क्या अमेरिका और रूस के बीच परमाणु भिड़ंत होने जा रही है?

अमेरिका रूस को टक्कर देने के लिए नए मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहा है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

अमेरिका रूस को टक्कर देने के लिए नए मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहा है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

अमेरिका रूस (America and Russia) को टक्कर देने के लिए नए मिसाइल डिफेंस सिस्टम (Missile Defense System) तैयार कर रहा है. इसपर भड़के हुए रूस ने अमेरिका को चेतावनी दे डाली.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 8, 2020, 4:19 PM IST
  • Share this:
कोरोना के बीच दुनियाभर के देशों में तनाव बढ़ रहा है. अब अमेरिका और रूस के बीच भी तनातनी दिखने लगी है. हाल ही में रूस ने अमेरिका को धमकीभरे लहजे में कहा कि अगर अमेरिका ने उसके या उसके मित्र दिशों की तरफ बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की तो रूस इसे परमाणु युद्ध की शुरुआत मान लेगा और बदले की कार्रवाई से नहीं रुकेगा.

सेना के अधिकारियों ने दिया बयान
रूस और अमेरिका में हमेशा से ही महाशक्तियों की लड़ाई चलती आई है. सोवियत संघ के टूटने के बाद सुपर पावर का दर्जा सीधे-सीधे अमेरिका के पास चला गया. इसके बाद से रूस का गुस्सा कई जगहों पर दिखता रहा है. जैसे हाल ही में रूस ने एक बयान में अमेरिका को खुली धमकी दे दी. रूस के रक्षा मंत्रालय के अखबार क्रेसनया जवेदा (Krasnaya Zvezda) में इस हवाले से खबर आई है.

ये भी पढ़ें: क्या है ब्लैक बॉक्स, जो केरल विमान हादसे के राज खोलेगा
इसमें छपे लेख में रूस के मिलिट्री जनरल एंड्रेई स्टर्लिन और कर्नल एलेक्जेंडर क्रीपिन ने इस बारे में संयुक्त बयान दिया है. उन्होंने कहा कि चूंकि बैलिस्टिक मिसाइल के बारे में ये कहा नहीं जा सकता कि वो परमाणु युद्ध के लिए तैयार किया गया है या फिर पारंपरिक हथियारों के लिए. लिहाजा ऐसे में रूस इसे परमाणु युद्ध की अमेरिकी कार्रवाई मानेगा और उसी मुताबिक काम करेगा.



रूस और अमेरिका में हमेशा से ही महाशक्तियों की लड़ाई चलती आई है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


अमेरिका तैयार रहा कर मिसाइल
बता दें कि जुलाई में अमेरिका ने रूस की एस-400 को टक्कर देने के लिए नए मिसाइल डिफेंस सिस्टम (IBCS Missile Defense System) का टेस्ट शुरू कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस डिफेंस सिस्टम का नाम इंटीग्रेटेड एयर एंड मिसाइल डिफेंस बैटल कमांड सिस्टम (IBCS) है जिसका लिमिटेड यूजर टेस्ट न्यू मैक्सिको में व्हाइट सैंड्स मिसाइल रेंज में किया जा रहा है.

ये भी पढ़ें: ये हैं दुनिया के सबसे खतरनाक एयरपोर्ट, रोंगटे खड़े करती है लोकेशन 

इसी बीच रूसी रक्षा मंत्रालय के अखबार ने कहा है कि अमेरिका की ओर से किसी भी हमले को इसी तरह से लिया जाएगा. इसके बाद रूसी सैन्य-राजनैतिक नेतृत्व मिलकर तय करेंगे कि जवाबी एक्शन कैसे लिया जाए. यूरेशियन टाइम्स में इस बारे में विस्तार से एक रिपोर्ट आई है.

क्या हो सकता है गुस्से की तह में
रूस का अमेरिका को लेकर ये बयान तब आया है कि जब अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव होने वाले हैं. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को डर है कि रूस नवंबर में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव पर असर डाल सकता है. ऐसा ही शक साल 2016 में हुआ था, जब ट्रंप जीतकर आए थे. कहा जा रहा था कि ट्रंप को जिताने में रूसी रणनीतियां काफी काम आई थीं. अब अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इसे लेकर लगातार चेतावनी दे रही हैं इसलिए रूस भी भड़का हुआ लग रहा है.

रूस और अमेरिका के बीच तनातनी की एक वजह कोरोना वैक्सीन को लेकर दौड़ भी हो सकती है


वैक्सीन की दौड़ भी एक कारण
रूस और अमेरिका के बीच तनातनी की एक वजह कोरोना वैक्सीन को लेकर दौड़ भी हो सकती है. बता दें कि रूस दुनिया को सबसे पहली वैक्सीन देने का दावा कर रहा है. 12 अगस्त को ही वो अपनी वैक्सीन का रजिस्ट्रेशन करा लेगा और वैक्सीन दुनिया के खरीदार देशों के सामने आ जाएगी. वहीं अमेरिका को काफी तेजी से काम के बाद भी वैक्सीन लाने में दिसंबर तक का वक्त लग सकता है. ये बात भी अमेरिका को खल रही है.

ये भी पढ़ें: Coronavirus: ट्रेन-बसों में किस सीट पर बैठे लोगों को कोरोना का सबसे ज्यादा खतरा है? 

रूस पर लगा चोरी का आरोप
पिछले महीने ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि रूस ने वैक्सीन का फॉर्मूला चुराने की कोशिश की है. आरोप था कि रूस का वैक्सीन बनाने का तरीका ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड के तरीके से काफी मिलता-जुलता था. हालांकि ये आरोप साबित नहीं हो सका. इस बीच कोरोना से बुरी तरह से परेशान अमेरिका ने रूस की वैक्सीन लेने से साफ मना कर दिया है. खुद अमेरकी संक्रामक रोग एक्सपर्ट एंथनी फाउसी ने ये बयान दिया. उनका कहना है कि वे रूस और चीन दोनों से ही कोरोना की वैक्सीन नहीं लेंगे क्योंकि दोनों ही देशों ने इसे लेकर काफी अपारदर्शिता बरती.

अमेरिका एक के बाद एक लंबी दूरी के नॉन न्यूक्लियर हथियार बना रहा है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


मिसाइल ही मुख्य वजह 
वैसे वर्तमान सुपर पावर अमेरिका और पूर्व सुपर पावर रूस के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिका के लगातार मिसाइल परीक्षण को माना जा रहा है. अमेरिका एक के बाद एक लंबी दूरी के नॉन न्यूक्लियर हथियार बना रहा है. जैसे पिछले साल के मध्य में अमेरिकी रक्षा विभाग (United States Department of Defense) ने घोषणा की थी कि उसने जमीन से दागी जाने वाली एक मिसाइल का परीक्षण किया है. इसपर भी रूस काफी भड़का था कि ये साल 1987 के आईएनएफ समझौते (Intermediate-Range Nuclear Forces Treaty) के तहत प्रतिबंधित है. दरअसल, यह समझौता परमाणु और मध्यम दूरी के पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल को सीमित करता है. रूस का कहना है कि यूएस ने समझौते को तोड़ा है.

ये भी पढ़ें: डेनमार्क के 300 साल पुराने घर, जिन्हें अब भविष्य का घर माना जा रहा है  

अब इस साल दोबारा अमेरिकी मिसाइलों के परीक्षण पर रूस आक्रामक हो गया है. उसके सैन्य प्रमुखों ने सीधे-सीधे कहा कि अगर उन्हें भनक भी लगी कि अमेरिका मिसाइलों के जरिए रूस या उसके आसपास की शांति भंग करने की कोशिश कर रहा है तो वे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने में देर नहीं लगाएंगे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज