खूबसूरती के लिए 700 गधों के दूध से नहाती थी यह प्रिंसेस, लगाती थी मगरमच्छ का मल

खूबसूरती को जब क्लियोपैट्रा ने अपनी ताकत मान लिया, वो सिर्फ गधी के दूध से स्नान करने तक ही नहीं रुकी. झुर्रियां हटाने के लिए उसने मगरमच्छ का मल भी अपनी त्वचा पर लगाना शुरू किया.

News18Hindi
Updated: April 11, 2019, 5:31 PM IST
खूबसूरती के लिए 700 गधों के दूध से नहाती थी यह प्रिंसेस, लगाती थी मगरमच्छ का मल
क्लियोपेट्रा (फाइल फोटो)
News18Hindi
Updated: April 11, 2019, 5:31 PM IST
क्लियोपैट्रा को रोम की सबसे खूबसूरत रानी माना जाता है. कहा जाता है कि अपनी खूबसूरती और दिलकश अदाओं से वो किसी को भी अपना दीवाना बना सकती थी. लेकिन मान्यताएं यह भी हैं कि क्लियोपैट्रा असल में इतनी दिलकश नहीं थी. जूलियस सीजर और मार्क एंथोनी को भी अपना दीवाना बनाने वाली यह रानी कुछ ऐसे सौन्दर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करती थी जिसकी आप और हम कल्पना भी नहीं कर सकते. एलोवेरा, नीम और हल्दी जैसे प्राकृतिक तत्व हम भले ही अपनी त्वचा पर इस्तेमाल कर लें, लेकिन क्या आप यह बात मानेंगे कि क्लियोपैट्रा गधी के दूध और मगरमच्छ के मल को सुखाकर अपनी त्वचा पर लगाती थी!

गधी का दूध था खूबसूरती का राज!
कहा जाता है कि 30 ई.पू. में अलेक्सेंड्रीया और मिस्र में क्लियोपैट्रा से खूबसूरत त्वचा किसी भी महिला की नहीं थी. अपनी त्वचा की खूबसूरती के लिए क्लियोपैट्रा हर रोज पानी की जगह गधे के दूध से नहाती थी. एक स्नान के लिए भरपूर दूध जुटाने के लिए 700 गधों की जरूरत पड़ती थी.

गधी का दूध का फायदों से भरा


क्लियोपैट्रा की सेवा में कई हजार सेवक-सेविकाएं थे जो उनकी जरूरत का हर सामान उनके एक आदेश पर जुटा देते थे. कहा जाता है कि इसका उसे भरपूर फायदा हुआ. त्वचा के लाल चकत्तों के साथ ही गधे के दूध से उसकी झुर्रियां और झाइयां भी गायब हो गईं थीं. इसी से क्लियोपैट्रा में इतना आत्मविश्वास आया कि वो मार्क एंथोनी को अपनी तरफ मोहित कर पाई.

क्या सचमुच फायदेमंद है गधे का दूध?
वैज्ञानिक मानते हैं कि गाय या भैंस के दूध से कई गुना बेहतर होता है गधी का दूध. दरअसल अन्य दूध की तुलना में गधी का दूध खट्टा माना जाता है. जब दूध खट्टा होता है, उसमें मौजूद लाक्टोज शुगर लैक्टिक एसिड में बदल दी जाती है. यह काम दूध में मौजूद बैक्टीरिया 'लेक्टोबैसिलस' करते हैं. लैक्टिक एसिड एक किस्म का अल्फा हाइड्रोक्सी एसिड होता है. इस तरह के एसिड जैसे ही त्वचा पर लगाए जाते हैं, वो हमारी 'डेड स्किन' को हटा देते हैं, जिससे नई और चमकदार त्वचा सतह पर आ जाती है. रोज ऐसा करने से त्वचा के दाग धब्बे कम होते हैं. इसीलिए भारतीय आयुर्वेद में दही से स्नान करना फायदेमंद बताया गया है.
Loading...

सवाल यह उठता है कि क्या गधी के दूध में इतना लैक्टिक एसिड मौजूद होता है जो त्वचा को रीजुविनेट कर सके. एक रिपोर्ट के अनुसार गधी के दूध में गाय, भैंस और बकरी के दूध से अधिक 7.4 प्रतिशत लैक्टोज होता है जो इंसानी दूध से मिलता-जुलता है. अधिक लैक्टोज यानी अधिक लैक्टिक एसिड बनने की संभावना. यही कारण है कि क्लियोपैट्रा ने कई सालों तक गधी के दूध के प्रयोग से खुद को खूबसूरत बनाया.

आधुनिक कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में जो फेयरनेस और 'एंटी-रिंकल' क्रीम बनाए जाते हैं, उनमें अल्फा हाइड्रोक्सी एसिड की मात्रा 8% के आस-पास रखी जाती है. यह मात्रा गधी के दूध में मौजूद लैक्टिक एसिड (7.4%) के बहुत पास है.

गधी का दूध है कॉस्मेटिक्स का भविष्य
हाल ही में वैज्ञानिकों ने गधी के दूध के प्रयोग से बनी एक क्रीम पर रिसर्च की. इस रिसर्च के परिणाम वाकई चौंकाने वाले थे. देखा गया कि अन्य क्रीमों से अलग ये क्रीम बुढ़ापे की निशानी यानी झुर्रियां हटाने में कई गुना अधिक सक्षम है. लैक्टोज के साथ ही गधी के दूध में गाय और भैंस के दूध की तुलना में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल, बायोएक्टिव एंजाइम और कोएंजाइम अधिक संतुलित मात्रा में होते हैं. इसी कारण यह निखार बढ़ाने और झुर्रियों को घटाने में मददगार होता है. सही ढंग से गधी के दूध का प्रयोग कर क्रीम बनाने से यह पिंपल, झाईं, फोड़े-फुंसियों और त्वचा में होते वाली खुजली से भी आराम दिलाता है.

अकेली क्लियोपैट्रा ही नहीं, और भी थे गधी के दूध के दीवाने
रोम में औरतों की खूबसूरती उनकी शक्ति का परिचय होती थी. यही कारण है कि महिलाएं अपना रूप निखारकर राजाओं को अपना दीवाना बनाती थीं. इसके लिए क्लियोपैट्रा की ही तरह अन्य महिलाएं भी गधी के दूध से नहाती थीं. इनमें से एक थी रोम के राजा 'नीरो' की पूर्वपत्नी पौपीया भी गधी के दूध से नहाती थी. उनकी सवारी हमेशा गदहियों के झुंड के साथ ही कहीं यात्रा पर निकलती थी, ताकि हर रोज के स्नान के लिए दूध मिल सके. कहा जाता है कि नेपोलियन की बहन पौलीन बोनापार्ट भी गधी के दूध से नहाती थी.

खूबसूरती के लिए वैज्ञानिक बन गई थी क्लियोपैट्रा
खूबसूरती को जब क्लियोपैट्रा ने अपनी ताकत मान लिया, वो सिर्फ गधी के दूध से स्नान करने तक ही नहीं रुकी. झुर्रियां हटाने के लिए उसने मगरमच्छ का मल भी अपनी त्वचा पर लगाना शुरू किया. शायद इस बदबू को दूर करने के लिए ही उसका रुझान परफ्यूम्स की तरह बढ़ा. उसने अपनी खुद की एक परफ्यूम फैक्ट्री बनवाई, जहां हजारों की तादाद में फूल, पत्तियां, बीज और जड़ें लाई जाती थीं. इन्हें एक हफ्ते तक गरम पानी में भिगोकर रखा जाता था, फिर कपड़े से छानकर इनमें से खुशबूदार तेल निकालते थे.

वैज्ञानिक बन गयी थी क्लियोपैट्रा


क्लियोपैट्रा का प्रेमी जूलियस सीजर गंजा हो रहा था. उसके बालों को बचाने के लिए क्लियोपैट्रा ने एक नया इलाज खोजा. घोड़े के दांतों को पीसकर उनमें हिरण की हड्डी के अन्दर मौजूद मेरु मिलाकर वो जूलियस सीजर के बालों में लगाती थी. लेकिन इसका जब कोई फायदा नहीं हुआ, क्लियोपैट्रा ने सीजर को छोड़ दिया और मार्क एंथोनी से रिश्ते की शुरुआत की.

अपनी आंखों को खूबसूरत रंग देने के लिए क्लियोपैट्रा कॉपर मैलाकाइट और काला लेड सल्फाइड आंखों में लगाती थी. यानी आज के कॉस्मेटिक उत्पादों की जनक कहीं ना कहीं रोम को रानी क्लियोपैट्रा ही थी.

यह भी पढ़ें: लोकसभा चुनाव: जब जीतने वाले उम्मीदवार की भी जब्त हो गई थी जमानत

नॉलेज की खबरों को सोशल मीडिया पर भी पाने के लिए 'फेसबुक' पेज को लाइक करें
Loading...

और भी देखें

पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...

वोट करने के लिए संकल्प लें

बेहतर कल के लिए#AajSawaroApnaKal
  • मैं News18 से ई-मेल पाने के लिए सहमति देता हूं

  • मैं इस साल के चुनाव में मतदान करने का वचन देता हूं, चाहे जो भी हो

    Please check above checkbox.

  • SUBMIT

संकल्प लेने के लिए धन्यवाद

काम अभी पूरा नहीं हुआ इस साल योग्य उम्मीदवार के लिए वोट करें

ज्यादा जानकारी के लिए अपना अपना ईमेल चेक करें

Disclaimer:

Issued in public interest by HDFC Life. HDFC Life Insurance Company Limited (Formerly HDFC Standard Life Insurance Company Limited) (“HDFC Life”). CIN: L65110MH2000PLC128245, IRDAI Reg. No. 101 . The name/letters "HDFC" in the name/logo of the company belongs to Housing Development Finance Corporation Limited ("HDFC Limited") and is used by HDFC Life under an agreement entered into with HDFC Limited. ARN EU/04/19/13618
T&C Apply. ARN EU/04/19/13626