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रूस- यूक्रेन युद्ध: अफगानिस्तान को नजरअंदाज करना क्यों पड़ सकता है महंगा

रूस यूक्रेन युद्ध  के कारण अब पश्चिमी देश अफगानिस्तान (Afghanistan) समस्या पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

रूस यूक्रेन युद्ध के कारण अब पश्चिमी देश अफगानिस्तान (Afghanistan) समस्या पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

रूस यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine War) के चलते दुनिया के ध्यान अफगानिस्तान (Afghanistan) से हट गया है. पश्चिमी ताकतों ...अधिक पढ़ें

    सात महीने पहले अमेरिका (USA) ने जब अफगानिस्तान (Afghanistan) छोड़ा था, उस समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय वहां के हालात के लिए काफी चिंतित था. मध्य एशिया के इस देश की अर्थव्यवस्था चरमराने के कारण  लाखों लोग गरीबी और भुखमरी की ओर जाने लगे थे. दुनिया के तमाम देश, विशेषकर ताकतवर पश्चिमी देश इस मानवीय संकट से निपटने के लिए प्रयास कर रहे थे. लेकिन अब अफगानिस्तान प्राथमिकता नहीं रह गया है. तीसरे विश्व युद्ध की आशंका के चलते इस समय पूरी दुनिया का ध्यान रूस यूक्रेन संघर्ष (Russia Ukraine War) पर लगा हुआ है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी देशों को अफगानिस्तान को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

    फायदा उठाया जा सकता है
    जानकारों की आशंका है कि इस समय जो अंतरराष्ट्रीय माहौल है, अफगानिस्तान में तालिबान के अलावा कई आतंकी संगठन भी उसका नाजायज फायदा उठा सकते हैं. तालिबान अपने इस्लामिक कट्टरपंथी कानून लागू कर सकता है, और जो अफगानिस्तान के स्थायित्व के लिए तालिबान पर जो दबाव बड़ी वैश्विक शक्तियों ने लगया था, वह ढीला पड़ सकता है.

    ‘कहीं और व्यस्त होना’ एक मौका
    वैश्विक शक्ति के कहीं और व्यस्त होने का फायदा अफगानिस्तान के अन्य आतंकी संगठन उठा सकते हैं. डीडब्ल्यू की रिपोर्ट में काबुल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉर एंड पीस स्टडीज के कार्यकारी चेयरमैन तमीम असे का कहना है कि अफगानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय रुचि कम होने से  आतंकी समूहों और आपराधिक नेटवर्क को फिर से एकजुट होकर ताकतवर होने का मौका मिल सकता है.

    सुरक्षा के खतरों की अनदेखी
    इससे अफगानिस्तान में संकट और ज्यादा गहरा सकता है और इस बदलाव के समय में आपराधिक नेटवर्क फिर से सिर उठा सकता है. तमीम का कहना है कि पश्चिमी देशों में कुछ ही लोग अफगानिस्तान में किसी तात्कालिक सुरक्षा खतरे को महसूस कर रहे हैं. अभी तक तालिबान अंतरराष्ट्रीय पहचान और आर्थिक सहायता के लिए हिंसा के रास्ते की जगह कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दे रहा है.

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    अफगानिस्तान (Afghanistan) में अब आतंकी संगठन फिर से एकजुट हो सकते हैं. (फाइल फोटो)

    लंबी नहीं चलेगी ये स्थिति
    विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा लंबे समय तक नहीं चल पाएगा और शांत दिखने वाले हालात भी टिक नहीं सकेंगे. इतिहास गवाह है कि मानवीय समस्याएं हिंसात्मक संघर्म में तब्दील  होती रही हैं.  आतंकी संगठनों के लिए ऐसे देश में काम करना आसान है जो आर्थिक उथल पुथल से  गुजर रहा हो. ऐसा कोई कारण नहीं है कि अफगानिस्तान इसका अपवाद हो पाएगा.

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    बहुत बुरा है हाल
    हाल ही में हुए हमले इस बात का स्पष्ट संकेत देते हैं कि अगर अफगानिस्तान में मानवीय संकट गंभीर हुआ तो तालिबान उससे निपटने में पूरी तरह से नाकाम हो जाएगा. राजनैतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान में अधिकांश लोगों के लिए जीवन बहुत ही मुश्किल हो गया है. अंतरराष्ट्रीय सहायता ना मिलने से हालात बदतर होते जा रहे हैं.

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    अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान मानवीय समस्या से निपट नहीं पाएगा. (फाइल फोटो)

    शहरों तक में बदतर स्थिति
    अंतरराष्ट्रीय सहायता बंद हो पूरी तरह से चुकी है. तालिबान सरकारी कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं दे पा रहा है. जन स्वास्थ्य क्षेत्र में भी अराजकता की स्थिति है. गांवों के साथ शहरों में लोगों के लिए अपनी जरूरतों को पूरा कर पाना मुश्किल हो रहा है. लोग बैंकों में अपने जमा किए हुए पैसा हासिल नहीं कर पा रहे हैं. महंगाई बढ़ती जा रही है.

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    यूक्रेन में अफगानिस्तान के राजदूत रह चुके सरदार मोहम्मद रहमान उगेली का कहना है कि दुनिया ने अफगानिस्तान संकट को पहले ही भुला दिया है. इससे तालिबान को अपनी दमनकारी नीतियों को लागू करने के लिए खुली छूट सी मिल गई है. हालात 1990 के दशक जैसे होते जा रहे हैं जब तालिबान ने सत्ता हासिल की थी. ऐसे अफगानिस्तान अंतरराष्ट्रीय आतंकियों को अड्डा बन सकता है.

    Tags: Afghanistan, Research, Russia, Ukraine, World

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