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ISS तक बिना यात्री के पहुंचा रूसी cargo ship, जानिए क्या सामान ले गया है वहां

ISS तक बिना यात्री के पहुंचा रूसी cargo ship, जानिए क्या सामान ले गया है वहां

रूस का यह कार्गो यान तीन घंटे में ISS  से जुड़ गया था.  प्रतीकात्मक तस्वीर

रूस का यह कार्गो यान तीन घंटे में ISS से जुड़ गया था. प्रतीकात्मक तस्वीर

रूस का कार्गोशिप केवल तीन घंटे में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक 2.8 टन का सामान लेकर बिना अंतरिक्ष यात्री के वहां पहुंचा है.

नई दिल्ली: दुनियाभर के वैज्ञानिकों का एक संयुक्त अनूठा प्रयोग इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) है. जिसमें अमेरिका और रूस सहित दुनिया के कई देश एक साथ अंतरिक्ष अनुसंधान में लगे हैं. हाल ही में रूसी अंतरिक्ष यात्री कई दिनों के बाद इस यान से धरती पर लौटे हैं. अब रूसी यान ने अंतरिक्ष में बड़ी मात्रा में सामान सफलता पूर्वक पहुंचाया है.

कहां से पहुंचाया गया सामान
ने अपना प्रोग्रेस MS-14 नाम का अंतिरक्ष यान आईएसएस (ISS)  पर 2.8 टन का सामान और उपकरण बिना किसी अंतरिक्ष यात्री के भेजा है. इस यान ने पिछले शुक्रवार को ही कजाकिस्तान के बैकनूर कोस्मोड्रोम से उड़ान भरी.

कितनी देर में जुड़ सका ISS से यह यान
इस यान ने कक्षा के दो चक्कर लगाए और फिर आईएसएस से उड़ान के केवल तीन घंटे और 21 मिनट में ही  जुड़ने में सफलता पाई. बिना अंतरिक्ष यात्री के गए सुयोज 2.1 स्पेस शिप ने स्थानीय समयानुसार शनिवार सुबह 6.51 बजे अपनी उड़ान भरी और सफलतापूर्वक स्पेस स्टेशन की कक्षा में चला गया.

कितना सफर किया इसने
इस रॉकेट के लिए बहुत से अभ्यास किए गए थे. और अपनी निर्णायक उड़ान में यह बिना किसी परेशानी के  दिन के  11 बजकर 12 मिनट पर स्पेस स्टेशन से जुड़ गया. इस दौरान यान ने 260 मील का सफर किया.

क्या सामान भेजा गया है इससे
इस यान ने 1,543 पाउड्स का प्रोपेलेंट, 110 पाउंड की ऑक्सीजन, 926 पाउंड का पानी और 2,9994 पाउंड का कार्गो भेजा गया था. इसमें कुछ खाने का सामान और उपकरण भी शामिल थे. एक्पीडीशन 63 कमांडर क्रिस कासिडी और कॉसमोनॉट एनातोले इवानिशिन और ईवान वैगनर इस यान से अगले कुछ दिनों तक सामान स्पेसशिप में भरेंगे.

Space
ISS की शुरुआत 1998 में हुई थी.(प्रतीकात्मक फोटो)


अब आगे यह है स्टेशन के लिए कार्यक्रम
इस स्टेशन प्रोग्राम के लिए अब बहुत अहम प्रक्षेपण हैं.  अब जापानी स्पेस एजेंसी आगामी 20 मई को एक एसटीवी कार्गो शिप  भेज रही है जिससे स्टेशन की सोलर बैटरी बदली जा सकेंगी. इसके एक सप्ताह बाद नासा और स्पेस एक्स एक क्रू ड्रैगन कैप्सूल प्रक्षेपित करेंगे जिसमें एस्ट्रोनॉट्स बॉब बेन्केन और डोग हर्ले स्पेस स्टेशन के लिए रवाना होंगे.

क्यों खास है क्रू ड्रैगन की उड़ान
डेमो 3 नाम की यह फ्लाइट नासा कि लिए बहुत खास है.क्योंकि यह पिछले जुलाई 2011 के बाद पहली बार होगा कि अमेरिका की धरती से अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले हैं. इससे नासा के क्रू ड्रैगन को इस तरह के मिशन प्रमाणित हो जाए हैं और नासा की रूसी सुयोज स्पेसक्राफ्ट पर आवाजाही की निर्भरता भी खत्म हो जाएगी.

कौन सी अंतरिक्ष एजेंसी शामिल है इस अभियान में
आईएसएस के पृथ्वी की निचली कक्षा पर एक भेजा गया कृत्रिम उपग्रह है. इस कार्यक्रम में नासा और रोसकोसमोस ( रूसी स्पेस एजेंसी) के अलावा जापान की जाक्सा (JAXA), यूरोप की ईएसए (ESA) और कनाडा की सीएसए (CSA) भी शामिल हैं.

क्या काम करता है स्पेस स्टेशन
यह एक लैब की तरह काम रही है जिसमें समय समय पर इन स्पेस एजेंसी के खगोलविद जाते हैं और वहां जीवविज्ञान, मानव जीवविज्ञान, भौतकी, खगोलविज्ञान, उल्काविज्ञान, और उनके जैसे अन्य विषयों पर प्रयोगकरते हैं.  इसके अलावा उसमें मंगल और चांद पर जाने वाले अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी प्रयोग होते हैं. यह पृथ्वी का एक चक्कर करीब 92 मिनट में लगाता है.

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Tags: Nasa, Research, Science, Space

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