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मोटर साइकिल की सवारी और खाना पकाने के भी शौकीन हैं सद्गुरु

सदगुरु
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सद्गुरु का मन ध्यान, योग के अलावा गोल्फ, क्रिकेट, वॉलीबॉल खेलने में भी लगता था. उन्होंने पेशे से बैंकर विजयकुमारी से 1984 में शादी की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2019, 12:14 PM IST
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सितंबर 1957 में कर्नाटक के मैसूर में एक डॉक्टर के घर में बेटे ने जन्म लिया. आम बच्चे की तरह उसका मन खेल-खिलौनों की बजाय प्रकृति में ज्यादा लगता. वह अकसर पेड़ की ऊंची डाल पर बैठकर हवाओं का आनंद लेता. बड़ा होने पर उसके लिए कुछ दिनों तक जंगल में रहना आम था. अनायास ही गहरे ध्‍यान में चला जाता. घर लौटता तो झोली में सांपों भरे होते. ये बच्चा बड़ा होकर सद्गुरु के नाम से जाना गया.

लोकसभा चुनाव के पहले 25 और 26 फरवरी आयोजित की जा रही राइजिंग इंडिया समिट में सद्गुरु भी शरीक होंगे. इस समिट की थीम है 'Beyond Politics: Defining National Priorities'. दो दिन के इस प्रोग्राम में हर क्षेत्र से जानी-मानी हस्तियों को बुलाया जाता है जो कि नई दिल्ली में आते हैं और भारत की सफलता व भविष्य पर चर्चा-परिचर्चा करते हैं.

11 साल की उम्र में योग का अभ्यास
सद्गुरु ने 11 साल की खेलने-कूदने वाली उम्र में योग का अभ्यास शुरू कर दिया था. एक साल में जो भी योगासन सीखे, तब से उनका नियमित रूप से अभ्यास करते आ रहे हैं. कन्या राशि वाले इस बच्चे ने स्कूली शिक्षा मैसूर के Demonstration स्कूल से ली. मैसूर के ही विश्वविद्यालस से अंग्रेजी साहित्य में ग्रेजुएशन की.
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बिजनेस में भी आज़माई किस्मत 
कॉलेज के दिनों में मोटर साइकिल की सवारी उन्हें पसंद थी. वे डिनर के लिए अकसर अपने दोस्तों के साथ मैसूर के पास चामुंडी हिल जाया करते. कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद सद्गुरु ने कई तरह के बिजनेस में भी किस्मत आज़माई, जिनमें पॉल्ट्री फार्म, ईंटे बनाने का काम शामिल था. इन कामों से उन्हें अच्छा पैसा भी मिला.

बैंकर थी पत्नी
सद्गुरु का मन ध्यान, योग के अलावा गोल्फ, क्रिकेट, वॉलीबॉल खेलने में भी लगता था. उन्होंने पेशे से बैंकर विजयकुमारी से 1984 में शादी की. उनकी पत्नी की मौत 1997 में हुई. 1990 में सद्गुरु पिता बने. उनके घर में बेटी ने जन्म लिया, जिसका नाम राधे रखा. बेटी की शादी कर्नाटक के शास्त्रीय गायक संदीप नारायण से हुई.

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पद्म विभूषण से नवाज़े गए
सद्गुरु लगातार सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेते रहे. आध्यात्मिकता में उनका ख़ूब मन लगता. इसी के प्रति योगदान के लिए वे 2017 में पद्म विभूषण से नवाज़े गए. सद्गुरु का दावा है कि उन्हें पहली दफा आध्यात्म की अनुभूति 23 सितंबर 1982 को चामुंडी हिल में एक चट्टान पर हुई. इन्होंने अपनी पहली योग कक्षा का आयोजन 1983 में मैसूर में ही किया था.

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ईशा योग केंद्र 
धीरे-धीरे उनके योगासन मशहूर हुए. उनके कार्यक्रमों में 15,000 से अधिक प्रतिभागी हुआ करते थे. योग कक्षाओं से जमा हुए पैसे को वे दान करते. 1983 में अपनी पहली योग कक्षा शुरू करने के 10 साल बाद 1993 में उन्होंने ईशा योग केंद्र  स्थापित किया. ये केंद्र संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय निकायों आर्थिक और सामाजिक परिषद के साथ काम करता है.

खाना पकाने के हैं शौकीन
सद्गुरु ने साल 2006, 07, 08 और 09 में विश्व आर्थिक मंच में भाग लिया. 2000 में संयुक्त राष्ट्र मिलेनियम वर्ल्ड पीस शिखर सम्मेलन को भी संबोधित किया. सद्गुरु कवि और लेखक भी हैं. उन्होंने अंग्रेजी में आठ से अधिक किताबें लिखीं हैं. वे खाना पकाने के भी शौकीन हैं. साथ ही अच्छे वास्तुकार भी हैं.

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