Explained: क्या है रूस का S-400 सिस्टम, जिसे लेकर अमेरिका तुर्की पर भड़का?

रूस का S-400 सिस्टम दुनिया के सबसे बेहतर रक्षा उपकरणों में से एक है

रूस का S-400 सिस्टम दुनिया के सबसे बेहतर रक्षा उपकरणों में से एक है

रूस का S-400 सिस्टम (S-400 air defence system of Russia) दुनिया के सबसे बेहतर रक्षा उपकरणों में से एक है. तुर्की ने भी रूस से इसके लिए डील दी, जिसपर अमेरिका काफी नाराज है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 19, 2020, 10:16 AM IST
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रूस के S-400 मिसाइल सिस्टम को लेकर तुर्की और अमेरिका के बीच घमासान चल रहा है. पिछले साल ही तुर्की ने ये मिसाइल सिस्टम की पहली खेप रूस से खरीदी थी. इसपर ट्रंप प्रशासन ने मान लिया कि वो इस सिस्टम के जरिए अमेरिकी सुरक्षा में सेंध लगाने की फिराक में है. इसके बाद ही ट्रंप ने तुर्की पर कई सारे आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए. जानिए, अमेरिका और तुर्की की इस जंग का भारत पर क्या असर हो सकता है.

इन दिनों तुर्की मुस्लिम देशों का खलीफा बनने की कोशिश कर रहा है. वो हर उस मुद्दे को अपना बता रहा है, जो मुस्लिम देशों से जुड़ा हो, फिर चाहे वो पाकिस्तान का कश्मीर राग हो, या फिर आर्मेनिया-अजरबैजान की लड़ाई. इस रवैये के बीच ही साल 2019 में इस देश ने रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम का सौदा दिया और पहली खेप भी हासिल कर ली. इसपर अमेरिका भड़का हुआ है. उसे यकीन है कि वो इसका इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ करेगा. इस सिस्टम के जरिए अमेरिकी F-16 फाइटर जेट में टोह लेने का शक खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप जता चुके.

अमेरिकी F-16 फाइटर जेट में टोह लेने का शक खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप जता चुके


बता दें कि तुर्की भी नाटो का सदस्य है और इस नाते वो रूस से एस-400 सिस्टम नहीं ले सकता. इस सिस्टम को स्टील्थ लड़ाकू विमानों के लिए खतरे की तरह देखा जाता है क्योंकि इससे वे गुप्त नहीं रह पाते हैं. बीते दिनों ऐसी रिपोर्ट्स भी आ रही थीं कि तुर्की सेना इस सिस्टम से अमेरिकी एफ-16 फाइटर प्लेन की टोह ले रही है.
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ये फाइटर प्लेन स्टील्थ यानी गुप्त कहे जाते हैं, जिन्हें कोई ट्रैक नहीं कर सकता. यही वजह है कि दुनिया के कई देशों ने अमेरिका से उसका ये विमान खरीदा है. अब अगर ऐसे में रूसी S-400 सिस्टम से ये साबित हो जाए कि अमेरिका का गुप्त विमान का दावा झूठा है तो अमेरिकी छवि को भारी धक्का लग सकता है. अमेरिका के तुर्की पर गुस्से का ये एक बड़ा कारण है.

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इधर सिस्टम की पहली खेप मिलने के बाद लगे अमेरिकी प्रतिबंधों पर तुर्की का कहना है कि पहले उसने इस तरह की प्रणाली की खरीद के लिए अमेरिका से बात की थी लेकिन उसके इनकार करने पर मजबूरन उसे रूस से डील करनी पड़ी. साथ ही उसने ये भी कहा कि वो नाटो सहयोगियों के लिए कोई खतरा पैदा नहीं करेगा.

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन


तुर्की और अमेरिका की इस लड़ाई के बीच भारत ने भी S-400 का सौदा किया और साल 2021 की शुरुआत में इसकी पहली खेप आने भी वाली है. ट्रंप प्रशासन ने भारत की इस खरीदी को लेकर एतराज जाहिर नहीं किया और अब नव-निर्वाचित बाइडन प्रशासन के रवैये को भी देखा जा रहा है.

आखिर ये S-400 सिस्टम क्या है, जिसे लेकर अमेरिका तुर्की पर इतना सख्त हुआ और किसलिए इस सिस्टम की जरूरत भारत को है? ये जमीन से हवा में वार करने वाला सिस्टम (SAM) है. इसे अपनी तरह का दुनिया का सबसे घातक सिस्टम माना जाता है, जो मध्यम से लंबी दूरी तक वार करता है. रूस के बनाए इस सिस्टम के बारे में माना जाता है कि ये अमेरिकी रक्षा प्रणाली से भी कहीं ऊपर के स्तर का है.

भारत की इस बेहतरीन सिस्टम की खरीदी के पीछे चीन काम करता है. दरअसल चीन ने भी साल 2015 में ही इसकी खरीदी के लिए रूस से सौदा किया और साल 2018 में इसकी डिलीवरी भी शुरू हो गई. ये चीन के लिए गेम-चेंजर की तरह माना गया, वहीं भारत के लिए ये खतरनाक हो सकता है. खासकर फिलहाल पूर्वी लद्दाख में जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उसमें किसी चुनौती से इनकार नहीं किया जा सकता.



चीन के लगभग साथ ही साथ भारत ने भी रूस से सिस्टम खरीदी के लिए बात शुरू कर दी. पांच फाइटर जेट के लिए देश ने लगभग 5 बिलियन डॉलर चुकाए. उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही इसकी पहली खेप हमारे पास पहुंच सकेगी. भारत और चीन के अलावा तुर्की ने तो सौदा किया ही, साथ ही इराक और कतर ने भी S-400 सिस्टम खरीदी में दिलचस्पी दिखाई.

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इस खरीदी से अमेरिकी हथियार लॉबी को तो सीधा नुकसान हो ही रहा है, साथ ही रूस के फायदे के चलते भी अमेरिका इस तरह की डील को नुकसान मान रहा है. यही वजह है कि वो तुर्की पर भड़का हुआ है. साथ ही उन सारे देशों को भी धमका रहा है, जो रूस से रक्षा उपकरणों की डील में हैं.

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भारत अमेरिका के गुस्से से बचकर रूस के साथ ये डील फाइनल कर रहा है तो इसकी वजह भारत-अमेरिका संबंध हैं. फिलहाल चीन को दोनों ही देश दुश्मन की तरह देख रहे हैं. हिंद-प्रशांत महासागर में उसे घेरने के लिए दोनों देश बड़े साथी हैं. इन हालातों में अमेरिका भारत के रक्षा उपकरणों में बढ़त को चीन के खिलाफ हथियार की तरह देखता है. अब चूंकि खुद चीन के पास S-400 सिस्टम है, लिहाजा भारत के पास ये होना काफी जरूरी हो जाता है. और अमेरिका को इसपर कोई एतराज भी नहीं.
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