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भारत और चीन भिड़े तो क्या पुराना साथी रूस साथ छोड़ देगा?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

भारत का दशकों पुराना साथी होने के बाद भी रूस (Russia) आजकल चीन-राग गा रहा है. इसके पीछे बड़ी वजह अमेरिका का भारत के साथ आना है.

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    नया साल शुरू तो गया है लेकिन साल पर पुराने वर्ष की छाया बनी हुई है, चाहे वो कोरोना वायरस हो या फिर देशों के बीच तनाव. विशेषज्ञ लगातार लड़ाई के कयास लगा रहे हैं. काफी मुमकिन है कि हालात न बदलें तो चीन और क्वाड देशों के बीच हंगामा बरप जाए. या फिर चीन की दादागिरी के कारण भारत-चीन के बीच भी हिंसक हालात बन सकते हैं. तब रूस दोनों में से किस देश का साथ देगा?

    आमतौर पर मित्र राष्ट्र युद्ध के हालात में आपस में मिलकर लड़ते हैं. रूस दशकों से खुद का भारत का दोस्त कहता रहा लेकिन फिलहाल हालात बदले हुए दिख रहे हैं. असल में रूस क्वाड देशों के खिलाफ रहा है. क्वाड देश यानी अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान. खासतौर पर अमेरिका के साथ रूस का हरदम ही छत्तीस का आंकड़ा रहा. अब अमेरिका खुलकर भारत का साथ देने लगा है तो ये मामला रूस के लिए दुश्मन का दोस्त, दुश्मन जैसा भी हो सकता है. यही कारण है कि फिलहाल रूस का झुकाव चीन की ओर दिख रहा है.

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    रूस और चीन की दोस्ती दिखने भी लगी है. कोरोना संक्रमण के दौरान लगभग सभी देशों ने चीन से पूछताछ की लेकिन रूस चुप्पी साधे रहा. उसके हाल के दिनों में चीन के खिलाफ कोई आक्रामकता नहीं दिखाई, बल्कि दोनों डिफेंस पार्टनर बन चुके हैं. हाल ही के समय में रूस और चीन ने एरियल पेट्रोलिंग शुरू कर दी. इस दौरान चीन के H-6K और रूस के TU-95 फाइटर जेट आसमान में उड़ते दिख रहे हैं. वैसे तो दोनों देशों का कहना है कि ये रुटीन एक्सरसाइज है लेकिन ये अमेरिका के खिलाफ चेतावनी मानी जा रही है.

    काफी मुमकिन है कि हालात न बदलें तो चीन और क्वाड देशों के बीच हंगामा बरप जाए- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


    यूरेशियन टाइम्स में विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि ये चीन और रूस की भारत को भी एक तरह की चेतावनी है कि वो अमेरिका से अपने रिश्ते जरा ठंडे ही रखे. रूस के पास भारत को चेताने की कोई खास वजह नहीं, सिवाय इसके कि भारत तेजी से आर्थिक शक्ति के तौर पर उभरा है और अमेरिका का करीबी हो चुका है.

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    चूंकि रूस और अमेरिका एक दूसरे के दुश्मन रह चुके हैं, लिहाजा ये दो बड़े दुश्मनों की आपसी लड़ाई है. इसमें रूस चीन और यहां तक कि पाकिस्तान का भी इस्तेमाल करता दिख रहा है. बता दें कि पाकिस्तान के पास हथियारों का जो जखीरा है, उसमें 70% से ज्यादा रूस से आयातित है. बाकी हथियार अलग-अलग देशों से हैं तो चीन भी अब पाकिस्तान के यहां सैन्य विकास के नाम पर भारी फंडिंग कर चुका है.

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    कुल मिलाकर देखें तो दुनिया की बड़ी शक्तियां अमेरिका, रूस, भारत और चीन आपस में तनावपूर्ण रिश्ते जी रही हैं और छोटी-सी बात सीधे तीसरे विश्व युद्ध की ओर ले जा सकती है. इसमें रूस भारत का 7 दशक पुराना साथी होने के बाद भी शायद चीन के पाले में रहे क्योंकि भारत-अमेरिका साथ बने हुए हैं.

    ये चीन और रूस की भारत को भी एक तरह की चेतावनी है कि वो अमेरिका से अपने रिश्ते जरा ठंडे ही रखे- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


    रूस पहले भी भारत-चीन युद्ध में तटस्थता दिखा चुका है. 2017 में डोकलाम विवाद के समय रूस ने तटस्थता की नीति अपनाई. इससे पहले 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में तो भारत का साथ रूस ने दिया लेकिन चीन के खिलाफ 1962 के युद्ध में नहीं. साथ ही बीते दो दशकों में रूस अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए चीन से भी मदद ले रहा है क्योंकि अपने लंबे-चौड़े भौगोलिक दायरे को अकेले बचाकर रखना आसान नहीं. ये भी दोनों देशों के बीच दोस्ती की वजह है.

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    इस सबके बीच ये भी मुमकिन है कि रूस भारत या चीन को चुनने की बजाए खुद को शांतिदूत दिखाए. रूस के दुनियाभर के देशों में खुद को मजबूत और शांतिपसंद देश के तौर पर स्थापित करने के प्रयास लगातार दिख रहे हैं. जैसे दो सालों पहले ही उसने अफगानिस्तान में शांति की पहल के लिए मॉस्को में वार्ता का आयोजन किया था. इसमें 10 से ज्यादा देश शामिल हुए, जिनमें भारत भी एक था. वार्ता काफी सफल रही और इस तरह से रूस की इमेज अमेरिका पर खिसियाने वाले देश से बदलकर शांतिप्रिय ताकत के तौर पर बनी.

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