. वाजपेयी अक्सर मनाली जाया करते थे और इस टनल की प्रगति पर खास नजर बनाए हुए थे..

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  • Last Updated: December 26, 2019, 5:50 PM IST
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) के जन्मदिन 25 दिसंबर के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने रोहतांग टनल (Rohtang Tunnel) का नाम बदलकर अटल टनल (Atal Tunnel) रखने का ऐलान किया. रोहतांग टनल हिमाचल प्रदेश के मनाली से लेह, लद्धाख और कश्मीर को जोड़ेगी. अब ये अटल टनल के नाम से जानी जाएगी. प्रधानमंत्री ने कहा है कि इस टनल से इलाके का विकास होगा. इससे टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और ज्यादा से ज्यादा लोग यहां तक पहुंच पाएंगे.

खास बात ये है कि इस टनल को बनाने का फैसला अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बने रहने के दौरान ही लिया गया था. वाजपेयी अक्सर मनाली जाया करते थे और इस टनल की प्रगति पर खास नजर बनाए हुए थे. उस वक्त प्राइम मिनिस्टर ऑफिस सीधे इस प्रोजेक्ट की देख-रेख कर रहा था. बताया जा रहा है कि ये टनल सितंबर 2020 तक शुरू हो जाएगा.

सबसे ऊंचाई पर बनी सबसे लंबी टनल
अटल टनल 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनाई जा रही है. इसकी लंबाई करीब 8.8 किलोमीटर है. टनल बनने के बाद ये विश्व में इतनी ऊंचाई पर बनी एकलौती सबसे लंबी टनल होगी.

इस टनल की चौड़ाई 10.5 मीटर है. इसके दोनों ओर 1 मीटर का फुटपाथ बनाया जाएगा. इस टनल के भीतर अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ियां चल पाएंगी. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस टनल से होकर हर दिन करीब 3 हजार कारें और डेढ़ हजार ट्रकें गुजरेंगे.

पीर पंजाल की पहाड़ियों को काटकर इस टनल को बनाया जा रहा है. इस टनल के बन जाने के बाद मनाली और लेह की दूरी करीब 46 किलोमीटर कम हो जाएगी. इससे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को करोड़ों की बचत होगी. इससे हिमाचल और लेह लद्दाख के वैसे इलाके भी सालोंभर खुले रहेंगे, जो सर्दियों के मौसम में छह महीने तक के लिए देश के दूसरे हिस्सों से कट जाते हैं.

rohtang tunnel named as atal tunnel know its full details
रोहतांग टनल का नाम हुआ ‘अटल टनल’
रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण है ये टनल
भारत की सैन्य ताकत के लिहाज से भी ये टनल खासी महत्वपूर्ण है. इससे होकर भारतीय सेना सर्दियों में भी आराम से लेह लद्दाख के दुर्गम इलाकों तक पहुंच जाएगी. फिलहाल इन इलाकों में सेना को पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

अटल टनल पर तेजी से काम चल रहा है. करीब 3 हजार मजदूर और 650 स्थायी कर्मचारी दिन-रात इस टनल को बनाने में लगे हैं. बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन मुख्य तौर पर इस प्रोजेक्ट पर लगा है. इस प्रोजेक्ट को 4 साल पहले ही पूरा कर लिया जाता. लेकिन टनल में अचानक से अधिक मात्रा में पानी आ जाने से काम प्रभावित हुआ.

कैसे शुरू हुआ टनल निर्माण
इस टनल के बारे में सबसे पहले 1990 में सोचा गया. मई 1990 में इस टनल को लेकर एक स्टडी रिपोर्ट जारी हुई. इस टनल को लेकर जून 1994 में भौगोलिक रिपोर्ट दी गई. टनल के डिजाइन और बाकी विशेषताओं को लेकर दिसंबर 1996 में एक रिपोर्ट सौंपी गई.

2003 में इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली. इसके बाद सुरक्षा मामलों की केंद्रीय कमिटी ने इस प्रोजेक्ट को 2005 में मंजूरी दी. प्रोजेक्ट के लिए 2007 में टेंडर जारी किए गए, जिसके बाद 28 जुलाई 2010 को इस प्रोजेक्ट का फाउंडेशन स्टोन रखा गया. 1 फरवरी 2015 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था.

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रोहतांग टनल का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया है.


अटल टनल में कौन सी सुविधाएं मिलेंगी
इस टनल में सफर के दौरान कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध होंगी. हर 150 मीटर पर टेलीफोन की सुविधा होगी. हर 60 मीटर पर आग बुझाने का यंत्र लगा होगा. हर 500 मीटर पर आपातकालीन निकास की व्यवस्था होगी. हर किलोमीटर पर हवा की क्वालिटी जांचने वाला यंत्र लगा होगा. इस टनल में ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम लगा होगा. हर 250 मीटर पर सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे. साथ ही किसी भी घटना का अपनेआप पता लगाने वाले यंत्र भी लगे होंगे.

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First published: December 26, 2019, 4:26 PM IST
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