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क्या मायने हैं भविष्य अंतरिक्ष अभियानों के लिए रूस- सऊदी अरब साझेदारी के

रूस (Russia) की सउदी अरब से साझेदारी नासा से दूरी बढ़ने के संकेत है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

रूस (Russia) ने हाल ही में नासा (NASA) से दूरियां बनाने का फैसला किया है. सऊदी अरब (Saudi Arabia) के साथ रूस की साझेदारी इस दिशा में एक और कदम है.

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    दुनिया में अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है. एक समय था जब इस क्षेत्र में केवल अमेरिका और सोवियत संघ का ही वर्चस्व था. लेकिन अब दुनिया के बहुत सारे देश में इसमें हाथ आजमा रहे हैं और लंबे नियोजन भी कर रहे हैं. चीन अमेरिका और रूस (Russia) की बराबरी करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है और अमेरिका कई देशों से साझेदारी कर चुका है. अब रूस ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए सऊदी अरब (Saudi Arabia) के साथ साझेदारी करने का फैसला किया है.

    मिलकर काम करेंगे दोनों देश
    रूस और सऊदी अरब  अब भविष्य में अपने संयुक्त अंतरिक्ष अभियानों के लिए काम करेंगे. रूसी प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक ने यह घोषणा की. इसकी शुरुआत साऊदी अरब के अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण से होगी. नोवाक ने बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण के अलावा दोनों देश संयुक्त मानव अभियान पर काम करेंगे.

    विस्तृत जानकारी नहीं
    रूस के राजधानी मास्को में दोनों देशों की सरकारों के आयोगों की मीटिंग में यह जानकारी दी गई. लेकिन रूस प्रशासन ने इस बारे में विस्तार से कोई जानकारी नहीं दी. अभी यह पता नहीं चल सकता है कि दोनों देश इन योजनाओं को लागू कब करेंगे. रूस और साऊदी अरब पहले से ही एक बड़ी तेल शक्तियां हैं.

    रूस की नासा से दूरी
    रूस के इस कदम को नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी से दूरी बनाने के एक और कदम के रूप में देखा जा रहा है. रूस ने हाल ही में पता चला था कि रूस इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से हटने की मन बना चुका है. इस अभियान में रूस ने अमेरिका के साथ दुनिया के कई देशों के साथ मिलकर काम किया था. रूस साल 2025 में आईएसएस से हट जाएगा.

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    रूस नासा (NASA) के प्रस्तावित आर्टिमिस अकॉर्ड से सहमत नहीं हैं तभी उसने नासा से दूरी बनानी शुरू कर दी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    खुद कास्पेस स्टेशन
    रूस अब खुद का स्पेस स्टेशन बनाएगा इस बारे में जानकारी देते हे रूसी स्पेस एजेंसी रोसकोसमोस के प्रमुख दिमित्रि रोगोजिन ने बताया है कि इस स्पेस स्टेशन का पहला मॉड्यूल के निर्माण का काम शुरू हो चुका है और साल 2025 तक वह लॉन्च के लिए तैयार हो जाएगा.

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    इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का क्या
    साल 2024 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की की सेवाओं की समय सीमाखत्म हो रही है. रूस और सऊदी अरब इसके बाद रूसी स्पेस स्टेशन में भागीदारी के बारे में भी विचार करेंगे. रूस तभी अपने अन्य सहयोगियों से भी इस बारे में चर्चा करेगा. रूस और सऊदी अरब ने घोषणा की है कि एक बार स्पेस स्टेशन के बारे में अंतिम फैसला होने के बाद ही फैसला होगा.

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    इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में रूस और नासा सहित कई देशों की प्रयोगशालाएं हैं. (तस्वीर: @ISS_Research)


    कब तक काम करेगा आईएसएस
    इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की मियाद वैसे तो 2024 तक है लेकिन उम्मीद की जा रही है कि यह साल 2030 तक सही सलामत काम कर सकता है. यह स्पेस स्टेशन 1998 में स्थापित किया गया था. वैसे तो रूस सैंद्धांतिक रूस इंटरनेशलन स्पेस स्टेशन से अलग होने के फैसला ले चुका है लेकिन उससे जुड़ी रूसी प्रोयगशाला के मॉड्यूल का तकनीकी स्थिति के आंकलन पर ही वह आगे कदम उठाएगा.

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    रूसी वैज्ञानिकों को मानना है कि इस स्पेस स्टेशन के कुछ हिस्से अपने जीवन की अंतिम अवस्था में पहुंच चुके है. वैसे तो इसे आगे उपयोग में लाया जा सकता है लेकिन इससे गड़बड़ियों का सिलसिला शुरू हो सकता है जो आपदा में बदल जाएगा. रूसी उपराष्ट्रपित बोरिसोव का इस बारे में कहना है कि ऐसे में जीवन जोखिम में डालना सही नहीं होगा.