संघ को आरक्षण पर बार-बार क्यों देनी पड़ती है सफाई?

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: August 21, 2019, 6:43 AM IST
संघ को आरक्षण पर बार-बार क्यों देनी पड़ती है सफाई?
संघ प्रमुख मोहन भागवत

संघ प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के आरक्षण (reservation) पर दिए बयान को लेकर फिर बवाल शुरू हो गया है. सवाल है कि हर बार आरक्षण पर बयान देकर संघ को सफाई क्यों देनी पड़ती है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 21, 2019, 6:43 AM IST
  • Share this:
संघ प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने एक बार आरक्षण (reservation) को लेकर बयान दिया. उनके बयान के बाद संघ (RSS) की आरक्षण विरोधी मानसिकता को लेकर एक बार फिर सवाल उछाले गए. उसके बाद संघ की तरफ से एक बार फिर अपने प्रमुख का बचाव कते हुए आरक्षण के मसले पर सफाई देनी पड़ी. ये एक सिलसिला सा चल पड़ा है. पिछले कुछ वर्षों में, खासतौर पर जबसे बीजेपी सत्ता में आई है, संघ आरक्षण के सवाल को पब्लिक प्लेटफॉर्म पर उछालता रहा है. हालांकि हर बार संघ को अपने कदम वापस खींचने पड़ते हैं.

रविवार को दिल्ली के एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत बोल रहे थे. 2015 में आरक्षण पर दिए अपने बयान की चर्चा करते हुए वो बोले कि 'मैंने आरक्षण को लेकर पहले भी बात की थी. लेकिन इससे बहुत ज्यादा उथल पुथल मच गई. पूरी चर्चा मुख्य मुद्दे से कहीं और भटक गई. जो लोग आरक्षण के समर्थन में हैं, उन्हें अपनी बात रखते वक्त ऐसे लोगों का भी ख्याल करना चाहिए, जो आरक्षण के खिलाफ हैं. उसी तरह जो लोग आरक्षण के खिलाफ हैं, उन्हें अपनी चर्चा में आरक्षण का समर्थन करने वाले लोगों को भी शामिल करना चाहिए. दोस्ताना माहौल में दोनों विचारों पर चर्चा होनी चाहिए.'

संघ प्रमुख के बयान पर देनी पड़ी सफाई

मोहन भागवत के इस बयान के बाद आरक्षण को लेकर एक बार फिर बवाल शुरू हो गया. बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा कि संघ को अपनी आरक्षण विरोधी मानसिकता छोड़ देनी चाहिए. कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया- संघ का एंटी दलित और एंटी ओबीसी वाला चेहरा बेनकाब हो गया है. पीएल पुनिया बोले- बीजेपी हमेशा से संविधान को चुनौती देती आई है, अब वो आरक्षण पर चर्चा चाहते हैं.

rss mohan bhagwat reservation statement sangh policy on sc st obc quota
संघ प्रमुख मोहन भागवत


समूचा विपक्ष आरक्षण को लेकर संघ के विचार पर हमले करता रहा. सोमवार को संघ की तरफ से सफाई देनी पड़ी. संघ के प्रवक्ता अरुण कुमार ने ट्वीट किया, ‘सरसंघचालक मोहन भागवत के दिल्ली में एक कार्यक्रम में दिए गए भाषण के एक भाग पर अनावश्यक विवाद खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है. समाज में सद्भावना पूर्वक परस्पर बातचीत के आधार पर सब प्रश्नों के समाधान का महत्व बताते हुए उन्होंने आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर विचार करने का आह्वान किया. जहां तक संघ का आरक्षण के विषय पर मत है, वह अनेक बार स्पष्ट किया जा चुका है कि अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी एवं आर्थिक आधार पर पिछड़ों के आरक्षण का संघ पूर्ण समर्थन करता है.’

2014 के बाद आरक्षण को लेकर संघ का नजरिया
Loading...

2014 के बाद ऐसे कई मौके आए हैं, जब संघ पब्लिक स्पेस में आरक्षण को लेकर नए सिरे से बहस करवाने के पक्ष में खड़ी दिखी है. हालांकि हर बार माहौल बीजेपी के विरोध में बनता देखकर संघ को अपने कहे पर सफाई देनी पड़ी है.

rss mohan bhagwat reservation statement sangh policy on sc st obc quota
क्या आरक्षण को लेकर नए सिरे से बहस की जरूरत है


दिल्ली यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार कहते हैं कि दरअसल आरक्षण के मसले पर ये लोगों का मूड भांपने की कोशिश करते हैं. ये जानबूझकर अपने 22 से 25 फीसदी सवर्ण मतदाता को अड्रेस करने के लिए ऐसे बयान देते हैं और जब मामला उलटा पड़ जाता है तो अपने बयान से पलट जाते हैं. दरअसल आरक्षण विरोध संघ का एजेंडा रहा है. लेकिन बिना वातावरण तैयार किए उस पर कदम उठाने में वो हिचकिचाते हैं. क्योंकि उनके ये उलटा पड़ सकता है.

2015 में भी मोहन भागवत ने इसी तरह का बयान दिया था. बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मोहन भागवत ने कहा था कि आरक्षण पर विचार करने का फिर से समय आ गया है. संघ के मुखपत्र पांचजन्य और ऑर्गेनाइजर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि आरक्षण की जरूरत और उसकी समय सीमा पर एक समिति बनाई जानी चाहिए.

जिस तरह से आरक्षण पर राजनीति हो रही है और उसका दुरुपयोग किया जा रहा है. उसे देखते हुए आरक्षण पर फिर से विचार करने की जरूरत है. संघ प्रमुख ने सुझाव दिया था कि समिति तय करे कि आरक्षण को कितने लोगों को और कितने दिनों तक देने की जरूरत है.

2015 में उठाना पड़ा था नुकसान

2015 में मोहन भागवत के बयान के बाद बिहार की समूची चुनावी राजनीति बदल गई. नीतीश कुमार के जेडीयू और लालू प्रसाद यादव के आरजेडी के साथ मिलकर बनाए महागठबंधन ने आरक्षण पर मोहन भागवत के दिए बयान को भुना लिया. भागवत के इस बयान का हवाला देकर इसे इस तरह से प्रचारित किया गया कि संघ और बीजेपी आरक्षण को खत्म करना चाहती है.

rss mohan bhagwat reservation statement sangh policy on sc st obc quota
2015 में आरक्षण पर दिया संघ प्रमुख का बयान उलटा पड़ गया था


हालांकि उस वक्त भी संघ की तरफ से डैमेज कंट्रोल की खूब कोशिश हुई. मोहन भागवत के बयान का सही संदर्भ से लेकर उनके बयानों को तोड़ मरोड़कर पेश करने की बातें हुईं.

चुनावों में बीजेपी को महागठबंधन के हाथों हार मिली और इसके लिए संघ प्रमुख का आरक्षण विरोधी बयान को माना गया.

दरअसल ये बात भी उतनी ही सच है कि जिस तरह से बीजेपी ने राजनीति से मुस्लिम तुष्टिकरण को खत्म किया है, उसी तरह से वो आरक्षण पर नए सिरे से बहस करवाने की कोशिश में दिखती है. लेकिन इसके लिए माहौल नहीं बन पाता है. संघ की तरफ से भी बार-बार इसी कोशिश में ऐसे बयान दिए जाते हैं. लेकिन हर बार दांव उलटा पड़ जाता है.

डॉ सुबोध कुमार कहते हैं कि पिछड़ों को आरक्षण मिले हुए बमुश्किल से 25 साल हुए हैं. आरक्षण के बावजूद हम देखते हैं कि अभी तक पिछड़े चीफ सेक्रेटरी के पद तक नहीं पहुंच पाए हैं. विश्वविद्यालयों में पिछड़े और दलित प्रोफेसर नहीं मिलते हैं, न्यायपालिका में अभी भी पिछड़ों और दलितों की भागीदारी नगण्य है. तो ऐसे माहौल में आरक्षण को लेकर बहस करने की वजह कहां मिलती है? अगर आरक्षण के इतन बरसों में स्थितियां बदल गईं होती, तब तो बहस की जरूरत थी. हालात तो आज भी नहीं बदले हैं.

ये भी पढ़ें: क्या केरल में मुसलमानों का पहला जिहाद था मोपला विद्रोह

 जयंती विशेष: राजीव गांधी को लेकर सच हुई थी स्वामीजी की भविष्यवाणी!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 21, 2019, 6:30 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...