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जानिए क्या है रुद्रम और चीन के खिलाफ कितना अहम है ये

एंटी रेडिएशन मिसाइल (Anit Radiation Missile) की तकनीक आधुनिक है जिसे बहुत कम देशों के पास है. इसलिए भारत की यह परीक्षण अहम है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एंटी रेडिएशन मिसाइल (Anit Radiation Missile) की तकनीक आधुनिक है जिसे बहुत कम देशों के पास है. इसलिए भारत की यह परीक्षण अहम है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारतीय वायुसेना (IAF) के सुखोई (Sukhoi-30) विमान से एंटी रेडिएशन मिसाइल (ARM) रुद्रा (Rudra)का सफल परीक्षण भारत चीन सीमा विवाद (India-china border dispute) के लिहाज से बहुत अहम माना जा रहा है.

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    इस समय भारतीय वायुसेना (IAF) की एक मिसाइल रुद्रम (Rudram) चर्चा में है. हाल ही में भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने अपनी इस एंटी रेडिएशन मिसाइल (ARM) का सफल परीक्षण किया है. पिछले कुछ समय से चल रहे कई सैन्य परीक्षणों में यह भी एक अहम परीक्षण है जो वर्तमान भारत-चीन (India-china) सीमा विवाद के लिहाज से देखा जा रहा है. पूरी तरह से स्वदेश में विकसित यह नई पीढ़ी की मिसाइल भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ाएगी.

    क्या है इस मिसाइल को बनाने का उद्देश्य
    इस मिसाइल को भारतीय वायुसेना की हवा में वर्चस्व और रणनीतिक क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है. इसका प्रमुख कार्य दुश्मन की वायु सुरक्षा को काबू (Suppression Of Enemy Air Defenses, SEAD) करना है. यह हवा से जमीन पर मार करने वाली नई पीढ़ी की एंटी रेडिशयन मिसाइल (NGARM) है जिसका काम दुश्मन देश की राडार जैसी मिसाइल की पहचान करने वाली तकनीक को बेकार  करते हुए लक्ष्य पर सटीक वार करना है.

    दूसरे लड़ाकू विमानों के साथ भी उपयोगी
    फिलहाल यह परीक्षण सुखोई 30 विमान के साथ किया गया था लेकिन रूद्रम की खासियत यह है कि यह दूसरे लड़ाकू विमानों के साथ भी उपयोग में लाया जा सकता है जिसमें, मिराज, जगुआर, तेज श्रेणी के लड़ाकू विमान भी शामिल हैं.

    इन उंचाइयों से किया जा सकता है इसे लॉन्च
    इस मिसाइस की रेंज 100 किमी से 150 किमी तक की है. लेकिन यह ऊंचाई के साथ और ज्यादा हो सकती है. इसे 500 मीटर से लेकर 15 किलोमीटर तक की ऊंचाई से लॉन्च किया जा सकता है और 250 किमी दूर तक के लक्ष्यों को भी सटीकता से भेदने में सक्षम है. इस वजह से भारत और चीन के बीच तनाव के बीच यह मिसाइल बहुत ही उपयोगी हो जाती है.



    शानदार गाइडेंस सिस्टम
    इसमें मिलीमीटर वेव सीकर (Seeker) की सुविधा है जो 30 गीगाहर्ट्ज और उससे ऊपर की फ्रीक्वेंसी से ट्रांसमिशन कर सकता है. उड़ान के दौरान दिशाओं की जानकारी के लिए इसमें इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) के साथ ही GPS/NAVIC सैटेलाइट गाइंडेंस भी शामिल है. इसका पैसिव होम हेड (PHH) सीकर 100 किलोमीटर दूर तक के रेडियो फ्रीक्वेंसी उत्सर्जन को पकड़ सकता है. जिसमें रेडिएशन उत्सर्जन की पहचान करने वाली मोनोलिथिक माइक्रोवेस इंटीग्रेटेड सर्किट का उपोयग किया गया है.

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    बहुत तेज रिएक्शन टाइम है इसका
    5.5 मीटर लंबी और 140 किलो वजन की यह मिसाइल में डुअल पल्स्ड सॉलिड रॉकेट मोटर  (Dual-pulsed solid rocket motor) का उपयोग किया गया है जिसके इसका रिएक्शन टाइम कम है और यह विस्तृत और व्यापक तौर पर नतीजे दे सकती है.

    इस बार का परीक्षण अहम क्यों
    यह पहली बार नहीं है कि इस मिसाइल का सुखोई30 विमान के साथ परीक्षण हो रहा है. लेकिन हाल ही में भारत और चीन सीमा  विवाद के चलते भारतीय सेना की क्षमताओं की चीनी सैन्य क्षमताओं से तुलना के चलते यह परीक्षण एक अहम परीक्षण माना जा रहा है.



    भारत चीन की बीच संघर्ष के हालात बहुत ही अलग
    भारत और चीन की बीच सीमा का ज्यादातर हिस्सा हिमालय की ऊंचाइयों में है. ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति में हिमालय जैसे मुश्किल हालातों में सैन्य क्षमताओं की परीक्षा होगी. इस लिहाज से सुखोई 30 से रुद्रम का परीक्षण चीनी परिप्रेक्ष्य में एक अहम और बहुत कारगर कदम माना जा रहा है.

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    भारत और चीन के बीच का सीमा का बहुत सा हिस्सा वास्तविक नियंत्रण रेखा कहा जाता है. इस तरह दोनों ही देशों में वास्तविक सीमा को लेकर बहुत सी असहमतियां हैं जो सुलझना बाकी है.  चीन पहले भी कई भारतीय हिस्सों पर अपना दावा जता चुका है.

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