भारत में पुलिस और फौज में बाल और दाढ़ी का क्या मैनुअल है?

सेना और पुलिस में धार्मिक मान्यताओं को अभिव्यक्त करने या न करने को लेकर काफी सख्ती बरती जाती है सांकेतिक फोटो (Pixabay)
सेना और पुलिस में धार्मिक मान्यताओं को अभिव्यक्त करने या न करने को लेकर काफी सख्ती बरती जाती है सांकेतिक फोटो (Pixabay)

सेना और पुलिस महकमे में बाल और दाढ़ी रखने को लेकर नियम (beard and haircut laws in Indian army and police ) काफी सख्त हैं. गैर-सिखों को दाढ़ी रखने की इजाजत नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 12:42 PM IST
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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक मुस्लिम दारोगा के लंबी दाढ़ी रखने पर बवाल मचा हुआ है. अनुशासनहीनता के मामले में दारोगा को निलंबित कर दिया (Muslim cop in Baghpat suspended for keeping beard) गया. ये बात भी उठ रही है कि पुलिस में अगर सिखों को दाढ़ी रखने की इजाजत है तो मुस्लिमों को क्यों नहीं? इस बीच ये जानना भी जरूरी है कि देश में सैन्य सेवा या फिर पुलिस में बाल और दाढ़ी रखने के बारे में क्या नियम बनाए गए हैं.

क्यों है दाढ़ी-बाल को लेकर नियम 
सेना में अपनी धार्मिक मान्यताओं को अभिव्यक्त करने या न करने को लेकर काफी सख्ती बरती जाती है. चूंकि सेना सीधे देश से जुड़ी होती है इसलिए ऐसे नियम बने हैं कि कोई भी सैनिक या अधिकारी अपनी वेशभूषा से धार्मिक अभिव्यक्ति न करे. इससे ये पक्का होता है सेना एक यूनिट है और उसकी सामूहिक पहचान मजबूत रहेगी.

बागपत जिले में एक मुस्लिम दारोगा के लंबी दाढ़ी रखने पर बवाल मचा हुआ है- सांकेतिक फोटो

केवल सिखों को है इजाजत


इसके तहत सेना में सिखों के अलावा किसी को भी दाढ़ी रखने की अनुमति नहीं है. ये नियम भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना तीनों ही के लिए लागू है. हालांकि इन तीनों सेनाओं में भी नियम थोड़े-बहुत बदलाव के साथ लागू हो पाते हैं. जैसे विशेष परिस्थितियों में थलसेना, गैर-सिखों को भी दाढ़ी बढ़ाने की अनुमति दे सकती है. लेकिन वो परिस्थिति धार्मिक कारण नहीं हो सकती.

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एयरफोर्स में है ये नियम
वायुसेना में कोई भी अपनी धार्मिक पहचान को किसी चिह्न के माध्यम से नहीं दिखा सकता. हालांकि वायुसेना 1 जनवरी 2002 से पहले नामांकन के समय दाढ़ी रखने वाले मुसलमानों को चेहरे पर बाल रखने की अनुमति देता है. हालांकि इसकी लंबाई और रखरखाव के संबंध में कई सारे नियम भी हैं. नौसेना में दाढ़ी बढ़ाई जा सकती है लेकिन इसके लिए अधिकारी की अनुमति चाहिए होती है.

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पुलिस में भी दाढ़ी को लेकर कई नियम हैं
पुलिस विभाग के कर्मचारी बिना अनुमति मूंछें तो रख सकते हैं लेकिन दाढ़ी नहीं. केवल सिख समुदाय बिना इजाजत दाढ़ी रख सकता है, वहीं किसी दूसरे धर्म को मानने वाला ऐसा करे तो उसे डिपार्टमेंट की इजाजत चाहिए होती है. उत्तर प्रदेश पुलिस नियमावली में 10 अक्टूबर 1985 को एक सर्कुलर जोड़ा गया, जिसके अनुसार मुस्लिम कर्मचारी एसपी से इजाजत लेकर दाढ़ी रख सकते हैं. फिलहाल निलंबित मुस्लिम दारोगा के बारे में कहा जा रहा है कि उसने दाढ़ी बढ़ाने को लेकर अनुमति नहीं मांगी थी.

सेना में सिखों के अलावा किसी को भी दाढ़ी रखने की अनुमति नहीं है- सांकेतिक फोटो


रौबीली मूंछों को मिला बढ़ावा
चूंकि पुलिस महकमे में मूंछों को लेकर छूट है इसलिए बीच-बीच में इस पर दिलचस्प वाकये होते रहते हैं. जैसे दो साल पहले प्रादेशिक सशस्त्र बल (पीएसी) के एक अधिकारी बीके सिंह ने अपने मातहतों को बड़ी-बड़ी रौबीली मूंछें रखने के लिए प्रोत्साहित किया था. मूंछों के रखरखाव के लिए उन्हें अलग से भत्ता दिया जाने लगा. इसके पीछे ये सोच रही कि रौबीली मूंछों के साथ पीएसीकर्मी आम जनता से अलग लगें.

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क्यों है सिखों में दाढ़ी अनिवार्य
सिखिज्म में केश (बाल) की प्राकृतिक बढ़त को नुकसान न पहुंचाने की मान्यता है. यह प्रथा 5 ककारों में से एक है, जिसे खुद सिख गुरु गोविंद सिंह ने जरूरी बताया था. साल 1699 में गुरु ने कहा था कि मेरा सिख उस्तरा इस्तेमाल नहीं करेगा. दाढ़ी के बाल काटना उसकी बड़ी भूल माना जाएगा. सिखों के लिए दाढ़ी का महत्व इससे समझा जा सकता है कि मुगल काल में दमन के दौरान सिखों ने दाढ़ी कटाने की बजाए अपना सिर कटवाना सही माना था.

मुस्लिमों में दाढ़ी रखने या न रखने को लेकर कोई पक्का धार्मिक नियम नहीं - सांकेतिक फोटो (flickr)


अनुमति से रख सकते हैं दाढ़ी
वहीं मुस्लिमों में दाढ़ी रखने या न रखने को लेकर कोई पक्का धार्मिक नियम नहीं है. वैसे दाढ़ी रखना सुन्नत माना जाता है यानी इसे रखना अच्छा माना जाता है. लेकिन ये इस्लाम में फर्ज या अनिवार्य नहीं. यही वजह है कि पुलिस सेवा में सिखों के अलावा किसी को भी दाढ़ी रखने की इजाजत नहीं और रखनी ही हो तो अलग से इजाजत लेनी होती है.

दाढ़ी से चेहरे की पहचान छिपने का डर
अगर कोई बिना इजाजत ऐसा करे तो ये डिफेंस सर्विस रेगुलेशन के 665 रेगुलेशन के खिलाफ जाना होगा. बता दें कि दाढ़ी-मूंछों के रखने या न रखने का ये नियम सेना में दो वजहों से बना है ताकि सेना, पुलिस या पैरा मिलिट्री एक यूनिट की तरह दिखाई दे. दूसरी ये बात भी है कि ये सेवाएं सीधे देश और आम जनता की सुरक्षा से जुड़ी हुई हैं. ऐसे में दाढ़ी या मूछें रखकर चेहरे की पहचान भी बदली जा सकती है, जो देश की सुरक्षा से खिलवाड़ होगा. सिखों की भी दाढ़ी समेत फोटो ली जाती है, जिसमें ये सुनिश्चित किया जाता है कि चेहरा पूरी तरह से समझ में आए.
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