जानिए, दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन के बारे में सब कुछ

जानिए, दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन के बारे में सब कुछ
दुनिया को कोरोना वैक्सीन देने की दौड़ में रूस ने बाजी मार ली है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

रूसी नागरिकों को कोरोना वैक्सीन (coronavirus vaccine) मुफ्त में मिलेगी. हालांकि दूसरे देशों के बारे में अभी कुछ साफ नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 11, 2020, 4:22 PM IST
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दुनिया को कोरोना वैक्सीन देने की दौड़ में रूस ने बाजी मार ली है. वहां सोमवार को वैक्सीन को रेग्युलेटरी बॉडी की मंजूरी मिल चुकी है, इस बात का ऐलान खुद रूस के राष्ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने किया. पुतिन ने ये भी बताया कि उनकी दो बेटियों में से एक को वैक्सीन दी जा चुकी है और वो बिल्कुल ठीक है. यानी जल्द ही वैक्सीन रूस से गुजरने के बाद ग्लोबल मार्केट में भी आ जाएगी. जानिए, दुनिया की पहली कोरोना वायरस वैक्सीन के बारे में सब कुछ.

क्या है रूस की वैक्सीन
सबसे पहले तो ये बता दें कि लगभग डेढ़ महीने पहले ही अमेरिका और ब्रिटेन की सरकार ने रूस पर कोरोना का डाटा चोरी करने का आरोप लगाया था. इन देशों की साइबर सिक्योरिटी फोर्स ने कहा है कि रूस उनकी प्रयोगशालाओं से वैक्सीन का फॉर्मूला चुराने की कोशिश में है. हालांकि ये आरोप साबित नहीं हो सके और अब रूस दौड़ में बाजी मार चुका है.

व्‍लादिमीर पुतिन ने बताया कि उनकी दो बेटियों में से एक को वैक्सीन दी जा चुकी है

कहां हुई तैयार


इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार वैक्सीन को मॉस्को के गामेल्या इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी ने रूसी रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर तैयार किया है. हालांकि रूस ने वैक्सीन की तैयारी का काम गुप्त तौर पर किया. एक ओर जहां दूसरे देश अपने यहां वैक्सीन को लेकर प्रयोगों और हर तरह के डेवलपमेंट की जानकारी दे रहे थे. रूस ने लंबी चुप्पी साधी हुई थी. इसी बीच जून में वैक्सीन पर ह्यूमन ट्रायल का पहला चरण शुरू हो गया.

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कुछ जरूरी जानकारियां
स्पूतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक शुरू में मॉस्को की लैब में दो अलग-अलग फॉर्म के टीके पर प्रयोग हो रहा था, जिनमें एक तरल और एक पाउडर के रूप में था. शुरूआती ट्रायल में दो ग्रुप बने, जिनमें हरेक में 38 प्रतिभागी थे. इनमें से कुछ को वैक्सीन दी गई, जबकि कुछ को प्लासीबो इफैक्ट के तहत रखा गया. यानी उन्हें कोई साधारण चीज देते हुए ऐसे जताया गया, जैसे दवा दी जा रही हो.

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अस्पताल में पूरा हुआ ट्रायल
प्रतिभागियों को मॉस्को के ही दो अलग-अलग अस्पतालों में निगरानी में रखा गया. दूसरे देशों से ट्रायल में शामिल ज्यादातर लोगों की घर से ही निगरानी हो रही थी, वहीं रूस इस मामले में अलग रहा. उसने हर प्रतिभागी को आइसोलेशन में रखते हुए जांच की. इसमें रूस की सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटी सेचेनोफ ने ट्रायल किए और कथित तौर पर वैक्सीन को इंसानों के लिए सुरक्षित माना. दो ट्रायलों में वैक्सीन आजमाई और जुलाई में ही प्रतिभागियों को अस्पताल से छुट्टी भी मिल चुकी है. दिलचस्प बात ये है कि अब भी इसके तीसरे चरण का ट्रायल चल ही रहा है.

अब तक रूस ने अपनी वैक्सीन के फॉर्मूला के बारे में खास जानकारी नहीं दी है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


कैसे काम करेगी वैक्सीन
वैक्सीन एडेनोवायरस बेस फॉर्मूला पर बनाई गई है. एडेनोवायरस विषाणुओं के उस समूह को कहते हैं जो हमारी आंखों, श्वासनली, फेफड़े, आंतों और नर्वस सिस्टम में संक्रमण का कारण बनते हैं. यानी शरीर में विषाणु ही डाले जाएंगे लेकिन मृत अवस्था में. रूसी एक्सपर्ट्स का दावा है कि शरीर में डालने के बाद ये खुद को रेप्टिकेट करके बढ़ नहीं सकेंगे, बल्कि शरीर में एंटीबॉडी तैयार हो जाएगी, जो असल में वायरस का हमला होने पर सक्रिय हो जाएगी.

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रूस अपने यहां करेगा टीकाकरण
फिलहाल इस टीके की लिमिटेड डोज तैयार हो चुकी हैं और रूस अपने हेल्थ वर्कर्स और शिक्षकों को वैक्सीन देने से इसकी शुरुआत करेगा. सितंबर में दूसरे देशों से भी रूस अप्रूवल की बात करेगा. दूसरे देशों से सहमति मिलने के बाद वहां के लिए भी दवा का उत्पादन होने लगेगा. माना जा रहा है कि हर्ड इम्युनिटी के लिए रूस में से 4 से 5 करोड़ आबादी को टीका देना होगा. ये रूस की लगभग 60 प्रतिशत आबादी होगी. चूंकि इतनी वैक्सीन एक साथ बनाना मुमकिन नहीं, इसलिए प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन दी जाएगी.

पारदर्शिता की कमी के चलते बहुत से देश इसपर सवाल उठा रहे हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


वेस्ट ने उठाए सवाल
इधर पारदर्शिता की कमी के चलते बहुत से देश इस पर सवाल उठा रहे हैं कि रूस ने ह्यूमन ट्रायल के सारे चरण पार किये भी हैं या नहीं! यही वजह देते हुए कोरोना से बुरी तरह से परेशान होने के बाद भी अमेरिका ने रूस की वैक्सीन लेने से साफ मना कर दिया है. ब्रिटेन ने भी साफ कर दिया है कि वह अपने नागरिकों को रूसी वैक्‍सीन की डोज नहीं देगा. खुद वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का यही कहना है कि बिना पक्के डाटा के वैक्सीन दिया जाना ठीक नहीं. इन हालातों में ये भी हो सकता है कि पहले कुछ वक्त रूस की जनता पर ही लोगों की नजरें टिकी रहेंगी कि वैक्सीन से उन पर क्या असर दिख रहा है. इसके बाद दूसरे देश भी रूसी वैक्सीन लेने की सोच सकते हैं.

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कितनी होगी कीमत
रूसी एजेंसी TASS के मुताबिक रूस में यह वैक्‍सीन मुफ्त में मिलेगी. इस पर आने वाली लागत को देश के बजट में पूरा किया जाएगा. वहीं बाकी देशों के लिए वैक्सीन की कीमत का खुलासा अभी नहीं किया गया है.

क्या भारत में रूसी वैक्सीन आएगी
भारत की बात करें तो रूस ने पहले ही कह दिया है कि वो भारत को अपनी वैक्सीन देने को तैयार है. इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूस के डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड के प्रमुख किरिल दिमित्रिव ने कहा कि भारत और ब्राजील जैसे कई देश कोरोना के लिए रूसी वैक्सीन की बात कर रहे हैं. एक टीवी चैनल Rossiya-24 को दे रहे इंटरव्यू के दौरान दिमित्रिव ने भारत और ब्राजील का खुलकर नाम लिया कि वे वैक्सीन लेने में दिलचस्पी रखते हैं. हालांकि भारत की ओर से फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि इसका खुलासा हो सके. दिमित्रिव का ये भी कहना है कि दुनिया के कुल 20 देश रूसी वैक्सीन लेना चाहते हैं और बात चल रही है.
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