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रूस यूक्रेन युद्ध ने उठाए सवाल, अंतरिक्ष पर है किसका राज

युद्ध से अंतरिक्ष (Space) प्रतिस्पर्धा के विवादग्रस्त होने का संदेह होने लगा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

युद्ध से अंतरिक्ष (Space) प्रतिस्पर्धा के विवादग्रस्त होने का संदेह होने लगा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अंतरिक्ष (Space) इतना विशाल है कि इस पर कोई एक देश का अधिकार (Ownership of Space) नहीं हो सकता है. लेकिन अगर कोई देश ऐस ...अधिक पढ़ें

    रूस यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine War) के साथ ही दुनिया में शीत युद्ध से भी ज्यादा तनाव फैलता दिख रहा है. यह युद्ध अब जमीन तक ही सीमित नहीं रह गया है. कूटनीति चरम पर है, दोनों तरफ से बयानबाजी भी तेज है. ऐसा लगता है कि इस युद्ध की आंच अंतरिक्ष (Space) तक भी जाने वाली है. रूस और अमेरिका के बीच भले ही सैन्य संघर्ष खुला नहीं है. अमेरिका के रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर रूसी अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर पड़ना तय है. अब दोनों के आमने सामने होने से यह सवाल भी उठने लगा है कि ऐसे हालात में अंतरिक्ष पर किसका राज (Who Rules Space) होगा.

    एक दूसरे पर पाबंदियां
    अमेरिका की ओर से पाबंदियां लगाने का मकसद रूस के सैन्य आधुनिकरण को रोकना है. इन पाबंदियों से रूस के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर असर तो पड़ेगा ही, जवाब में रूस ने भी अपनी ओर से पाबंदी लगाते हुए कुछ अमेरिकी कंपनियों को रॉकेट इंजन और रॉकेट के ईंधन की बिक्री पर रोक लगाई है.

    अंतरीक्षीय सहयोग का खत्म होना
    इन घटनाओं के बाद रूस के तीन दशक पुराने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के बोर्ड से हटने का संकेत देने से और भी सवाल उठने लगे हैं. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का कहना है कि अंतरिक्ष मामलों में देश अचानक यूं ही उठ कर अलग होने का फैसला नहीं कर सकते. इस जद्दोजहद के बीच सवाल यह भी उठाया जाने लगा है कि क्या होगा अगर रूस इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से अलग होने का फैसला कर लेता है.

    बहुत अलग है अंतरिक्ष
    अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसे हालात नहीं है. यहां पर विचरण करना जमीन पर चलने या यहां तक कि वायुमंडल में उड़ने जैसा तक नहीं है. अंतरिक्ष अन्वेषण इंसानों के लिए एक बहुत ही कठिन चुनौती है. फिलहाल अंतरिक्ष पर दावा करने के स्थिति में कोई भी देश नहीं है. इसकी बड़ी वजह यह है कि महाशक्तियों ने भी अंतरिक्ष मामलों में दूसरे देशों की सहयोग सुनिश्चित करना शुरू कर दी है.

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    अगर सैन्य संघर्ष अंतरिक्ष (Space) तक पहुंचा वहां का संघर्ष बहुत ही अलग तरह का हो जाएगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    1958 के बाद से
    शीत युद्ध के समय में एक बाह्य अंतरिक्ष संधि हुई थी. तब से संयुक्त राष्ट्र का ऑफिस फॉर आउटर स्पेस अफेयर्स ही पृथ्वी के बाहर की गतिविधियों को देखरेख करता है. 1958 में इसे बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग वाली एक एडहॉक कमेटी लकी लिए एक विशेषज्ञ ईकाई के तौर पर बनाया गया था. संयुक्त राष्ट्र के इस निकाय का ऑफिस विएना में तब बनाया गया था जब सोवियत संघ ने अपना पहला अंतरिक्ष यान स्पूतनिक-1 लॉन्च किया था.

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    1967 से शुरू हुईं अंतरिक्ष संबंधी संधियां
    अंतरिक्ष में गतिविधियों पर निगरानी रखने और बाह्य अंतरिक्ष के उपयोग के लिए देशों के बीच संधि औपचारिक रूप 1967 में बाह्य अंतरिक्ष संधि या आउटर स्पेस ट्रीटी अस्तित्व में आई थी. इस के आधार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून का मूल ढांचा तैयार किया गया. शुरू में इस पर रूस अमेरिका और यूके ने हस्ताक्षर किए थे. इसके बाद 1984 तक अंतरिक्ष संबंधी पांच बहुपक्षीय समझौते हुए.

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    अब हालात ऐसे नहीं रह गए हैं कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) जैसे सहयोग फिर से हासिल किया जा सके. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    यह है प्रमुख कानूनी नियम
    फिलहाल अंतरिक्ष के कानूनों के अंतर्गत कई नियम हैं. इसमें बाह्य अंतरिक्ष में चलाई वाली गतिविधियों को मानव कल्याण के लिए ही उपयोग किया जाएगा. इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अंतरिक्ष सभी देशों के साथ पूरी मानवजाति का प्रांत होगा. इसका उपयोग सभी के लिए मुफ्त होगा और अंतरिक्ष पर किसी एक देश की संप्रभुता नहीं होगी.

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    इसी तरह के कई नियम हैं जो अंतरिक्ष, चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों पर मानवीय गतिविधियों पर लागू होते हैं. जो मूल रूप से किसी एक देश के प्रभुत्व को खारिज करते हैं. लेकिन पिछले कुछथ समय से जारी शीत युद्ध की तरह अंतरिक्ष के लिए होती प्रतिस्पर्धा खतरनाक मानी जा रही थी. अमेरिका के नासा के आर्टिमिस समझौते ने इस प्रतिस्पर्धा में आग में घी का काम किया और चीन और रूस को नासा के विरोध में खड़ा कर दिया. चीन के कार्यक्रम पहले ही अंतरिक्ष में अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए एक प्रयास माने जा रहे हैं. वर्तमान युद्ध में रूस और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ने पर अंतरिक्ष के लिए बुरी ही खबरें लाएगा.

    Tags: Research, Russia, USA, World

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